दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति कोविंद ने #AMU का किया जमकर गुणगान, छात्रों से किया यह आव्हान-

अलीगढ़ | दीक्षांत समारोह में अमुवि में आये राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने यूनिवर्सिटी का जमकर गुणगान किया | पहले से ही राष्ट्रपति को अमुवि के छात्रों, यहाँ के प्रतिभाशाली छात्र रहे महापुरुषों के बारे में जानकारी थी | आजादी की लड़ाई से लेकर अमुवि की स्थापना तक का जिक्र राष्ट्रपति ने अपने भाषण में किया | अलीग बिरादरी राष्ट्रपति के भाषण को सुन गद गद दिखाई दी | अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के 65वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के विजीटर भारत के राष्ट्रपति महामहिम राम नाथ कोविंद ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है तथा अमुवि के छात्रों ने न केवल भारत बल्कि विश्व के अन्य देशों में भी विशेष रूप से एशिया तथा अफ्रीका में अपनी अलग पहचान बनाई है। महामहिम कोविन्द ने गत वर्ष अक्टूबर में इथोपिया के अपने भ्रमण की चर्चा करते हुए कहा कि इथोपिया के प्रधानमंत्री की धर्मपत्नी रोमान टेसफाय ऐबने ने उनसे अपना परिचय कराते हुए कहा कि उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की है।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के 65वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा कि आज के दौर में इस यूनिवर्सिटी के आप सभी विद्यार्थियों से ये उम्मीद की जाती है कि आप सब केवल देश ही नहीं बल्कि दुनियां के सबसे अच्छे विद्यार्थियों में अपनी जगह बनाएं। आज का दौर, गतिशीलता का दौर है। लोग तेजी के साथ, खुले दिमाग से, पूरी दुनियां से जुड़ते हुए एक ‘ग्लोबल नॉलेज सोसाइटी’ का हिस्सा बन रहे हैं। ऐसे गतिशील माहौल में यहां के शिक्षकों और विद्यार्थियों का दूसरी संस्थाओं में जाना, और दूसरी संस्थाओं के लोगो का यहां आना ‘क्रॉस पोलिनेशन ऑफ लर्निंग’ में मददगार होगा। आज की तालीम में नित नई टेक्नालजी सामने आ रही है, तथा आर्टिफिशल इंटेलिजेंस और जीनोमिक्स जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है। मुझे पूरा विश्वास है कि ज्ञान-विज्ञान की इस तेज रफ्तार में पूरे जोश के साथ शिरकत करते हुए यह यूनिवर्सिटी आगे बढ़ती रहेगी। राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि सभी विद्यार्थी इस यूनिवर्सिटी की रिवायात और तरक्की-पसंदी की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, देश के विकास में अपना समुचित योगदान देंगे। ‘‘मैं आप सब को फिर से मुबारकबाद देता हूं और पदक विजेताओं को शाबाशी देता हूं। मेरी यह शुभ-कामना है कि आप सभी, प्रगति करते हुए अपना, अपनी यूनिवर्सिटी और अपने देश का नाम रौशन करें।’’ महामहिम ने कहा कि आधुनिक भारत के साथ-साथ दक्षिण-एशिया और दुनियां के अन्य क्षेत्रों में अपने विद्यार्थियों के योगदान के लिए मशहूर इस अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में आकर मुझे बहुत खुशी हो रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि यह यूनिवर्सिटी देश के विकास में अपनी खास भूमिका निभाती रही है और सन 2020 में अपने सौ साल पूरे करने जा रही है। इस यूनिवर्सिटी की एक प्रभावशाली परंपरा रही है। बीसवीं सदी के शुरुआती दौर में हमारी आजादी की लड़ाई जोरों पर थी। साथ ही, हमारे देश में समाज और संस्कृति के सभी पहलुओं में आधुनिकता को बढ़ावा देने और निरर्थक परम्पराओं से मुक्त होने का अभियान भी पूरे जोश पर था। उस दौर में, इंसान की बेहतरी और तरक्की के लिए तालीम की बुनियादी अहमियत पर जोर देने वाले महापुरुषों ने भारतीय मूल्यों पर आधारित आधुनिक शिक्षा के प्रसार के लिए अनेक शिक्षण संस्थानों की स्थापना की। उसी दौर में बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, जामिया मिलिया इस्लामिया, बंगाल टेक्निकल इंस्टीट्यूट दृ जिसने बाद में जादवपुर यूनिवर्सिटी का रूप लिया, और दिल्ली यूनिवर्सिटी जैसे शिक्षण-संस्थानों की स्थापना हुई। आधुनिक नजरिए के साथ ज्ञान-विज्ञान की नई संभावनाओं की तलाश करने वाली पीढ़ियों का निर्माण करना इन संस्थानों का उद्देश्य था। साथ ही, इनकी स्थापना ऐसी पीढ़ियों को तैयार करने के लिए की गयी थी जो अपने देश की साझा संस्कृति तथा नैतिक और आध्यात्मिक परम्पराओं पर गर्व का अनुभव करें। यह गौर-तलब है कि फंड के लिए आर्थिक सहायता देने वालों में बनारस के महाराजा भी शामिल थे। ऐसे महत्वपूर्ण संस्थानों को किसी समुदाय से जोड़कर देखने की आवश्यकता नहीं है।

राष्ट्रपति कोविन्द ने कहा कि आपकी यूनिवर्सिटी की पूरी दुनिया में इतनी शोहरत रही है कि महान वैज्ञानिक आइन्स्टाइन ने अपने शिष्य डॉक्टर रूडोल्फ सैम्यूएल की प्रशंसा करते हुए उन्हे यहां बतौर अध्यापक नियुक्त करने के लिए सुझाव दिया था और आइन्स्टाइन के सुझाव पर वे फिजिक्स डिपार्टमेंट में नियुक्त किए गए थे। उसी दौर में यूरोप के वैज्ञानिक डॉक्टर आर. एफ. हंटर ने भी केमिस्ट्री डिपार्टमेन्ट में यहां के छात्रों को पढ़ाया था। उनहोंने कहा कि हमारी आजादी की लड़ाई में मौलाना हसरत मोहानी और राजा महेंद्र प्रताप की हिम्मत और जज्बे को बड़े ही सम्मान के साथ याद किया जाता है। भारत-रत्न से अलंकृत खान अब्दुल गफ्फार खान भी इसी विश्वविद्यालय के छात्र रह चुके थे। इसी यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी रह चुके डॉक्टर युसुफ मोहम्मद दादू दक्षिण-अफ्रीका की आजादी की लड़ाई और रंग-भेद के खिलाफ आंदोलन में पहली कतार के सेनानियों में थे। उनके पूर्ववर्ती राष्ट्रपति डाक्टर जाकिर हुसैन ने यहां शिक्षा प्राप्त की, स्वतन्त्रता संग्राम में हिस्सा लिया और यहां वाइस चान्सलर भी रहे। मेरे लिए यह एक सुखद संयोग था कि मुझे बिहार का राज्यपाल बनने का अवसर मिलाय जिस पद को जाकिर हुसैन साहब ने सुशोभित किया था। जैसा कि सभी जानते हैं कि वे देश के तीसरे राष्ट्रपति बने। इस तरह, वे बिहार-राजभवन और राष्ट्रपति-भवन में भी मेरे पूर्ववर्ती रहे हैं। राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, लॉ, साइंस और टेक्नोलोजी, साहित्य और कला तथा स्पोर्ट्स के क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाने वाले इस यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों की एक बहुत ही लंबी सूची है। ऐसे विद्यार्थियों ने इस यूनिवर्सिटी के संस्थापकों की उम्मीदों को अंजाम दिया है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक टेक्नोलोजी में सफलता को समाज-कल्याण के लिए उपयोग में लाने के अनेक प्रेरक उदाहरण हैं। भारत-रत्न से अलंकृत, मेरे पूर्ववर्ती राष्ट्रपति डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम,पब्लिक-हेल्थ की बेहतरी में योगदान देने वाले यूसुफ के. हमीद और इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी के अलावा शिक्षा और समाज-कल्याण के क्षेत्रों में भी बहुत बड़ा काम करने वाले अजीम प्रेमजी जैसे उदारवादी लोग उनमें शामिल हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन हर भारतवासी को प्रेरणा देता है। मुझे बहुत खुशी होती है कि आज के नौजवान, डॉक्टर कलाम को एक आदर्श के रूप में देखते हैं। उनमे शिक्षा के लिए जो ललक थी और कुछ कर गुजरने की जो लगन थी उसके बल पर उन्होने अपने वैज्ञानिक बनने के सपने को पूरा किया। जैसा कि सभी जानते हैं, उन्होने बतौर ‘मिसाइल-मैन’ बहुत शोहरत हासिल की। वे पूरी जिंदगी अपने देश में ही रहकर समाज और देश को बेहतर बनाने की तपस्या करते रहे। ऐसे महापुरुषों की जिंदगी से, सभी युवाओं को समाज और देश की भलाई के कामों में लग जाने की प्रेरणा मिलती है।

अमुवि रजिस्ट्रार प्रो. जावेद अख्तर तथा कंट्रोलर श्री मुजीबउल्लाह जुबैरी ने कार्यक्रम का संचालन किया। मंच पर राष्ट्रपति कोविन्द के साथ उत्तर प्रदेश राज्यपाल राम नाइक, प्रो. चांसलर नवाब इब्ने सईद खाॅ आॅफ छतारी, ट्रेजरार प्रो. हबीबुर रहमान, कुलपत प्रो. तारिक मंसूर, रजिस्ट्रार प्रो. जावेद अख्तर तथा कंट्रोलर मुजीबउल्लाह जुबैरी आसीन थे। दीक्षांत समारोह के समापन उपरान्त सर सैयद हाउस के प्रांगण में डिग्री एवं मैडल प्राप्त करने वाले छात्र व छात्राओं के लिये कुलपति की ओर से ऐटहोम का आयोजन किया गया।