भारत में नेतान्याहू का स्वागत इजरायल के अपराधों का खुला समर्थन, लखनऊ में 15 को वामपंथी दलों का प्रदर्शन

लखनऊ । भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश एवं भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( मार्क्सवादी ) के सचिव का. हीरालाल ने कहा है कि इजरायल के प्रधानमंत्री नेतान्याहू के भारत आगमन का उत्तर प्रदेश में पुरजोर विरोध किया जायेगा । उन्होंने दोनों पार्टियों की जिला कमेटियों का आह्वान किया कि वे दूसरे वामपंथी दलों, धर्मनिरपेक्ष और साम्राज्यवाद विरोधी ताकतों को साथ लेकर विरोध प्रदर्शन करें और महामहिम राष्ट्रपति को संवोधित ज्ञापन भेजें ।

लखनऊ से जारी किए बयान में दोनों नेताओं ने कहा कि हाल के दिनों में हमारी घोषित राष्ट्रीय नीति और परंपराओं में प्रतिगामी बदलाव हुये जिसके परिणामस्वरूप नेतान्याहू के  भारत आगमन पर लाल कारपेट्स बिछाये जारहे हैं. भारतीय समाज सदैव से फिलिस्तीनियों के साथ खड़ा रहा है और आज भी वह अमेरिका समर्थित इजरायल की दादागीरी के विरुध्द है.

आपत्तिजनक बात यह है कि 6 दिसंबर 2017 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जेरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता देदी. यह कदम अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और पश्चिमी तट और पूर्वी जेरुशलम पर इजरायल के कब्जे के खिलाफ सुरक्षा परिषद् में पारित विभिन्न प्रस्तावों के खिलाफ है. जेरुशलम अंतर्राष्ट्रीय संप्रभुता के अधीन है और इजरायल उसके किसी हिस्से पर दावा नहीं कर सकता. लेकिन इजरायल ने पूर्वी जेरुशलम पर 1967 से कब्ज़ा जमा रखा है.

अब ट्रंप द्वारा लिए गए इस अपराधिक फैसले के खिलाफ उसी दिन से सभी जगह विरोध प्रदर्शन होरहे हैं. विरोध प्रदर्शन करने वाले 10 फिलिस्तीनी मारे जाचुके हैं और 170  बच्चों सहित 600 लोग गिरफ्तार किये गए हैं । आज भारत इजरायली हथियारों का सबसे बड़ा खरीददार है. आज इजरायल के साथ किसी भी गठबंधन का मतलब अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन और फिलिस्तीनियों के अधिकारों का हनन है. हथियारों की खरीद अथवा अन्य व्यापारिक गतिविधियों से इजरायल के पास पहुँचने वाला हमारा धन फिलिस्तीनियों के दमन और उनकी भूमियों पर कब्जा करने की इजरायली कारगुजारी को मजबूत करता है.

भारत में नेतान्याहू का स्वागत इजरायल के अपराधों का खुला समर्थन है । उत्तर प्रदेश और देश भर के सभी प्रगतिशील लोगों को इसका विरोध करना चाहिये. फिलिस्तीनियों के उत्पीडन की हर कार्यवाही पर हमें प्रतिरोध जताना चाहिए. आज फिलिस्तीनियों के साथ खड़े होना धर्मनिरपेक्षता, समानता और न्याय के साथ खड़ा होना है. आज हम अपने समाज में भी इन उद्देश्यों के लिए संघर्षरत हैं. ये मूल्य भारत की फिलिस्तीनियों के प्रति लंबे समय से चली आरही एकजुटता के आधार स्तंभ हैं. आज नेतान्याहू के कूटनीतिक दौरे का प्रबल विरोध करके हमें फिर से अपनी परंपरागत  एकजुटता को पुनर्जीवित और पुनर्स्थापित करना होगा.

अतएव हम उत्तर प्रदेश के प्रबुध्द लोगों से अपील करते हैं कि वे नेतान्याहू के भारत दौरे के खिलाफ 15 जनवरी को विरोध प्रदर्शन करें. भाकपा और माकपा ने अपनी सभी इकाइयों से भी अपील की है कि वे जनता के व्यापक हिस्सों को विरोध प्रदर्शन में उतारें ।