अलीगढ में सपा को बड़ा झटका, ज़मीरुल्लाह बसपा में शामिल

अलीगढ | निकाय और लोकसभा चुनावों से ठीक पहले सपा को जिले में बड़ा झटका लगा है |  समाजवादी पार्टी में गुटबाजी और चापलूसी का शिकार हुए सपा के दिग्गज नेता और पूर्व विधायक हाजी ज़मीरुल्लाह खान ने बसपा का दामन थाम लिया है | उनके बसपा में जाने से सपा को जिले में बड़ा  झटका लगा है | ज़मीरुल्लाह के बसपा में जाने से अब जिले का सियासी समीकरण बदल गया है | पूर्व विधायक की मुस्लिम समाज में अच्छी पकड़ है और उन्हें जमीनी नेता के रूप में जाना जाता है | बसपा को उनके आने से निकाय और अन्य सभी चुनावों में बड़ा फायदा मिलेगा | सूत्र बता रहे हैं कि 20 अगस्त को ज़मीरुल्लाह ने मायावती के समक्ष बसपा ज्वाइन कर ली है | अब अलीगढ में 17 सितम्बर को बड़े कार्यक्रम में औपचारिक घोषणा होना बाकी है |

गत विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने ज़मीरुल्लाह की शिवपाल यादव से नजदीकी होने के चलते टिकट काट दी थी | अखिलेश के खिलाफ ज़मीरुल्लाह ने खुलकर आवाज़ उठाई और निर्दलीय चुनाव लड़ा | ज़मीरुल्लाह खुद तो नहीं जीत पाए लेकिन वोटर भ्रमित हुआ और सपा का सफाया हो गया | हालांकि ज़मीरुल्लाह ने सपा से बगावत कर  सपा के सामने चुनाव लड़ा लेकिन फिर भी  अखिलेश यादव उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए | अखिलेश जानते थे कि आमजन में जमीरुल्लाह का जनाधार है | अब बसपा में शामिल होने से मुस्लिम समाज के एकतरफा बसपा में जाने की अटकलें तेज हो गयी हैं | निकाय चुनाव में जमीर के बसपा में आने से समीकरण भी बदलेंगे |

पूर्व विधायक हाजी जमीरुल्लाह का कहना है कि समाजवादी पार्टी ने मुस्लिमो मके साथ छल किया है | अब वह बसपा के सिपाही बनकर काम करेंगे | वह कहते हैं कि बसपा सुप्रीमो ने उन्हें जनता की सेवा के लिए चुना है | जनता की सेवा और शोषितों, पीड़ितों की आवाज़ उठाना ही अब उनका ध्येय है |

जमीरुल्लाह के बसपा में जाने से समाजवादी पार्टी को बड़े वोटबैंक का नुकसान हुआ |  शायद ही कोई मुस्लिम नेता अब सपा में उसकी भरपाई कर पाए | जमीरउल्लाह समाजवादी पार्टी से शहर से 2007 एवं कोल से 2012 में विधायक निर्वाचित हुए | सत्ता में रहते हुए भी उन्होंने जनता के लिए भाजपा से खुलकर लड़ाई लड़ी |