रामराज्य की प्राथमिकता में बेटियों, बच्चों की सुरक्षा नहीं, राम मंदिर निर्माण, मदरसों की जासूसी, गाय-गोबर-गोमूत्र, पढ़िए सरकार को आईना दिखाता ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल

बेरहम व्यवस्था में मरते बच्चों का सच !

गोरखपुर के बी.आर.डी अस्पताल में पिछले पांच दिनों के मरने वाले बच्चों की संख्या साठ से ऊपर पहुंच गई है। बच्चों की मौत की वजह अभी तक साफ नहीं हो पाई है। मीडिया द्वारा इन मौतों की वज़ह अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी बताई गई है। अस्पताल प्रशासन और सरकार ने ऑक्सीजन की कमी की बात को गलत और भ्रामक करार दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि जापानी बुखार की वजह से अस्पताल में रोजाना 8 से 10 बच्चों की मौते हो रही हैं। सच्चाई क्या है, यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा, लेकिन अस्पताल की सफाई पर इसीलिए भी यक़ीन करना मुश्किल है क्योंकि मृतकों में लगभग आधा दर्ज़न नवजात शिशु भी शामिल हैं। ज़ाहिर है कि कोई बच्चा मां के पेट से जापानी बुखार लेकर नहीं आया होगा। मानवता को शर्मशार करने वाले ऐसे नाज़ुक मामले में अस्पताल प्रशासन और सरकार की संवेदनहीनता लज्जित और हैरान करती है। सरकार जिस तरह बिना किसी औपचारिक जांच के अस्पताल प्रशासन के पक्ष पर मुहर लगा रही है उससे निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं बंधती। शायद पीड़ित परिवारों को कुछ लाख का मुआवजा देकर मामला रफादफा कर दिया जाय। वैसे भी उत्तर प्रदेश के रामराज्य की प्राथमिकता सूची में आम लोगों, बेटियों और बच्चों की सुरक्षा नहीं, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, मदरसों की जासूसी, भजन-कीर्तन और गाय-गोबर-गोमूत्र हैं। टुकड़ों में बंटे और बच्चों की मौत में अपना भविष्य तलाशने वाले विपक्षी दलों से भी यह उम्मीद नहीं कि वे मासूम बच्चों के परिवारों को कोई इंसाफ़ दिलवा पाएंगे। गाय और राम मंदिर के नाम पर सड़कों पर उतरने वाले हिन्दुओं और नाबालिग लड़के की कुरआन पर टिपण्णी के खिलाफ़ या तीन तलाक़ के समर्थन में हंगामा बरपा करने वाले मुसलमानों को भी साठ से ज्यादा मासूम बच्चों की हत्या से धर्म या मज़हब पर कोई ख़तरा नज़र नहीं आने वाला।-  पूर्व आई.पी.एस