रावण को मारने से पहले मोदी से टूटा धनुष, पढ़िए ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल

हे राष्ट्रऋषि, आज भारत भूमि एक बार फिर धन्य हुई ! त्रेता में प्रभु राम ने राजा जनक के दरबार में शिव जी का धनुष तोड़ा था। कलियुग में आपने लाल किले के मैदान में रामलीला कमिटी का धनुष तोड़ दिया। आपके भक्त तो आपको भगवान का कल्कि अवतार मानते ही थे, अब आपके शत्रुओं को भी कोई संदेह नहीं रह जाएगा। कहने दीजिए कुछ विपक्षियों को कि विजयादशमी का अवसर स्वयंवर में धनुष तोड़ने का नहीं, रणभूमि में तीर चलाकर रावण के पुतले जलाने का था। आप जैसे अवतारी पुरुष अपनी भुजा का बल दिखाने के लिए कहीं अवसर की प्रतीक्षा करते हैं ?

आपका पराक्रम देखकर अबतक तो शस्त्र-भंग के भय से शत्रु देश पाकिस्तान और चीन के मदांध शासक भी अपना-अपना परमाणु शस्त्रागार छुपाने में लग गए होंगे ।

-लेखक ध्रुव गुप्त पूर्व आईपीएस हैं