ये माला नहीं, देश की जिम्मेदारियां निभाने की विरासत का फंदा है…

करीब पच्चीस साल से देश चिल्ला रहा था। इल्तिजा की जा रही थी। आग्रह किया जा रहा था। करोड़ों लोगों की ख्वाहिश भी थी और मांग भी- प्रियंका गांधी अपने परिवार की वो विरासत संभाले जो विरासत देश को संवारने की जिम्मेदारियां संभालने के लिए पूरा जीवन समर्पित कर देती है। जनता का निवेदन था कि नेहरू, इंदिरा, राजीव की तरह देश को आगे बढ़ाने के लिए अपना जीवन समर्पित करें। सक्रिय राजनीति में आयें। पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी लें। देश की सत्ता की कमान संभाल कर भारत की तरक्की की रफ्तार को आगे बढ़ायें। वो लावारिस देश जिसपर कभी मुगलों ने राज किया तो कभी अंग्रेजों ने जिसे अपना गुलाम बनाया। वो लुटा पिटा मुल्क जिसे नेहरू.. इंदिरा और राजीव ने ताकतवर आत्मनिर्भर और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनाया। वो राष्ट्र जिसकी ताकत का सब लोहा लेने लगे। जिस देस के शिक्षितों.. डाक्टर.. इंजीनियर.. आई टी एक्सपर्ट.. कलाकार.. वैज्ञानिकों… को अपने देश में भी योगदान देने के लिए दुनिया के विकसित देश रेड कार्पेट बिछाने लगे। कंप्यूटर और आईटी टेक्नोलॉजी को भारत में फलने फूलने का सपना देखने वाले राजीव के इस देश में बीस साल पहले कंप्यूटर और स्मार्टफोन इतनी शिद्दत से आया कि आज गरीब बच्चे भी स्मार्ट फोन से खेल रहे हैं।

शायद इसलिए राजीव गांधी की शहादत के बाद देश ने सोनिया गांधी को कांग्रेस और देश की बागडोर संभावने की जिद पकड़ ली। सोनिया नहीं मानीं। देश जिद पकड़े था। तब कहीं जाकर कई सालों बाद सोनिया गांधी ने देश की जनता की जिद पूरी करने के लिए कांग्रेस में अध्यक्ष पद ग्रहण किया। भाजपा सरकार से पहले दस साल पहले कांग्रेस के हाथ में सत्ता की चाबी थी। करोड़ो लोग चाहते थे कि सोनिया या राहुल प्रधानमंत्री बनें। ये दोनों ने देश की ये जिद नहीं मानी। एक काबिल, अनुभवी और काबिल मनमोहन सिंह को ही प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी दी गयी।

ये सच है कि नेहरू.. इंदिरा और राजीव जैसा जज्बा गांधी परिवार की अगली पीढ़ी में नहीं हैं। कांग्रेस अध्यक्ष बनने के लिए देश का कहना मानने के लिए सोनिया ने दस साल लगा दिये। सोनिया और राहुल ने देश का कहना नहीं माना और ये दोनों कांग्रेस के पिछले कार्यकाल में प्रधानमंत्री नहीं बनें। काबिल मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री का दूसरा कार्यकाल भी दे दिया गया। देश के करोड़ों लोगों का कहना मानने के लिए प्रियंका ने भी पच्चीस साल लगा दिये।

– लेेेेखक नवेद शिकोह यूपी के वरिष्ठ पत्रकार है ।