इलाहाबाद : न्यायपालिका की स्वतंत्रता हमारे लोकतंत्र की आधारशिला – राष्ट्रपति कोविंद

शशांक मिश्रा/इलाहाबाद | लोकतंत्र को सुदृढ़ एवं मजबूत बनाने तथा उसके विकास में न्यायालय का महत्वपूर्ण योगदान है। भारत के आजाद होने के बाद जिस प्रकार लोगों को न्याय की आवश्यकता थी, उच्च न्यायालय ने उन आवश्यकताओं को पूरा करते हुए लोगों को न्याय देता आ रहा है। यहां की शानदार परंपरा के निर्माण बार और बेंच दोनों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है जिसके लिए बार और बेंच दोनों के प्रतिनिधि बधाई के पात्र है। उक्त बातें उच्च न्यायालय इलाहाबाद में न्याय ग्राम की आधारशिला रखने के आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द कह रहे थे। उन्होंने निर्मित हो रहे न्याय ग्राम को समयबद्धता के साथ एवं प्रवाही रूप से सम्पन्न होने की शुभकामना देते हुए यह आशा भी कि उच्च न्यायालय से जुड़े लोग इस न्यायालय के गौरव को निरन्तर बढ़ाते रहेंगे न्यायालय से जुड़े महामना मदनमोहन मालवीय, मोतीलाल नेहरू, सर तेज बहादूर सप्रू और राजर्षि पुरूषोतम के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने मेरठ एवं चौरी चोरा का जिक्र करते हुए न्यायालय की स्वतंत्रता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय मे ही सन् 1921 में भारत की प्रथम महिला वकील का पंजीकरण करने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया था।

महामहिम ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता हमारी लोकतंत्र की आधारशिला है, आज न्यायपालिका हमारी देश की सम्मानित संस्थाओ में से एक है। समय से सबको न्याय मिले और न्याय व्यवस्था कम खर्चीली हो और सामान्य आदमी की भाषा में समझने निर्णय लेने की व्यवस्था हो और खासकर महिलाओं और कमजोर वर्गो को न्याय मिले यह हम सबकी जिम्मेदारी है न्याय मिलने में देर होना भी एक तरह का अन्याय है। गरीबों के लिए न्याय प्रक्रिया में आने वाले न्याय का विलम्ब असहनीय होता है। हमें इसे दूर करने के उपाय करना चाहिए। पूरे देश में लगभग तीन करोड़ मामले लम्बित है इनमें से लगभग 40 लाख मामले उच्च न्यायालयो में, लगभग 6 लाख मामले दस साल से अधिक लम्बित है। जिसे शीघ्र निस्तारित करने की प्रक्रिया सभी उच्च न्यायालयों में शुरू कर दी गयी जो एक हर्ष का विषय है उच्च न्यायालय ने लगभग 60 लाख वादों को निचली अदालतो में शून्य के स्तर पर लाने का फैसला लिया है।

महामहिम राष्ट्रपति ने लम्बित वादों को एक समयसीमा में निस्तारित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने गरीब को न्याय मिलने पर जोर देते हुए कहा कि एक गरीब जो न्याय की आस लेकर न्यायालय आता है उसे न्यायिक प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी दी जाय। जिससे वह सिर्फ अपने वकील या अन्य लोगों पर आश्रित न रहे। उन्होंने कहा कि स्थानीय भाषा में बहस करने का चलन जोर पकड़े तो सामान्य नागरिक अपने मामले को बेहतर ढंग से समझ सकेगा। इसके साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि निर्णयों एवं आदेशो की प्रतिलिपि का स्थानीय भाषाओं में अनुवाद कराये जाने की व्यवस्था करनी चाहिए। कहा कि यह प्रक्रिया अन्य उच्च न्यायालयों में शुरू कर दी गयी है न्याय दिलाने की एक वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए। मध्यश्थता करते हुए लोगों को न्याय दिलाने का कार्य किया जाना सराहनीय है अभी हाल में ही उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने कागजरहित कोर्ट के रूप में ई कोर्ट का शुभारम्भ किया है। जो लोगों को शीघ्र न्याय दिलाने एवं न्याय प्रक्रिया को पेपरलेस बनाने में सहयोग प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि निचली अदालतों में लोगों को न्याय शीघ्र मिले इसके लिए न्यायाधीशों को समय-समय पर प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज का दिन देश विजय दिवस के रूप में मना रहा है। आज के ही दिन 1971 में हमारी सेना ने दुश्मनों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। इसलिए आज का उच्च न्यायालय का न्याय ग्राम आधारशिला शिलान्यास उन सेना के जवानो को समर्पित है।

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय के न्याय ग्राम की आधारशिला के लिए राज्य सरकार के द्वारा 35 एकड़ जमीन देने से न्याय प्रक्रिया में और तेजी आयेगी इसके साथ ही यहां पर न्यायाधीशों को प्रशिक्षित किया जायेगा इसके निर्माण को समयबद्ध रूप पूरा कराने के साथ निर्माण कार्यो की निरन्तर समीक्षा करते रहने की बात कही। न्याय ग्राम का निर्माण जितना शीघ्र होगा उतना ही न्याय व्यवस्था को और सरल एवं सुगम बनाते हुए लोगों को न्याय दिलाने का कार्य किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या इस समय 108 तक पहुंच गयी है शीघ्र ही मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में इसमे और बढोतरी की जायेगी इस कार्यक्रम में उपस्थित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न्याय ग्राम की आधारशिला के कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रयागराज अनेक कारणों से महत्वपूर्ण रहा है। मान्यता है कि भगवान राम वनवास जाते हुए एवं वनवास से लौटते हुए भी प्रयागराज की धरती पर आये थे और आज महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द एवं उत्तर प्रदेश के माननीय राज्यपाल राम नाईक के रूप में दो-दो राम इस पावन धरती पर एक साथ उपस्थित है। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद का अपना एक गौरवशाली इतिहास रहा है। हम लोग गंगा यमुना को तो साक्षात देखते ही है और अदृश्य सरस्वती को यहां के छात्रों, युवाओं और प्रतियोगी छात्रो के माध्यम से देखा जा सकता है। जो प्रयाग आया वह यहां सफल होकर ही गया। प्रयागराज में कुम्भ 2019 का आयोजन किया जाना है। उन्होंने इलाहाबाद के कुम्भ आयोजन को यूनेस्कों के द्वारा ऐतिहासिक धरोहर के रूप में शामिल किये जाने पर इसमें लगे अधिकारियों एवं कर्मचारियों को साधुवाद दिया। हाईकोर्ट के परिसर में न्याय ग्राम की आधारशिला के आयोजन में न्याय के देवता का दिन होने पर उन्हें भी याद करते हुए उन्हें भी नमन किया। राज्य सरकार न्याय प्रक्रिया में अपना हर संभव सहयोग प्रदान कर रही है। उच्च न्यायालय का अपना गौरवशाली एक परंपरा है उच्च न्यायालय इलाहाबाद देश का सबसे बड़ा उच्च न्यायालय है जिसने समय-समय पर ऐतिहासिक निर्णय देकर देश और समाज को एक ऩई दिशा प्रदान की है समस्याओं को शीग्र निस्तारित करने हेतु आईजीआरएस पोर्टल बनाया गया है जिसमे कोई भी अपनी समस्या सीधे भेज सकता है और उसकी समस्याओं का निस्तारण एक समयसीमा के अन्तर्गत करने हुए सम्बन्धित अधिकारियों को दिशा निर्देश दिये गये है। उन्होंने कहा कि 8 महीनों में लगभग 22 लाख 83 हजार 43 शिकायतो मे से 20 लाख 32 हजार 39 शिकायतों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है न्याय केवल सस्ता हो और इसके साथ त्वरित होना चाहिए।

उच्चतम न्यायलय के न्यायाधीश आर.के. अग्रवाल ने 35 एकड़ की जमीन आवंटन करने हेतु राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि न्याय ग्राम में आवास एवं प्रशिक्षण दोनों की सुविधा होगी इलाहाबाद उच्च न्यायालय सबसे पुराने न्यायालयो में से है और यह न्यायालय सबकी अपेक्षाओं मे खरा उतर रहा है समय के साथ नयी चुनौतिया एवं नये प्रकरणों का सामना करना पड़ता है जिसके लिए न्यायाधीशों को प्रशिक्षित किया जाना आवश्यक हो जाता है। उन्होंने कहा कि लम्बित वादे न्यायालयो के एक चुनौती होती है। सरकार भी न्यायालय के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपना योगदान कर रही है। उच्चतम न्यायलय के न्यायाधीश अशोक भूषण ने कहा कि न्यायालयो मे वादों के निस्तारण की भूमिका अच्छी है। न्यायिक प्रशिक्षण न्यायिक अधिकारियो के द्वारा कराये जाने से निर्णय लेने की क्षमता को और अधिक बढाया जा सकता है। सामाजिक परिवर्तन होने से नये प्रकरण एक चुनौतियों के रूप में सामने आते है। न्यायाधीशों को नयी तकनीकों से अपने आप को अपटेड रखे।

उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दिलीप बाबा साहब भोसले ने कहा कि झलवा में 35 एकड़ भूमि पर न्याय ग्राम की स्थापना की जा रही है जिसकी आज आधारशिला महामहिम राष्ट्रपति के द्वारा रखी गयी। उन्होंने कहा लम्बित वादों का निस्तारण किया जा रहा है। एक वर्ष के अन्दर तीन लाख सात हजार वादों को लोक अदालतो के माध्यम से निस्तारित किया गया है एवं मध्यश्थता के माध्यम से भी कई हजारों वादों को निस्तारित किया गया उच्च न्यायालय इलाहाबाद को नयी तकनीकों से लैंस करते हुए न्याय प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाने में जोर दिया जा रहा है। आधारशिला के कार्यक्रम का शुभारम्भ महामहिम राष्ट्रपति ने दीप प्रजज्वलित कर किया। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन उच्च न्यायालय के न्यायाधीश तरूण अग्रवाल ने किया। कार्यक्रम का आरम्भ एवं समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह, कैबिनेट मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।