देशभर के विश्वविद्यालय शिक्षक कल मनाएंगे काला दिवस

अखिल भारतीय विश्वविद्यालय व महाविद्यालय शिक्षक संगठन (एआइफुक्टो) के आह्वान पर देशभर के आठ लाख विश्वविद्यालय और महाविद्यालय शिक्षक मंगलवार 22 अगस्त को अपनी मांगों के समर्थन में काला दिवस मनाएंगे। इसके साथ ही सभी राज्यों की राजधानियों में शिक्षक विशाल धरनों का आयोजन कर विरोध भी जताएंगे।  एआइफुक्टो के अध्यक्ष प्रो केशव भट्टाचार्या ने कहा है कि 22 अगस्त को काला दिवस और राज्यों की राजधानी में प्रस्तावित धरने का केंद्रीय विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (फेडकुटा) और अवकाश प्राप्त शिक्षकों के अखिल भारतीय संगठन ने भी समर्थन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन भेजकर एआइफुक्टो ने स्थिति की गंभीरता की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए मांग की है कि देशभर में एक साथ समान रूप से सातवें यूजीसी वेतनमान लागू करने के लिए शत-प्रतिशत केंद्रीय सहायता दी जानी चाहिए। एक महीने से केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने सातवें यूजीसी वेतनमान का मामला लंबित है।

एआइफुक्टो और फेडकुटा ने प्रो चौहान कमेटी की अनुशंसाओं को सार्वजनिक नहीं करने और शिक्षक संगठनों से छुपाकर जैसे-तैसे लागू करने की सरकार की मंशा को गैर जनतांत्रिक और देश के शिक्षकों के साथ धोखाधड़ी करार दिया है। अखबारों में टुकड़ों में छपी खबरों से पता चलता है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली राज्यों को तीन साल के लिए मात्र 50 फीसद केंद्रीय सहायता देने की जिद पर अड़े हुए हैं। अगर ऐसा हुआ तो स्पष्ट है कि किसी भी राज्य में शिक्षकों को यूजीसी वेतनमान मिलना मुश्किल होगा और फिर राज्यों में शिक्षकों को आंदोलन और संघर्ष का रास्ता अख्तियार करना पडेÞगा जिससे अध्ययन-अध्यापन का माहौल पूरी तरह चौपट हो जाएगा। यूजीसी वेतनमान लागू करने के लिए केंद्र हमेशा अतिरिक्त वित्तीय भार का 80 फीसद पांच साल के लिए देता रहा है।

एआइफुक्टो के फैसले के अनुसार सभी राज्यों के शिक्षक संगठनों ने ज्ञापन सौंपकर अपने-अपने मुख्यमंत्री से राज्यों की वित्तीय कटौती के विरुद्ध आवाज उठाने और कारगर हस्तक्षेप का अनुरोध किया है। एआइफुक्टो के आह्नान पर देशभर के हजारों शिक्षकों ने 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के दिन दिल्ली में गिरफ्तारी देने का फैसला भी किया है। अगर शिक्षक दिवस पर गिरफ्तारी तक मांगें पूरी नहीं होती हैं तो शिक्षक अखिल भारतीय हड़ताल जैसे अप्रिय निर्णय के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र पर होगी।
प्रो चौहान कमेटी की अनुशंसाओं को सार्वजनिक करना, 100 फीसद वित्तीय सहायता के साथ इसे पूरे देश में एक साथ समान रूप से लागू करना, तदर्थ और अस्थायी शिक्षकों का स्थायीकरण सहित शिक्षकों की कई तरह की मांगें हैं।