BSP ने नहीं उतारे प्रत्याशी, मायावती आखिर किसको देंगी समर्थन !

लखनऊ | उत्तर प्रदेश की दो लोकसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों के मैदान में आने के साथ ही वोटों का हिसाब किताब शुरू हो गया है। भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों ने बहुत कायदे से उम्मीदवार तय किया है। पर दोनों पार्टियों के लिए बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती का रुख बेहद अहम है। उन्होंने उपचुनाव नहीं लड़ने की परंपरा बनाए रखते हुए अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है। लेकिन उनका वोट बहुत महत्वपूर्ण है। दोनों लोकसभा क्षेत्रों में दलित मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है। माना जा रहा है कि दलित मतदाताओं का बड़ा समूह उनके इशारे का इंतजार करेगा। भाजपा के नेता इस भरोसे में हैं कि मायावती किसी हाल में अपना वोट सपा में नहीं जाने देंगी।

वैसे भी सपा और बसपा के बीच दशकों तक चली लड़ाई में दलित और यादव मतदाता स्वाभाविक रूप से एक दूसरे के विरोधी बने हैं। अगर मायावती नहीं लड़ती हैं तो दलित मतदाताओं की स्वाभाविक पसंद भारतीय जनता पार्टी है। ध्यान रहे भाजपा पिछले काफी समय से इस वोट में सेंध लगाने की राजनीति कर रही है। पर इसमें मायावती को यह खतरा दिख रहा है कि अगर एक बार उनका वोट भाजपा की ओर गया तो वहां से उसे वापस लाना मुश्किल होगा। समाजवादी पार्टी से वोट वापस लिया जा सकता है पर भाजपा से नहीं। इसलिए कहा जा रहा है कि वे दुविधा में हैं। बसपा के एक जानकार नेता के मुताबिक गोरखपुर में भाजपा के ब्राह्मण मतदाता को मदद की जा सकती है क्योंकि मायावती अगले चुनाव में दलित और ब्राह्मण का समीकरण बनाना चाहती हैं।

ज्यादा संभावना इस बात की है कि मायावती कोई संकेत न दें और मतदाताओं को अपने मन से वोट करने दें। कांग्रेस पार्टी ने भी दोनों सीटों पर उम्मीदवार दिए हैं। पार्टी के एक नेता का कहना है कि वे मायावती से संपर्क करेंगे और कांग्रेस की मदद करने की अपील करेंगे। हालांकि उनको इसमें सफलता मिलने की संभावना कम है। बसपा के नेता चाह रहे हैं कि दोनों सीटों पर भाजपा जीते। इससे आगे का राजनीतिक समीकरण बसपा के पक्ष में बनेगा।