राहुल गांधी को हर राज्य, हर शहर में खड़े करने होंगे कांग्रेस के हार्दिक पटेल, पढ़िए अंकिता का यह आर्टिकल

अंकिता चौहान/नई दिल्ली-
11 दिसम्बर 2017 को देश के सबसे बड़े राजनीतिक दल को अपना 88 वां अध्यक्ष मिला। राहुल गांधी 88 अध्यक्षो में से छटे नंबर के गांधी होंगे जो कांग्रेस के अध्यक्ष बनेंगे। पिछले कई सालों से कांग्रेस से कुछ लोग जो कांग्रेस की हर समस्या की जड़ राहुल गांधी के अध्यक्ष ने बनने को मानते थे उनकी आत्मा अब संतुष्ट महसूस कर रही होगी। बनर्जी से लेकर गांधी तक कांग्रेस बदलती रही है कभी रूप में,कभी स्वभाव में ,कभी गुणों में ,कभी कांग्रेस ने भारतीय राजनीति की दशा और दिशा तय की तो कभी राजनीति ने कांग्रेस पार्टी की। परंतु 1999 के पश्चात जीतनी तेज़ी से भारतीय सामाजिक ,राजनीतिक,व आर्थिक परिस्तिथियों में बदलाव आया है उतनी तेज़ी से कांग्रेस पार्टी स्वयम को बदल न सकी और पीछे छूट गई।

1995 से 2004 तक का समय भारत में काफी राजनीतिक उठा पटक का व कांग्रेस एंव भाजपा के मध्य सीधे सीधे सत्ता प्राप्त करने की जद्दोजहद का रहा था ऐसे में सांगठनिक सुधार या बदलाव संगठन के लिए चिंता का विषय नही रहा। कुछ सालों बाद यह ज्ञात हो गया की सत्ता संघर्ष के साथ ही साथ भारत कुछ बदल रहा था ,जिनके परिणाम 2009 से दिखाई देने लगे थे। इंटरनेट की सभी तक पहुंच नई नई तकनिक का विकास ,स्मार्ट फ़ोन ,विचारों में गतिशीलता, समानता का संघर्ष ,बदलते सामाजिक परिवेश आज का भारत इन्ही सबके आगे का चरण दिखला रहा है । कांग्रेस पार्टी ने इन बदलावों को भांपने में अधिक देर न लगते हुए अपनी रणनीति ,सोच ,संगठन में बदलाव आरम्भ कर दिये। राहुल गांधी का अध्यक्ष बनना भी इसी बदलते भारत /संगठन का हिस्सा है। जिन परिस्तिथियों में राहुल को यह ताज सौंप गया है जल्द ही वह उनकी परीक्षा लेने वाली है ।

आने वाले व वर्तमान समय मे पार्टी के भीतर व बाहर की कुछ मुश्किलें उनके सामने दिखाई पड़ रही है जिनको पार करने के तरीके से ही भविष्य में कांग्रेस की स्थिति क्या होगी अंदाज़ लग सकता है। राहुल गांधी की पहली चुनौती संगठन के भीतर चार प्रकार के नेताओं में से अपनी टीम के लिए चुनाव करने की होगी और इन सभी मे साथ रहकर काम करने को बढ़ावा देने की होगी । कांग्रेस के इन चार प्रकार के नेताओं में पहले वे नेता है जो इंदिरा जी के समय संगठन से जुड़े थे ऐसे नेताओं की संख्या संगठन में इस वक़्त इकाई में ही बची है व निर्णय निर्माण में इनकी अधिक भूमिका नही है । दूसरे प्रकार के वह नेता है जो एमरजेंसी के समय व युथ कांग्रेस के माध्यम से संगठन में आये थे । इन नेताओं ने तब से अब तक सत्ता व सरकार में कई उच्च पद संभाले है और राजनीतिक रूप से छके हुए है हर प्रकार का राजनीतिक सुख इन नेताओं ने अपने जीवन काल में देख लिया है । तीसरे वह नेता है जो राजीव गांधी के समय संगठन से जुड़े थे यह वर्ग काफी पढ़ा लिखा व सम्पन्न परिवार से ताल्लुक रखने वाला था कपिल सिब्बल ,चिदंबरम, मनमोहन सिंह इनके उदाहरण है ।इसके बाद चौथे प्रकार के वो छाताधारी नेता है जो 2000 के बाद राजनीति में आय व बिना किसी राजनीतिक संघर्ष के राजनीति का आनंद उठा रहे है ।

हर प्रकार के नेताओ से सम्पन्न इस संगठन को आगे बढ़ने के लिए एक और वर्ग के आवश्यकता है जो संघर्ष की आग में तपा हो ,अधिकारों के लिए लड़ा हो ,जमीनी सच्चाई से परिचित हो व कार्यकर्ता की पीड़ा को समझता हो । ऐसे नेताओं के साथ से ही राहुल गांधी आगे की राह आसान बना पाएंगे । राहुल द्वारा अपने हार्दिक पटेल अपने कन्हैया कुमार हर राज्य हर शहर में खड़ा करके ही संगठन की ताकत बढाई जा सकती है । सांगठनिक चुनौतीयों के अलावा प्रधानमंत्री मोदी से जितना व विपक्षी एकता बनने और उसे कायम करने में भी मिस्टर गांधी को मुश्किल आ सकती है क्योंकि लालू यादव ,शरद पवार जितने सोनिया गांधी के करीब थे राहुल गांधी के नही हैं। भारत मे घाट रही हर घटना पर राहुल का बयान और उनकी परिपक्वता उनके अध्यक्ष चुने जाने के फैसले को सही या गलत का निर्णय देगी । राहुल गांधी को वैश्वीकरण के दौर में नवीनता के साथ चलते हुए संगठन के 132 साल पुराने आदर्शो को बनाये रखने की बड़ी चुनौती खड़ी है हालाँकि पहले किसी अध्यक्ष के समक्ष ऐसी चुनोती नही रही क्योंकि उसकी भरपाई लगातार हो रही पार्टी की जीत ने कर दी थी । भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्षो की लिस्ट में व्योमकेश चंद्र बनर्जी ,दादाभाई नौरोजी, बदरुद्दीन तैयबजी,मदन मोहन मालवीय, महात्मा गांधी, राजेंद्र प्रसाद, सरदार पटेल जैसे देश की आधारशिला रखने वाले लोग रहे है इन महान आत्माओ ने अर्थव्यवस्था का सिद्धांत, संविधान का निर्माण, स्वतंत्रता का आधार, वैचारिक धरातल , धर्मनिरपेक्षता जैसे राष्ट्र मूलक तत्वों इस देश को दिए हैं।

भारत इन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में इसलिए जानता है क्योंकि इन्होंने भारत को 200 साल पुराने अंधेरे से निकालकर भविष्य की तरफ राह दिखलाई । इतने महान लोगो के अध्यक्ष रहने के पश्चात राहुल गांधी के लिए स्वयं को इनके तनिक भी समानांतर आने के लिए बेहद मुश्किल से गुजरना होगा । गांधी इस वक़्त भारत को यदि एक अलग सोच ,दिशा व संगठन को स्थिरता दे पाये तो आने वाले समय मे उनका नाम एक सफल अध्यक्ष के तौर पर लिया जा सकता है। उनकी माता सोनिया गांधी ने 19 साल कांग्रेस के अध्यक्ष के तौर पर गुजारे है इसे देखते हुए अंदाज़ लगया जा सकता है कि अध्यक्ष के रुप में राहुल गांधी के पास समय की कोई कमी नही है ।

-लेखिका अंकिता चौहान बेबाकी से राजनैतिक एवं सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखती हैं ।