सपा, भाजपा और हिंदुवादियों की बयानबाजी ने बिगाड़ी अलीगढ की फिजा !

अलीगढ में रक्षाबंधन के दिन व्यस्तम रेलवे रोड पर हुए दिनदहाड़े दोहरे हत्याकांड के बाद शहर के माहौल को लगातार आग में झोंकने के प्रयास किये जा रहे हैं | नेताओं की जुबां बेलगाम हो चली है तो वहीँ प्रशासन चाहकर भी कार्यवाही नहीं कर पा रहा है | इतना जरुर है कि डीएम और एसएसपी अथक प्रयासों के बाद शहर के माहौल को बिगड़ने से बचाए हुए हैं | नेताओं द्वारा की जा रही बयानबाजी ने हत्याकांड को हिन्दू-मुस्लिम की लड़ाई पर लाकर खड़ा कर दिया है | सोशल मीडिया के माध्यम से सपाई, भाजपाई और हिंदूवादी जहर घोल रहे हैं |

आपको बताते चलें कि रक्षाबधंन के दिन रेलवे रोड पर दो सगे मुस्लिम भाइयों वसीम और आशु की गोली मारकर हत्या कर दी गई | हत्या मृतको के ही साथ शराब पीने वाले कचोडी विक्रेता सुरेश ने की थी | हत्याकाण्ड के कुछ घंटे बाद ही पुलिस ने सुरेश को गिरफ्तार कर लिया | लोगो को भी पुलिस प्रशासन ने समझा-बुझाकर शांत कर दिया | हत्याकांड के दिन ही शाम होते होते सोशल मीडिया पर कट्टरपंथियों ने ऐसा जहर उगला कि शहर की आवो-हवा में हत्याकांड ने हिन्दू-मुस्लिम का रंग ले लिया | दिनदहाड़े हत्या के आरोपी सुरेश का भाजपा के विधायक संजीव राजा ने खुलकर समर्थन किया और उसे हीरो की तरह पेश किया | मानववध जैसा जघन्य अपराध करने वाले सुरेश को भाजपा विधायक ने नायक की तरह पेश किया और घटना को प्रतिशोध बताया | भाजपा विधायक के इसी बयान के सोशल मीडिया पर वायरल होने से शहर में नई बहस छिड़ गयी | सपा के पूर्व विधायक ज़मीरउल्लाह खान ने भी मृतको के परिवार को 50 लाख रूपये देने की मांग रख दी और भाजपा विधायक की शह पर हत्याकांड होने का आरोप लगाया | सपा के नगर अध्यक्ष अज्जू इशाक ने भी सीधे भाजपा पर आरोप लगा दिया | वहीँ भाजपा के नेता मानव महाजन ने भी सोशल मीडिया पर मृतको को लेकर टिपण्णी की | आरएसएस और हिन्दुत्ववादी संगठनो से जुड़े लोगो ने भी मृतको के खिलाफ जमकर जहर उगला तथा हत्यारोपी को नायक की तरह पेश किया | फेसबुक और watsapp पर तमाम जहरीले सन्देश वायरल  किये गए |  तीन दिन तक फेसबुक पर चले संग्राम के बाद जुमे की नमाज के बाद मुस्लिमो के प्रदर्शन में आक्रोश फूट पड़ा | मुआवजे की मांग माने जाने के  बाद भी उपद्रवियों ने जमकर बवाल किया और पुलिस को ही निशाना बना लिया | पथराव की स्थिति से स्पष्ट था कि उपद्रवियों ने बड़े फसाद की तैयारी की हुई थी |

डीएम और एसएसपी की सूझ बूझ ने शहर को दंगे की आग में जलने से बचा लिया | पुलिस प्रशासन मामले को नहीं संभालता तो हालात कुछ और हो होते | उपद्रव के पीछे सुनियोजित साजिश की बू आ रही है, जिसको लेकर पुलिस भी जांच कर रही है | राजनैतिक स्वार्थो के लिए सपा और भाजपा के नेताओं ने जिस तरह से हिन्दू-मुस्लिम का ध्रुवीकरण किया उससे इंसानियत शर्मशार हो गयी है | शहर का प्रबुद्द वर्ग नेताओं की बदजुबानी और बेलगामी को शहर के हालातो का जिम्मेदार बता रहा है |

फिलहाल हालात सामान्य है और प्रशासन हर गतिवधि पर नजर बनाये हुए है | अब  सवाल यही है कि भड़काऊ और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण में लगे नेताओं की जुबां पर लगाम कैसे लगेगी ? क्या प्रशासन बेलगाम नेताओं पर भी कार्यवाही करेगा ?