हालात ए कश्मीर : शिकायत सैनिकों से नहीं राजनेताओं से होनी चाहिए, पढ़िए ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल

केवल पाकिस्तान की सरकार और वहां के सभी जेहादी गुटों ने ही नहीं, सोशल मीडिया पर भी कुछ लोगों ने कश्मीर में तैनात हमारी भारतीय सेना को न सिर्फ कलंकित करने, बल्कि आतंकी साबित करने का भी अभियान चला रखा है। यह ग़ैरजिम्मेदाराना और मूर्खतापूर्ण सोच है। कश्मीर में जो हो रहा है उसके लिए हमारे सैनिक ज़िम्मेदार नहीं हैं। वहां की समस्या राजनीतिक है और इसका हल राजनीतिक स्तर पर ही हो सकता था। इसके लिए वहां के आम लोगों और जनप्रतिनिधियों से निरंतर संवाद करने और उन्हें भरोसे में लेने की ज़िम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकारों की थी जिसमें वे बुरी तरह असफल रहे। पाकिस्तान ने इस संवादहीनता का फ़ायदा उठाया और घाटी को आतंकियों और हथियारों से पाट दिया। स्थिति जब हद से ज्यादा बिगड़ गई तो सरकार को प्रदेश को सेना के हवाले करना पड़ा।

सूबे में अमन के माहौल में हमारी सेना ने कई बेहतरीन काम भी किए। विनाशकारी बाढ़ के दौरान उन्होंने अपनी जान पर खेलकर लोगों को बचाने का जो सफल अभियान चलाया, उसकी दुनिया भर में तारीफ़ हुई थी। लेकिन राजनीतिक संवाद और कूटनीतिक पहल की जगह कश्मीर में इतने लंबे अरसे तक सेना की तैनाती एक ग़लत क़दम था। इससे वहां धीरे-धीरे कई जटिलताएं पैदा हुई हैं। लोगों में सेना का डर भी ख़त्म हुआ और ईंट-पत्थर खा-खाकर विषम, तनावपूर्ण और शत्रुता भरे माहौल में काम करने वाले हमारे सैनिक भी तनाव के शिकार हुए। अब सेना से आप यह उम्मीद तो नहीं कर सकते कि वह पत्थर और ग्रेनेड की मार खाकर भी कश्मीरी युवाओं से सौहार्दपूर्ण वातावरण में शांतिवार्ता चलाए ! लोग पत्थर और गोली चलाएंगे तो सेना गोली ही चलाएगी। गोली चलेगी तो गोली आसपास मौज़ूद निर्दोष लोगों को भी लगेगी।

सेना पर ज्यादातर आरोप आतंकियों की शह पर लगाये जाते हैं ताकि सेना के खिलाफ लोगों के दिमाग में जहर भरकर उसे हटाने की ज़मीन तैयार की जा सके ! हमें कश्मीर के लोगों की भावनाओं के बारे में सोचते वक़्त उन विषम परिस्थितियों के बारे में भी सोचना चाहिए जिनमें चौबीस घंटे हमारे सैनिक काम करने को विवश हैं। पाक सीमा पर भी और सीमा के भीतर दुश्मन की तरह पेश आने वाले अपने देशवासियों के बीच भी।

अगर आपको कश्मीर के हालात से शिकायत है तो यह शिकायत आपको अपने सैनिकों से नहीं, उन राजनेताओं से होनी चाहिए जिन्होंने सेना को अरसे से उस काम में लगा रखा है जो उसका है ही नहीं।

– ध्रुव गुप्त पूर्व आईपीएस के फेसबुक वाल से