इलाहाबाद : कुम्भ मेले में चयनित कम्पनी निष्पक्ष एवं ईमानदार ढंग से करे कार्य – कमिश्नर

शशांक मिश्रा/ इलाहाबाद | कुम्भ आयोजन के कार्यों का थर्ड पार्टी निरीक्षण कराये जाने के लिए अनुभवी एजेंसी के चयन के लिए विकास प्राधिकरण के सभागार में प्रतिभागी एजेंसियों को प्रस्तुतीकरण देने के लिए एक निर्धारित समिति तथा मण्डलायुक्त डॉ. आशीष कुमार गोयल के समक्ष आहूत किया गया। कुम्भ आयोजन के कार्यो के लिए थर्ड पार्टी निरीक्षण करने वाली एजेंसी का परीक्षण करने के लिए मण्डलायुक्त के साथ पहली बार नवागत मेलाधिकारी विजय किरन आनंद भी उपस्थित थे।

निविदा के उपरांत आने वाली तीन एजेंसियों में बीएलजी कान्सट्रक्शन, टीयूवीएसयूडी तथा मेन हार्ट कम्पनियों द्वारा दिये जाने वाले प्रस्तुतीकरण का परीक्षण करने के लिए मण्डलायुक्त और मेलाधिकारी के साथ उपाध्यक्ष विकास प्राधिकरण, नगर आयुक्त तथा लोक निर्माण विभाग, सेतु निगम, जल निगम, बिजली विभाग के सर्वोच्च अधिकारी एवं विशेषज्ञ मौजूद रहे। मण्डलायुक्त ने यह बात सभी कम्पनियों के सामने प्रमुखता से रखी कि चयनित होने वाली कम्पनी को अनिवार्य रूप से न्यूनतम 30 प्रतिशत स्टाफ एवं ऐसा अनुभवी टीम लीडर अपने निजी पे रोल पर रखना होगा, जो कम्पनी के उद्देश्य और कार्यशैली से अच्छी तरह वाकिफ हो तथा कार्य प्रारंभ करने में विलम्ब न कर सके। इसी तरह मण्डलायुक्त ने यह भी सुझाव दिया कि काम करने वाली टीम में यथासम्भव अनुभवी, दक्ष और युवा जनशक्ति रखी जाय तथा इस कार्य के लिए यथासम्भव ऐसे टीम लीडर और अधिकारी नियुक्त किये जाये जो ईमानदार प्रकृति के हों तथा क्षेत्रीयता के प्रभाव में न आकर निष्पक्ष ढंग से कार्य करें। मण्डलायुक्त ने यह जोर देकर कहा कि थर्ड पार्टी का निरीक्षण इसीलिए कराया जा रहा है कि कार्यों की गुणवत्ता, उनकी लागत और समय-सीमा पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित हो सके तथा हर परियोजना में उच्चस्तरीय परिणाम प्राप्त हो। इसके लिए आवश्यक है कि कार्यदायी टीम का नेतृत्व ऐसे हाथों में होना चाहिए कि जिस पर क्षेत्रीयता या अन्य किसी प्रकार का पक्षपात प्रभावी न हो और कम्पनी सभी कार्यों को निष्पक्ष और संतुलित निरीक्षण कर सके।

उन्होंने कम्पनियों को अपने स्तर से डाटाबेस साफ्टवेयर विकसित कर पीएमसी द्वारा दिये गये डाटाबेस एवं साफ्टवेयर को उससे मेच कराते हुए तुलात्मक डाटा हमेशा तैयार रखने की जिम्मेदारी से भी अवगत कराया तथा स्पष्ट शब्दों में यह कहा कि यदि किसी दशा में कम्पनी द्वारा चार्ज किया जाने वाला सेवा शुल्क अधिक और असंगत लगेगा तो उसकी सभी योग्यताओं पर यह नकारात्मक रूप से भारी पड़ेगा। अतः कम्पनी अपनी सेवा दिये जाने की लागत को सुसंगत और न्यूनतम स्तर पर ही रखे तथा गुणवत्ता में कोई समझौता नहीं होने दे। परीक्षण के दौरान सभी कम्पनियों के टर्नओवर, उनकी जनशक्ति तथा उनके अवस्थापना सम्बन्धी विषयों के विशेषज्ञों द्वारा गहराई से छानबीन की गयी तथा स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माणव विभाग, जल निगम, एडीए के अधिकारियों ने उनकी क्षमता, लैब, मैनपावर तथा विभिन्न तकनीकों के आधार पर कम्पनी के चयन पर अपना मत सुनिश्चित किया।