क्या आंध्रप्रदेश में BJP के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी TDP ?

केंद्र और आंध्र प्रदेश में भाजपा की सहयोगी तेलुगू देशम पार्टी ने धमकी दी है कि वह सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकती है। यह धमकी इसलिए गंभीर मानी जानी चाहिए क्योंकि खुद पार्टी के सुप्रीमो और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने ऐसा कहा है। उन्होंने अपनी पार्टी के संसदीय दल की बैठक करके कहा था कि उनके सांसद सरकार का विरोध करेंगे तो उन्होंने उस पर अमल किया था। बजट सत्र के पहले चरण के आखिरी तीन, चार दिन टीडीपी सांसदों के विरोध की वजह से कार्यवाही नहीं चल पाई थी।

तभी जब नायडू ने कहा है कि अगर केंद्र ने विशेष राज्य के दर्जे या विशेष पैकेज पर विचार नहीं किया तो उनकी पार्टी के पास अविश्वास प्रस्ताव लाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। वैसे भी राज्य सरकार में टीडीपी को भाजपा की जरूरत नहीं है, उसका अपने दम पर बहुमत है। इसलिए तालमेल टूटने का उसकी सेहत पर असर नहीं होगा। इसी तरह लोकसभा में भी भाजपा को अपने दम पर बहुमत है इसलिए टीडीपी की धमकी का कोई असर नहीं होना चाहिए। पर कुछ दूसरी सहयोगी पार्टियों की नाराजगी और अपने सांसदों के बागी होने की वजह से भाजपा को चिंता करनी पड़ेगी। संभव है कि टीडीपी को मना लिया जाए और वह अविश्वास प्रस्ताव न पेश करे। लेकिन अगर उसने अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया तो यह तय है कि वह निचले सदन में पास नहीं हो पाएगा। इसका कारण यह है लोकसभा की मौजूदा संख्या के हिसाब से सरकार के पास अच्छा खासा बहुमत है। ऊपर से कई सहयोगी पार्टियां उसके साथ हैं और कई तटस्थ पार्टियां भी वोटिंग के समय उसकी मदद कर सकती हैं क्योंकि वे अभी चुनाव के लिए तैयार नहीं हैं। फिर अगर अविश्वास प्रस्ताव आया तो अगले सत्र में दिलचस्प राजनीति होगी।

भाजपा के पास इस समय अपने 274 सांसद हैं। इनमें से शत्रुघ्न सिन्हा, कीर्ति आजाद, भोला सिंह, वरुण गांधी जैसे चार सांसदों की नाराजगी समय समय पर जाहिर होती रही है। सहयोगी पार्टियों में से टीडीपी और शिवसेना सरकार का विरोध कर सकते हैं। बिहार की सहयोगी रालोसपा के बारे में भी भाजपा के नेता पक्के तौर पर आश्वस्त नहीं हैं। फिर भी भाजपा को 290 से ज्यादा सांसदों के साथ रहने का भरोसा है। उनको यह भी अंदाजा है कि पूरा विपक्ष एक साथ वोट नहीं करेगा। कुछ पार्टियां सदन से वाकआउट कर सकती हैं, जिससे बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा और कम हो जाएगा।