UP में बन्दर मारने पर मुस्लिम युवक गिरफ्तार, वसीम अकरम ने लिखा- ‘तो क्या अब सांप और चूहे को मारने से भी धार्मिक भावनाऐ आहत होगी ?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली जनपद के गांव बीना माजरा में बंदरों के आतंक से परेशान हफीज ने बंदर को गोली मार दी, जिससे बंदर की मौत हो गई। जैसे ही जानकारी बजरंगदल के लोगो को मिली तो उन्होंने हफीज का घर धावा बोल दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह की अनहोनी को तो टाल दिया लेकिन गांव में तनाव बना हुआ है। हफीज समेत उनके दो और भाईयो के ऊपर धार्मिक भावनाएं भड़काने समेत कई धाराओ में मुकदमा दर्ज किया गया है। हफीज को गिरफ्तार कर उनके लाइसेंस भी जब्त कर लिए गए हैं। बजरंगदल के लोगो का कहना है कि बंदर हनुमान के अवतार है जिसे मारकर हफीज ने ‘हिन्दुओ’ की धार्मिक भावनाओ को आहत कर दिया है।

द प्रिंट की रिपोर्ट बताती है कि इस गांव में बंदरों का आतंक है, हफीज ने बंदरों से आत्मरक्षा में गोली चलाई थी। सांप को भगवान शिव कंठ मे धारण करते है, चूहा गणेश जी का वाहन है, तो कया अब सांप और चूहे को मारने से भी धार्मिक भावनाऐ आहत होगी ? दरअसल अब फ़साद करने का कुछ लोग मौक़ा तलाश किया जा रहा है ताकि देश मे साम्प्रदायिक दंगे हो सकें। जानवरों के काटने के मामलों में बंदर का काटना, कुत्ते के काटने के बाद दूसरे स्थान पर आता है। बंदर के काटने से चोट लगने के अलावा कई तरह की बीमारियां भी हो सकती हैं, जैसे – घाव में संक्रमण, हर्पीस बी, रेबीज

रेबीज एक ऐसी बीमारी है जो सीधा व्यक्ति के तंत्रिका तंत्र को नुक्सान पहुंचाती है, जिससे मौत भी हो जाती है। रेबीज के वायरस से संक्रमित जानवर के काटने का उसका थूक किसी घाव या कट के द्वारा व्यक्ति के शरीर में जाने से उस व्यक्ति को भी रेबीज हो सकता है। भारत में मौजूद कई बंदरों में हर्पीस बी वायरस पाया जाता है। मनुष्यों में इस वायरस से मृत्यु भी हो सकती है या आजीवन शारीरिक विकलांगता भी हो सकती है। सवाल है कि जब बंदर के काटने से किसी की धार्मिक भावना आहत नहीं होती तब बंदर को मारने से धार्मिक भावना कैसे आहत हो सकती है?

अक्सर यूपी के कई सरकारी अस्पतालो समेत कई दूसरे विभागो में बंदर के आतंक से बचने के लिए लंगूर को लाया गया उस समय किसी की भावना आहत नही हुई? हर चीज अब धार्मिक हो गई है मक्खी, मच्छर, ततैंया, सांप, बिच्छू, चूहां आदि सब ही तो धार्मिक है। लेकिन इंसान? डेंगू विरोधी या मच्छर मार अभियान से अगर किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हो जाएं तो आपको हैरानी नहीं होनी चाहिए। शामली की घटना बता रही है जिस तरह बंदर मारने से सांप्रदायिक तनाव हो गया है, हो सकता है चूहां मार ‘ज़हर’ या चूंहादान बेचने/ बनाने वालो को धार्मिक मजदूरों के जुनून का शिकार होना पडे।लेखक वसीम अकरम त्यागी, यूपी के वरिष्ठ पत्रकार हैं

-लेखक वसीम अकरम त्यागी, यूपी के वरिष्ठ पत्रकार हैं ।