भाजपा ने जनमत को जातिवाद, क्षेत्रवाद, भाषावाद से हटकर एक सूत्र में पिरोहने का कार्य किया

देश की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी का पुनः वापिसी होना और जोरदार बहुमत हाँसिल करना कोई आश्चर्यजनक नही है क्योंकि लबे समय से विपक्षी पार्टियों का प्रदर्शन सकारात्मक न होकर नकारात्मक ही रहा है। खास बात यह है किसी भी विपक्षी पार्टी का उद्देश्य जीत हाँसिल करना कम अपितु सत्तारूढ़ पार्टी को हराना रहा है। अब तक ज्यादातर पार्टिंयाँ कुछ जाति विशेष तक सीमित रही है और उन्होंने इस आधार पर सत्ता पा काबिज होने की कोशिश की है कि एक तरफ पार्टी की जाति का वोट तो दूसरी तरफ प्रत्यासी की जाति का वोट। ऐसी इंजिनीरिंग से अस्थाई लाभ लिया जा सकता है लेकिन दीर्घकालीन लाभ नही लिया जा सकता। वर्तमान चुनाव में क्षेत्रीय पार्टिंयाँ और राष्ट्रीय पार्टी के रूप में कांग्रेस पार्टी ने मिलकर एक पार्टी के खिलाफ बिगुल तो फूंका लेकिन वह जानता को यह समझने में विफल रही कि समूह का नेतृत्व करेगा कौन? तथा समूह की विचारधारा क्या है? जबकि बीजेपी ने अपने विचारधारा को राष्ट्रवाद से जोड़ा।

क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस ने भी अपने अपने शासनकाल में वही कार्य किये जो मोदी सरकार ने किए या यों कहें कि मोदी सरकार ने उन्ही योजनाओ को आगे बढ़ाया जो मनमोहन सरकार की थीं। अंतर सिर्फ इतना था कि पुरानी सरकारो ने योजनाएँ तो अच्छी बनाई किन्तु उस स्तर से लागू नही कर पाई जिस स्तर पर होने चाहिए थी हालांकि उन्हें शत प्रतिशत लागू न करने का कारण पिछली सरकारों का अल्पमत में होना भी एक कारण था तो दूसरी प्रधानमंत्री का एक परिवार पर भी निर्भर रहना था। मोदी सरकार 2014 में पूर्ण बहुमत से आई भी ओर पत्येक वर्ग के समर्थन से भी बनी इसीलिए ऐसी सरकार भी योजनाओं को मजबूती से लागू नही करेगी तो कौन करेगा। कांग्रेस में भी नेहरू, इंदिरा या रिजर्व गांधी के समय भी सरकार मज़बूत रही तो अनेको सफल योजनाएँ; चिकित्सा,विज्ञान, शिक्षा, रक्षा, सामाजिक जागरूकता, आर्थिक संपन्नता की योजनाएँ लागू की गईं। रक्षा के क्षेत्र में परमाणु एवं नए हथियार तथा सैनिक सुविधाओ को बढ़ावा दिया गया, शिक्षा के क्षेत्र में केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, मेडिकल कॉलिज, इंजीनियरींग कॉलिज, गरीबो के लिए इंदिरा आवास योजना, मनरेगा, वृद्धा अवस्था पेंसन योजना, किसानों को नए कागद बीज एवं आधुनिककृषि यंत्र तथा सस्ते ब्याज दर पर बैंक ऋण उपलब्ध कराए गए। हालांकि कोंग्रेस वर्षो सत्ता में रहने का एको और कारण था औऱ वह था ब्राह्मण, मुस्लिम तथा जाटव वोट जो उसके हाथों से पूरी तरह खिसक गया।

मायावती सरकार ने भी राज्य में अनेक कार्य किये जिनमे ताज एक्सप्रेस वे, 82 राजकीय माध्यमिक विद्यालय, 22 पॉलिटेक्निक, विद्यालय, 22 राजकीय डिग्री कॉलिज, आठ इंजिनीरिंग कॉलिज, लखनऊ, नोएडा कुशीनगर में बड़े बड़े पार्क, अम्बेडकर ग्रामविकास योजन के तहत अनेको गांव में सीसी रोड एवं विद्युतीकरण इत्यादि लेकिन इन विकास कार्यो और प्रशासन पर मज़बूत पकड़ के कारण आम जनता में मायावती की लोकप्रियता जिस तेजी से बड़ी उसी तेज़ी से एक समुदाय विशेष के अपनी शक्ति का दुरपयोग करने के कारण घटी, परिणामस्वरूप मायावती जनाधार जो जाटव के अतिरिक्त गिर गया और कह जनाधार कांग्रेश, सपा की विफलताओं के कारण बीजेपी से जुड़ गया।

कुछ योजनाएँ जिनके कारण आम जनता का रुझान बीजेपी की तरफ बढ़ा वह है जैसे किसानों के खाते में 6 -6 हज़ार रुपये भेजना, जरूरत बन्दों को आवास के नगद राशि, मुफ्त गैस सिलिंडर बांटना इत्यादि। नगरीय क्षेत्र विशेष रूप से व्यापारी वर्ग में gst और नोटबन्दी का असर पड़ा। नॉट बंदी में जनता भले ही परेशान रही हो लेकिन उसे इस बात की खुशी ज्यादा रही कि जो लोग नकदी घर मे दबाये बैठे है वह जरुर निकालनी चाहिए यही हाल gst का रहा। खैर कुछ भी सही भाजपा ने समस्त जनमत को जातिवाद, क्षेत्रवाद, भाषावाद से हटकर एक सूत्र में पिरोहने का कार्य किया है यदि सरकार ने किसी जाति त सम्प्रदाय के प्रति बदनीयती न रखकर कार्य किया तो वह वर्ग भी जुड़ जाएगा जो कटा हुआ है।

-लेखक लाल चंद वर्मा, जे0ए0एस0 इंटर कालेज में अध्यापन कराते हैं और ज्वलंत मुद्दों पर लिखते रहे हैं ।