CAA और JNU हमले के विरोध में AMU में लगे आजादी के नारे, छात्रों ने बनाई मानव श्रृंखला, गाया ‘हम देखेंगे’

अलीगढ़ । अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में नागरिकता संशोधन कानून और जेएनयू में हुई घटना के विरोध में छात्र-छात्राओं ने बृहस्पतिवार को मानव शृंखला बनाकर विरोध जताया। बाद में बाब ए सैयद पर हुई एक सभा में गायक हैदर सैफुल्लाह पहुंचे और फैज अहमद फैज की नज्म ‘हम देखेंगे’ के साथ विरोध को एक नया अंदाज दिया। इस दौरान केंद्र सरकार विरोधी और हमें चाहिए आजादी जैसे नारे भी लगाए गए। बाद में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसीएम द्वितीय रंजीत सिंह को सौंपा गया।

प्रदर्शन करने वालों ने एबीवीपी मुर्दाबाद, हमें चाहिए अंबेडकर, भगत सिंह जैसी आजादी मांगने के नारे लगाते हुए मार्च निकाला। छात्र छात्राओं ने सीएए, एनआरसी वापस नहीं होने तक धरना और विरोध प्रदर्शन जारी रखने की चेतावनी देते हुए राष्ट्रपति के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।

सीएए, एनआरसी, एनपीआर और जेएनयू की घटना के विरोध में एएमयू में छात्र अलग-अलग तरह से विरोध कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को ऑर्ट्स फैकल्टी से एडमिनिस्ट्रिेटिव ब्लाक तक मानव शृंखला प्रस्तावित थी। इसके लिए बाब ए सैयद से लेकर एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लाक तक चिन्हांकन भी कर लिया था। लेकिन पुलिस प्रशासन और एएमयू के प्रशासनिक अधिकारियों के दखल के बाद मानव शृंखला बाब ए सैयद तक ही सीमित रही। मानव शृंखला के बाद बाब ए सैयद पर ही एक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें गायक हैदर सैफउल्लाह ने छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आजकल बहुत से लोगों को कई चीजों से डर लगता है। इसी तरह एक नज्म से भी आजकल डर लगने लगा है। इनको थोड़ा और डराया जाए और नज्म को पढ़ा जाए। इसके बाद उन्होंने नज्म को गाना शुरू किया।

छात्र छात्राओं पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग-
एएमयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सलमान इम्तियाज ने कहा कि जेएनयू छात्रों, शिक्षकों के ऊपर एबीवीपी के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए हमले और पुलिस द्वारा जामिया और अमुवि के छात्र को निशाना बनाने के विरोध में मानव शृंखला बना कर मार्च निकाला गया है। इसके माध्यम से संदेश दिया है कि सभी मानव एक साथ है। देश की फांसीवादी सरकार जब तक काले कानून को वापस नहीं लेती, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। इस काले कानून के अलावा एएमयू के पूर्व छात्रों पर गुंडा एक्ट और छात्राओं पर जानलेवा हमले में लिखे गए मुकदमे वापस लेने की मांग की ह्रै।