दिल्ली: कैंपस में टैंक रखने से छात्रो में सेना के बलिदान की याद बनी रहेगी- VC जगदीश कुमार

दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के वाइस-चांसलर एम जगदीश कुमार ने रविवार (23 जुलाई) को केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख और केंद्रीय मंत्री वीके सिंह से अनुरोध  किया कि वो यूनिवर्सिटी में “खास जगहों” पर टैंक लगवाने में उनकी “मदद” करें ताकि छात्रों को “हरदम” सेना के बलिदान की याद बनी रही।

जेएनयू परिसर में कारगिल विजय दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए वीसी जगदीश कुमार ने बताया कि कैम्पस में टैंक रखवाना का ख्याल उन्हें पहली बार नौ फरवरी 2016 को कुछ छात्रों द्वारा “भारत विरोधी” नारे लगने के बाद आया था। इन छात्रों पर पुलिस ने राजद्रोह का मुकदमा दायर किया था। जेएनयू में कारगिल दिवस पर आयोजित ये अपनी तरह का पहला कार्यक्रम था। कार्यक्रम में प्रधान और सिंह के अलावा क्रिकेटर गौतम गंभीर, मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) जीडी बक्शी और लेखक राजीव मल्होत्रा मौजूद थे। कार्यक्रम में जेएनयू के मुख्य द्वारा से कन्वेंशन सेंटर तक 2200 फीट लम्बा तिरंगा के साथ तिरंगा यात्रा निकाली गई। वीसी कुमार ने कार्यक्रम में कहा, ” हमारे लिए देश की सुरक्षा के लिए सेना के जवानों के बलिदान को याद करने का ये महत्वपूर्ण दिन है….हम वीकी सिंह और प्रधान जी से अनुरोध करेंगे कि वो जेएनयू में खास जगहों पर टैंक रखवाने में हमारी मदद करें। सेना के टैंक की मौजूदगी से यूनिवर्सिटी से गुजरने वाले हजारों छात्रों को हरदम भारतीय सेना के त्याग और बहादुरी की याद रहेगी।” गौतम गंभीर ने कार्यक्रम में नौ फरवरी की घटना के बारे में बोलते हुए कहा कि तिरंगे के सम्मान से कोई समझौता नहीं हो सकता और सेना को कड़े फैसले लेने का हक है। गंभीर ने कहा कि सीमा पर तैनात जवान असली हीरो हैं, न कि क्रिकेट खिलाड़ी या बॉलीवुड हीरो। गंभीर ने कहा, “जेएनयू में होने के नाते मुझे वो वक्त याद आता है जब यहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर काफी बातें हो रही थीं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अच्छी चीज है लेकिन कुछ चीजें ऐसी हैं जिनसे समझौता नहीं किया जा सकता। तिरंगे का सम्मान ऐसी ही एक चीज है।” गंभीर ने आगे कहा, “एसी रूम और आरामदायक जगहों पर बैठे लोगों को सेना के बारे में कमेंट नहीं करना चाहिए। जो लोग दुष्कर परिस्थितियों में रहते हैं और अपनी जान जोखिम में डालते हैं उन्हें हर तरह के कड़े फैसले लेने का हक है…कुछ समय पहले लोगों ने कहा कि मेजर (लीतूल) गोगोई ने कश्मीर में जो किया वो बिल्कुल गलत था, लेकिन मैं हमेशा कहता हूं कि विषम परिस्थितियों में तैनात लोगों को अपने जवानों और अपने देश की सुरक्षा के लिए कोई भी कड़ा फैसला लेने का हक है।”