डाॅ. कविता भट्ट को मिलेगा साहित्य अकादमी का अखिल भारतीय आचार्य रामचन्द्र शुक्ल (आलोचना) पुरस्कार, उत्तराखंड में खुशी की लहर

भोपाल । साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद्, मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग, भोपाल द्वारा अखिल भारतीय 13 (तेरह) एवं प्रादेशिक 15 (पन्द्रह) कृति पुरस्कार कैलेण्डर वर्ष 2019 के पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। अखिल भारतीय प्रति पुरस्कार रुपये 1,00,000/- (रुपये एक लाख) एवं प्रादेशिक प्रति पुरस्कार रुपये 51,000/- (रुपये इक्यावन हजार) के साथ शाॅल, श्रीफल, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति के साथ रचनाकारों को अलंकृत किया जाता है। उल्लेखनीय है डॉ. विकास दवे, निदेशक, साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश के नेतृत्व में अकादमी ने पिछले चार वर्षों से लंबित पड़े
इन पुरस्कारों की प्रक्रिया को सक्रियता और गतिशीलता के साथ संपन्न किया।

वर्ष 2019 के लिए अखिल भारतीय आचार्य रामचन्द्र शुक्ल (आलोचना) पुरस्कार लेखिका और साहित्यकार
डाॅ. कविता भट्ट, उत्तराखंड की कृति ‘भारतीय साहित्य में जीवन मूल्य’ को प्रदान किया गया है। डॉ. भट्ट ने इस पुरस्कार के लिए अपने चयन हेतु अकादमी के निदेशक, निर्णायक मंडल तथा अकादमी और संस्कृति मंत्रालय को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार मिलने से उनका दायित्व और भी अधिक बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि वे अब पूर्व से भी अधिक परिश्रम करके शैक्षणिक और साहित्यिक जगत को नई कृतियाँ समर्पित करती रहेंगी। इस महती उपलब्धि पर समस्त प्रदेश वासियों, साहित्य जगत और व्यापक स्तर पर उनके पाठकों प्रशंसकों में प्रसन्नता की लहर है। ज्ञात हो कि भारतीय दर्शन में योग दर्शन की विशेषज्ञ होने के साथ ही डॉ. कविता भट्ट एक गंभीर लेखिका, साहित्यकार, प्रखर वक्ता और कवयित्री हैं; जो शैलपुत्री के नाम से अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त हैं।

डॉ. कविता भट्ट ‘ शैलपुत्री ‘ की लेखनी से अब तक 24 पुस्तकें और सैकड़ों रचनाएँ सृजित हुई हैं। वर्ष 2020 में आपको विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद की सलाहकार सदस्य भी मनोनीत किया गया। नीलांबरा ई पत्रिका की संपादक, कैनेडा से प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका हिन्दी चेतना के परामर्श मंडल की सदस्या होने के साथ ही डॉ भट्ट उन्मेष की राष्ट्रीय महासचिव और हिंदी साहित्य भारती अंतरराष्ट्रीय की प्रदेश अध्यक्ष भी हैं।

पहाड़ी महिला का संघर्षपूर्ण जीवन जीते हुए भी
डॉ कविता भट्ट ने चार विषयों में स्नातकोत्तर, दर्शनशास्त्र और योग विषयों में यू जी सी नेट, पी एच डी और महिला सशक्तीकरण इत्यादि विषयों में डिप्लोमा किया। डॉ भट्ट उत्तराखंड की पहली और एकमात्र महिला हैं जिनको दर्शनशास्त्र विषय में गुणवत्तापरक शोधों हेतु भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा जे आर एफ, जी आर एफ तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली द्वारा पोस्ट डॉक्टरल फैलोशिप (महिला)
जैसी महत्त्वपूर्ण फैलोशिप अवार्ड की गईं।

भारतीय उच्चायोग, अनेक मंत्रालयों, साहित्य अकादमियों और शिक्षण संस्थानों इत्यादि में डॉ. कविता भट्ट निरंतर व्याख्यान हेतु आमंत्रित की जाती हैं। साथ ही मॉरीशस, यू ए ई, यूनाइटेड किंगडम और नेपाल इत्यादि के पटलों पर आमंत्रित व्याख्यान निरंतर प्रसारित हुए है। प्रसार भारती के अंतर्गत आकाशवाणी और दूरदर्शन केंद्रों पर वार्ताओं, रूपक और कविताओं का लंबा अनुभव रहा है।

बेटी और हिमालय पर केंद्रित आपके हाइकु काव्य को महाराष्ट्र की सुप्रतिष्ठित कथक नृत्यांगना उर्वी प्राजक्ता सुकी ने प्रसिद्ध संगीतकार हरि प्रसाद चौरसिया के संगीत के साथ मंचों पर कथक नृत्य में प्रस्तुत किया है। डॉ भट्ट को हे न ब गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल, उत्तराखंड में शोध और शिक्षण का सुदीर्घ अनुभव है।