बाबा साहेब की मौत का रहस्य सुलझाने में लगे प्रतीक, मोदी सरकार बोली, ‘नहीं है कोई जानकारी’

              prateek

अलीगढ | आरटीआई एक्टविस्ट प्रतीक चौधरी एड्वोकेट ने एक बड़े ही गंभीर मसले पर आर टी आई का इस्तेमाल कर भारत सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। अलीगढ़ के चर्चित आर टी आई एक्टविस्ट प्रतीक चौधरी एड्वोकेट  ने दिनांक 29/05/2017 को जनसूचना अधिकारी ग्रह मंत्रालय, भारत सरकार से सूचना अधिकार के तहत तीन बिंदुओं पर सूचना माँगी थी कि डॉ अम्बेडकर की मृत्यु कब हुई, किन हालात में हुई, स्वाभाविक हुई या हत्या की गई। अगर हत्या की गई तो हत्यारोपी का नाम ,पद, और एफआईआर एवं पोस्टमॉर्टम की कॉपी भी मांगी गई व इस पर भारत सरकार ने क्या कार्यवाही इस पर की।

जबाब में  डॉ अम्बेडकर प्रतिष्ठान भारत सरकार की तरफ से  दिनांक 14/07/2017 को भेज गए पत्र में इस गंभीर मामले में  बड़ा ही हास्यपद उत्तर दिया गया है कि डॉ भीमराव अंबेडकर की मृत्यु के बारे में कोई जानकारी डॉ अम्बेडकर प्रतिष्ठान भारत सरकार  को नही है । इस उत्तर के विरुद्ध प्रतीक चौधरी एड्वोकेट ने अपीलीय अधिकारी ग्रह मंत्रालय , भारत सरकार को दिनांक 14/08/2017 को अपील भेजी है और अब वह केंद्रीय सूचना आयोग में अपील की तैयारी कर रहे हैं क्योंकि प्रतीक को यकीन है कि भारत सरकार इस बार भी सूचना नही देगी। प्रतीक चौधरी का कहना कि आज बाबा साहब की मृत्यु के बारे में तमाम तरह की अफवाहें समाज मे फैली हुई हैं जिनमे संसद भवन के अंदर भरतपुर के सांसद जाट राजा बच्चू सिंह के द्वारा डॉ अम्बेडकर की हत्या की बात कही जाती है जबकि डॉ अंबेडकर की मृत्यु स्वाभाविक थी और केवल राजनीतिक हितों की पूर्ति हेतु ये अफ़वाह फैलाई गई जिसके आधार पर आज जातिवाद की राजनीति हो रही है। भारत सरकार को  भारत के महापुरुषों के जीवन चक्र के बारे में आमजन को जनजागरण द्वारा अवगत कराया जाना चाहिए ।
भारतीय नागरिक होने के नाते ये मेरा अधिकार है कि मैं जान सकूँ की मेरे देश के संविधान निर्माता की मृत्यु किस तारीख को किस वजह से हुई।  सरकार को ये सारी चीजें स्वमं ही सार्वजनिक कर देनी चाहिए परन्तु सरकार तो कानूनी तरीक़े से पूछने पर भी नही बता रही है।
 दलित और पिछड़े वर्ग इस देश की बुनियाद हैं  ओर इस बुनियाद में जो दरार राजनीति ने डाली है मैं इस दरार को भर कर ओर दिलों को जोड़कर ही  दम लूंगा इसके लिए मुझे किसी भी न्यायालय या उच्चतम न्यायालय ही क्यों ना जाना पड़े।