बागपत में कब्रिस्तान की भूमि को लेकर विवाद, सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश

बागपत | कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में कब्रिस्तान की विवादित भूमि को लेकर दो समुदायों के बीच तनाव बन गया। एक पक्ष का आरोप है कि कूड़ा डालने गई युवती पर दूसरे समुदाय के युवकों ने छींटाकशी की है, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि मामला मारपीट का है, छेड़खानी का आरोप निराधार है। पुलिस पर एक पक्षीय कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने घेर लिया। आरोप है कि पुलिस पीड़ित पक्ष को हिरासत में लेकर कोतवाली ले गई। बाद में ग्रामीणों ने कोतवाली पहुंचकर हंगामा किया और हिरासत में लिए गए लोगों को छुड़ा लिया। प्रकरण में तहरीर नहीं दी गई है और दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने के लिए गांव के मौअज्जिज लोग प्रयास कर रहे हैं। बताया यह भी जा रहा है कि विचारधारा विशेष के लोगों ने मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की |

कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में कब्रिस्तान की भूमि को लेकर 44 साल से विवाद चल रहा है। बताया जाता है कि एक युवती शुक्रवार को विवादित भूमि पर कूड़ा डालने गई थी। आरोप है कि इसी दौरान वहां खड़े दूसरे समुदाय के युवकों ने युवती पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। उससे छेड़छाड़ कर धर्म परिवर्तन तक करने के लिए कहा। युवती ने घर पहुंचकर अपने भाई को जानकारी दी। इसे लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई। गांव के जिम्मेदार लोगों ने मामले को किसी तरह शांत कराया।

शनिवार सुबह युवती का भाई गांव में घूमने के लिए जा रहा था। इसी दौरान दूसरे समुदाय के युवकों ने उसके साथ मारपीट की, जिसे लेकर गांव में तनाव पैदा हो गया। सूचना पर भारी संख्या में पुलिस फोर्स गांव पहुंची और पीड़ित युवती व उसके तीन भाइयों को हिरासत में ले लिया। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस को घेर लिया। इस दौरान पुलिस से नोकझोंक भी हुई। पुलिस ने किसी तरह समझाकर लोगों को शांत कराया और हिरासत में लिए गए युवकों को कोतवाली ले गई। इसके बाद भाजपा की जिला मंत्री प्रियंका आर्या एवं युवा हिंदू वाहिनी के जिला उपाध्यक्ष प्रभात पहलवान के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण कोतवाली पहुंचे और हंगामा किया। पुलिस पर एक पक्षीय कार्रवाई का आरोप लगाया। इसके बाद पुलिस ने युवती के भाइयों को छोड़ दिया। कोतवाली में मौजूद सीओ दिलीप सिंह से दूसरे समुदाय के युवकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें शांत किया। गांव के जिम्मेदार लोग दोनों पक्षों में समझौता कराने में लगे हुए हैं।