विदाई भाषण : गरीब और अमीर के आंसू में फर्क नहीं : CJI दीपक मिश्र

दिल्ली| मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा मंगलवार दो अक्तूबर को सेवानिवृत हो रहे हैं। अपने विदाई भाषण में उन्होंने कहा कि न्याय का मानवीय चेहरा होना चाहिए। एक गरीब आदमी के आंसू और अमीर के आंसू के बराबर हैं। उनका मूल्य बराबर है। ये आंसू मोती हैं, और मैं उन्हें इंसाफ के दामन में समेटना चाहता हूं। समता के साथ न्याय यानी तब सार्थक होगा जब देश के सुदूर इलाके के हर व्यक्ति को न्याय मिलेगा।
मुख्य न्यायाधीश कहा कि मैं भी युवा पीढ़ी का हिस्सा हूं। भारतीय न्यायपालिका दुनिया में सबसे अधिक सुदृढ़ संस्था है और युवा वकील हमारी संपदा हैं जिनमें न्यायशास्त्र को विकसित करने की क्षमता है। उन्होंने कहा, मैं लोगों को इतिहास के आधार पर नहीं पहचानता, मैं यह भी नहीं कह सकता कि अपनी जबान रोको, ताकि मैं बोल सकूं। मैं आपकी बात सुनूंगा और अपने तरीके से अपनी बात रखूंगा। मैं लोगों को उनके अतीत से नहीं उनकी गतिविधियों और सोच से पहचानता हूं।
न्यायालय परिसर में आयोजित विदाई समारोह को संबोधित करते हुए जस्टिस मिश्रा ने कहा, हमारी न्यायपालिका दुनिया में सबसे शक्तिशाली है जिसमें मुकदमों की चौंकाने वाली संख्या से निपटने की क्षमता है। उन्होंने कहा, इतिहास कभी दयालु और कभी निष्ठुर हो सकता है। मैं प्रत्येक स्तर पर बार का ऋणी हूं और यहां से संतुष्ट होकर जा रहा हूं। लेकिन मैं विदा नहीं कहूंगा, मैं कह रहा हूं, हम जरूर मिलेंगे।
मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूं–
मुख्य न्यायाधीश ने शीर्ष अदालत परिसर में कानूनी पत्रकारों से भी मुलाकात के दौरान ये पूछे जाने पर कि सेवानिवृत्त होने के बाद की क्या योजना है, प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ज्योतिषशास्त्र विज्ञान नहीं है, फिर भी लोग इसमें विश्वास करते हैं। मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूं।
जस्टिस मिश्रा विलक्षण जज : जस्टिस गोगोई
जस्टिस गोगोई ने कहा कि जस्टिस मिश्रा विलक्षण न्यायाधीश हैं। उन्होंने ऐसे फैसले दिए हैं जो उन्हें इतिहास में अमर बना देगा। उन्होंने कहा यदि हम अपने संवैधानिक नैतिकता को कायम रखने में विफल रहे तो हम लगातार एक दूसरे को मारते रहेंगे और उनसे नफरत करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि शीर्ष न्यायालय के सभी न्यायाधीश पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और हमेशा प्रतिबद्ध रहेंगे।
जस्टिस गोगोई ने कहा हम ऐसे समय में रह रहे हैं जब हमें क्या खाना और पहनना चाहिए भी हमारे निजी जीवन की छोटी बातें नहीं रह गईं हैं। शीर्ष अदालत के सभी न्यायाधीश प्रतिबद्ध हैं और वे सदैव प्रतिबद्ध रहेंगे। जस्टिस गोगाई तीन अक्तूबर को देश के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेंगे।