UP में सैंकड़ो पत्रकारों की हो रही कोरोना जांच, रिपोर्ट बयां करेगी वास्तविक हालात

देश में कोरोना वायरस का क्या असर है, ये सबसे बड़ी ख़बर पत्रकार अपनी कोरोना जांच करा के बतायेंगे। मुंबई के हष्टपुष्ट तीस प्रतिशत पत्रकारों की रिपोर्ट पॉजिटिव आयी थी, यदि ख़ुदानाख़ास्ता इतनी अधिक संख्या में अन्य कोरोना फाइटर पत्रकारो़ की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई तो ये खतरे की बड़ी घंटी होगी। ये शंका बढ़ जायेगी कि लोगों के बीच में घूम-घूम कर काम करने वाले कोरोना फाइटर्स पत्रकार ही कोरोना संक्रमित हैं तो अन्य कोरोना फाइटर्स पर भी खतरा मंडरा रहा होगा। पुलिस, सफाई कर्मचारी, आवश्यक सामग्री पंहुचाने वाले, डाक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की भी सामूहिक जांच हो और मुंबई पत्रकारों की जांच जैसे नतीजे आये तो कितनी भयावह स्थिति होगी !

मुंबई के पत्रकारों की कोरोना जांच रिपोर्ट से दहले मीडिया जगत की जांच का सिलसिला तेज़ हो गया है। आज उत्तर प्रदेश सरकार ने लोकभवन में लखनऊ के फील्ड रिपोर्टर्स की कोरोना जांच का सिलसिला शुरु कर दिया।सबसे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों/फोटो जर्नलिस्ट की जांच के बाद प्रिंट मीडिया के पत्रकारों और छायाकारों की जांच होगी। उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय से ही लगभग एक हजार मीडिया कर्मियों की प्रेस मान्यता है। यानी सरकारी दस्तावेजों के अनुसार ये राज्य मुख्यालय के सक्रिय पत्रकार हैं। इसलिए अंदाजा लगाया जा रहा है कि यदि सभी राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकारों की ही जांच हुई तो कोरोना जांच का सिलसिला लगभग चार दिन तक चल सकता है। और इसके नतीजे कोरोना वायरस के हालात की वास्तविक स्थिति बयां करेंगे।

मालूम हो कि कोरोना की ख़बरें देने वाले ही बीते सोमवार को तब ख़बर बन गये जब देश की अर्थिक नगरी मुंबई के 159 पत्रकारों ने कोराना टेस्ट कराया, जिसमें 53 पॉजिटिव निकले। यानी टेस्ट कराने वालों में तीस फीसदी पत्रकार इस भयावह बीमारी कोरोना वायरस से ग्रसित पाये गये। सबसे चिंताजनक बात ये है कि कोरोना संक्रमित इन पत्रकारों में 99℅ मीडियाकर्मियों में कोई भी लक्षण नहीं थे। ना जुकाम, ना बुखार और ना गले में दर्द जैसी तकलीफ। ये लोग हष्टपुष्ट, (तंदुरुस्त) फिट एंड फाइन थे, और कोरोना महामारी से जुड़ी फील्ड रिपोर्टिंग कर रहे थे। इनकी पॉजिटिव रिपोर्ट आने से हड़कंप मचा है। अब मुंबई के अन्य पत्रकारों की जांच का भी सिलसिला शुरु होगा। इस खबर के साथ ही उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सैकड़ों पत्रकारों का कोरोना टेस्ट शुरु किया गया है। संभावना है कि दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में भी पत्रकारों का कोरोना टेस्ट शुरु हो सकता है। यदि ख़ुदानाख़ास्ता उत्तर प्रदेश, दिल्ली और अन्य राज्यों मे भी पत्रकारों की टेस्ट रिपोर्ट मुंबई जैसी आ गयी तो ये बेहद भयावह होगा। माना जा सकता है कि देश कोरोना वायरस के बारूद पर बैठा है।

ज्ञात हो कि कोरोना काल की करीब एक महीने की अवधि में इस वाइरस का विस्तार रोकने के लिए सरकार ने अभी तक लॉकडाउन को सख्ती से लागू करने की क़ाबिले तारीफ कोशिश की। तत्काल अधिक से अधिक जांच किट मोहय्या करना संभव नहीं था इसलिए आधा प्रतिशत आबादी की भी जांच करना संभव नहीं था। अब सरकार अथक प्रयासों से जांच संसाधनों को बढ़ाने में सफल हो रही है। इसलिए अब संदिग्धों की जांच में इजाफा हो रहा है। जो कोरोना संक्रमित लोगों के संपर्क मे थे या किसी में लक्षण दिखाये दे रहे हैं तो ऐसे लोगों को कोरेनटाइन करना और फिर उनकी जांच की रफ्तार कुछ तेज हो रही है। इसी क्रम में लॉकडाउन से बाहर पब्लिक के बीच निकलने वाले कोरोना फाइटर पत्रकार बिरादरी ने भी बिना संदिग्ध लक्षण के भी जांच करवाना मुनासिब समझा। किंतु मुबंई में पत्रकारों की सामुहिक जांच के नतीजों ने दहला दिया और ये शंका पैदा कर दी कि फील्ड में निकलने वाले तंदुरुस्त से लगने वाले हजारों पत्रकार और अन्य पेशेवर कोरोना फाइटर भी सुरक्षित नहीं हैं। जांच कराने को लेकर पत्रकारों की सक्रियता और जांच के नतीजों को देखते हुए ही अन्य वर्ग के कोरोना सेनानियों की भी सामूहिक जांच की संभावना बन सकती है। पुलिस, पत्रकार, डाक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की सामूहिक जांच अब बेहद ज़रूरी भी हो गयी है।

-लेखक नवेद शिकोह, यूपी के वरिष्ठ पत्रकार हैं ।