अमेरिका में कोरोना का तांडव, मरने वालों की संख्या 50 हजार के पार, दुनियाभर में 2 लाख मौत

नई दिल्ली, एजेंसी । कोरोना वायरस महामारी के कारण दुनिया भर में मरने वालों की संख्या 2 लाख के करीब पहुचने वाली है जिनमें से दो तिहाई सबसे बुरी तरह प्रभावित यूरोप से हैं। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी ने यह जानकारी दी है। यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर सिस्टम साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीएसएसई) द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चला है कि शुक्रवार शाम करीब 8:40 बजे (भारतीय समयानुसार) तक कुल 1,92,125 लोगों की बीमारी से मौत हो चुकी है, जबकि कोरोनो वायरस के संक्रमित मामलों की वैश्विक संख्या 27,36,979 हो गई है, जिनमें से 7,52,148 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं।

अमेरिका में सबसे ज्यादा मौत
आंकड़ों के मुताबिक दुनिया में अमेरिका अब कोरोना वायरस के संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित है जहां कोविड-19 से मृतकों की संख्या 50,031 हो गई है और कुल संक्रमितों की संख्या 8,70,468 है। इनमें से 80,937 लोग संक्रमण से मुक्त हो चुके हैं। इटली कोविड-19 से दूसरा सबसे अधिक प्रभावित देश है जहां 25,549 लोगों की मौत के साथ 1,89,973 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है, जबकि 54,576 लोग इस बीमारी से निजात पा चुके हैं।

इसी प्रकार स्पेन में 2,19,764 लोग संक्रमित हुए हैं जिनमें से 22,524 लोगों की मौत हुई। फ्रांस में कोरोना वायरस के संक्रमण से 21,889 लोगों ने जान गंवाई है एवं कुल 1,59,495 मामलों की पुष्टि हुई है। ब्रिटेन में 18,791 मौतों के साथ कुल 1,39,246 लोग संक्रमित हुए हैं। चीन में जहां पर दिसंबर में सबसे पहले संक्रमण की शुरुआत हुई, वहां 4,636 लोगों की कोविड-19 से मौत हुई है और 83,885 लोग संक्रमित हुए हैं।

दूसरी ओर, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा कि वर्तमान तक के सभी उपलब्ध साक्ष्यों से पता चलता है कि कोरोना वायरस प्राकृतिक है और इसमें किसी तरह की कोई हेराफेरी नहीं है और न ही यह निर्मित वायरस है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने ग्लोबल हेल्थ वॉच डॉग के हवाले से कहा, “कई शोधकर्ता सार्स-सीओवी-2 की जीनोमिक विशेषताओं को देखने में सक्षम रहे हैं और उन्होंने पाया है कि इस बात के कोई सबूत नहीं है कि यह एक प्रयोगशाला निर्मित वायरस है।”

डब्ल्यूएचओ ने जोर देकर कहा कि अगर यह एक निर्मित वायरस होता तो इसका जीनोमिक सीक्वेंस ज्ञात तत्वों का मिश्रण दिखाता लेकिन ऐसा नहीं हुआ। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि वायरसो की पहचान जनवरी की शुरुआत में हुई और 11-12 जनवरी को सार्वजनिक रूप से इसके जेनेटिक सीक्वेंस को साझा किया गया था।