पढ़िए यूपी CM को आईना दिखाता नवेद का आर्टिकल- ‘एक योगी तो धार्मिक संस्कारों से चिर-परिचित होता है’ !

सनातन धर्म संस्कार प्रधान धर्म है। सदियों से चली आ रही हिन्दू समाज की परंपराओं के गहरे अर्थ हैं। साइंटिफिक रीजन हैं। साधू-महात्मा , पंडित, योगी, पंडा, महापातर…. इत्यादि सनातन धर्म के संस्कारों की परंपराओं की रक्षा करते हैं। जन्म से लेकर मृत्यु और जनेऊ से लेकर सनातन धर्म के विवाह संस्कार भारत की संस्कृति में घुल मिल गये हैं। इन परम्पराओं की प्राथमिक जानकारी तो गैर हिन्दुओं यहां तक की मुसलमानों को भी होती है।

मृत्यु को प्राप्त किसी व्यक्ति का पुत्र.. भाई.. इत्यादि जो अग्नि देता है। क्रिया कर्ता है अथवा जल देता है उसे कुछ महत्वपूर्ण आदेशों को निभाना पड़ता है। तेहरवीं तक घर से ना निकलना। सादा भोजन ग्रहण करना। विशेष वस्त्र धारण करना.. इत्यादि।
उत्तर प्रदेश में चर्चित हादसों में होने वाली कुछ मौतें बहुत ह्दयविदरक रहीं। चर्चा में रहीं और राष्ट्रीय खबर बनीं। इस तरह मारे जाने वाले बुलंदशहर घटना में भीड़ द्वारा मारे गये दरोगा सुधीर कुमार सिंह हों या लखनऊ में सिपाही की कथित गोली से मारे जाने वाले विवेक तिवारी हों, इनकी मौत पर समाज भी भावुक हो गया। ऐसी घटनाओं पर राजनीतिक दलों ने राजनीति भी की। मृतकों के परिजनों की मदद के लिए सरकार पर विपक्ष और समाज का दबाव भी रहा।

जब कभी भी कोई इस तरह की घटनाओं में कोई मारा जाता है तो आमतौर से मृतक के परिजनों से मिल कर उन्हें सांत्वना देने राजनेता जाते रहे हैं। विपक्ष के नेता हों या सत्ताधारी मंत्री या मुख्यमंत्री हों, हर कोई परिजनों से मिलकर दुख व्यक्त करता है। सरकारें आर्थिक सहयोग या मृत आश्रित को सरकारी नौकरी देने का आश्वासन दिया जाता हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने कथित सिपाही द्वारा मारे गये विवेक तिवारी के परिजनों की खूब मदद की। इसी तरह हाल में बुलंदशहर कांड में मारे गये दरोगा सुधीर कुमार सिंह के परिजनों की भी यूपी के मुख्यमंत्री ने दिल खोल कर सहायता का ऐलान किया। ये प्रशंसनीय भी है और सराहनीय भी। लेकिन मुख्यमंत्री ने ऐसे नेक काम को निभाने में कुछ ऐसी भूल कर दी है जिसपर सवाल उठ रहे हैं। बुलंदशहर कांड के शहीद दरोगा के परिजनों को लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास 5KD में समय देने के बजाय मुख्यमंत्री यदि शहीद के घर स्वयं चले जाते तो लगता कि सूबे के मुखिया सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं बल्कि सनातन धर्म के जानकारी योगी भी हैं। स्वर्गीय सुबोध कुमार के घर मुख्यमंत्री नहीं पंहुचे तो शहीद के परिवार के उन सदस्यों को भी सूबे के मुखिया के घर अपना दर्द बयां करने आना पड़ा जिन लोगों ने अग्नि दी थी।

सनातन धर्म से जुड़े हिन्दू समाज में कर्म कांड कराने वाले पंडित सर्वेश तिवारी बताते हैं कि मृतक के अंतिम संस्कार में क्रिया करने/अग्नि देने/जल देने.. वाला आमतौर से तेरहवीं तक घर से नहीं निकलता है। कुछ बंदिशें होती हैं। मसलन सादा भोजन करना.. विशेष वस्त्र धारण करना और घर से ना निकलना हिन्दुओं के धार्मिक संस्कारों का हिस्सा है। जिसे आम तौर से आम हिन्दू क्या गैर हिन्दू भाई भी जानते हैं। इसीलिए मृतक के सगे-संबंधियों /परिजनों को सांत्वना-ढांढस देने या दुख व्यक्त करने लोग उनके घर जाते हैं। कभी कोई मरने वाले की मौत पर अफसोस जाहिर करने के लिए मरने वाले के परिजनों को घर बुलाकर अफसोस जाहिर नहीं करता।

-लेखक नवेद शिकोह यूपी के वरिष्ठ पत्रकार हैं ।