मुसलमान वह है जिसके हाथ और ज़ुबान से दूसरे लोग महफ़ूज रहें !

सरकार की आमद मरहबा !
धर्म वह है, जहां कोई बाध्यता नहीं है। आप दूसरों का मार्गदर्शन नहीं कर सकते। ईश्वर चाहे तो उनका मार्गदर्शन अवश्य कर सकता है।’
‘दयालुता धार्मिकता की पहचान है। जिसमें दया नहीं, वह धार्मिक हरगिज़ नहीं हो सकता। जिसने एक मानव की हत्या की, उसने गोया पूरी मानवता की हत्या की। जिस किसी ने एक मनुष्य को बचा लिया, उसने मानवता को बचा लिया।’

मुसलमान वह है जिसके हाथ और ज़ुबान से दूसरे लोग महफ़ूज रहें। किसी कौम की दुश्मनी आपको इस बात पर आमादा न कर दे कि आप उनके साथ अन्याय करने लग जाओ ! हरएक के साथ इन्साफ करो चाहे वह दूसरे मज़हब का मानने वाला क्यों न हो ! अगर किसी मुसलमान ने किसी काफिर पर ज़ुल्म किया तो मै क़यामत के दिन उस मुसलमान के विरुद्ध काफिर का वकील बनकर खड़ा होऊंगा और उसे इन्साफ दिलाऊंगा !

सभी मित्रों को मानवता, प्रेम, अमन और भाईचारे के महान संदेशवाहक, इस्लाम के प्रवर्तक और उसके आखिरी नबी पैगंबर हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का जन्मदिन ईद-ए-मिलाद-उन-नबी मुबारक़, कुरआन और वेद के इस मूल मंत्र के साथ !
‘ला ईलाहा ईल्लला’ – अल्लाह सिर्फ एक है, दूसरा कोई नहीं ((कुरआन)
‘एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति’ – एक ब्रह्म ही है, दूसरा कुछ भी नहीं (वेद)

– लेखक ध्रुव गुप्त पूर्व आईपीएस हैं और देश के बड़े साहित्यकार हैं |