अयोध्या में राममूर्ति निर्माण के लिए शिया वक़्फ़ बोर्ड ने की मदद की पेशकश

लखनऊ; (आईपीएन) अयोध्या में भगवान राम की भव्य मूर्ति बनवाने के योगी सरकार के निर्णय का शिया वक्फ बोर्ड ने स्वागत करते हुए सहयोग की पेशकश की है। बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार की तरफ से अयोध्या में श्रीराम की भव्य मूर्ति, जोकि एशिया मे सबसे बड़ी मूर्ति होगी, बनाये जाने का निर्णय सराहनीय है। इससे प्रदेश का गौरव पूरे विश्व में बढ़ेगा। ऐसे अच्छे काम के लिए शिया सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड प्रदेश सरकार का सहयोग करने को तैयार है।

रिजवी ने कहा कि अयोध्या में अवध के नवाबों की हुकूमत में वहां के स्थित मन्दिरों का सम्मान किया गया। नवाब शुजाउद्दौला ने हनुमान गढ़ी मन्दिर के लिए भूमि दी थी। इसके बाद नवाब आसिफुद्दौला ने मन्दिर निर्माण के लिए फण्ड भी दिया, जोकि अवध के इतिहास की किताबों में दर्ज है।
रिजवी ने बताया कि बाबरी मस्जिद राम जन्म भूमि विवाद की तरह का एक विवाद नवाब वाजिद अली शाह के समय में भी अयोध्या में जन्मा था। कुछ मुसलमानों ने नवाब वाजिद अली शाह से आकर कहा कि मन्दिर के पास एक मस्जिद थी जिसको हिन्दुओं ने तोड़ दिया है, जिसमें सौ लोग मार दिये गये हैं। नवाब ने तीन लोगों की एक कमेटी बना कर प्रकरण की जांच के लिए भेजा।

कमेटी ने मुसलमानों के आरोपों को गलत बताते हुए अपनी रिपोर्ट दी। उसके बाद भी अमीर अली नाम का एक कट्टरपंथी वहां पर मस्जिद बनाये जाने के लिए अड़ा रहा। जिस पर नवाब द्वारा मुजतहिद सय्यद मोहम्मद नसीराबादी और फ़िरंगी महल से फ़तवा लिया, जिसमें यह कहा गया कि विवादित स्थल पर मस्जिद बनाया जाना इस्लाम के सिद्धान्तों के विपरीत है। नवाब वाजिद अली शाह की फ़ौज ने विवाद उत्पन्न कर रहे मौलवी अमीर अली को रूदौली के निकट क़त्ल कर दिया जिसके बाद यह विवाद खत्म हुआ।

रिजवी ने बताया कि शिया वक्फ बोर्ड राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद प्रकरण में आपसी समझौते से प्रकरण का निस्तारण करने के लिए सक्रिय है। बोर्ड ने इस संबंध में सभी आवश्यक पक्षकारों से बात भी कर ली है। उच्चतम न्यायालय में बोर्ड अपनी बात रख चुका है। बोर्ड को यह उम्मीद है कि राम मन्दिर का निर्माण राम जन्म भूमि पर आपसी समझौते से वर्ष 2018 में शुरू हो जायेगा।