‘किसानन की अब बात सुनेगौ चरण सिंह को नाती’, आगरा के सर्द मौसम में RLD के किसान आन्दोलन की गर्माहट, देखें

आगरा | राष्ट्रीय लोकदल द्वारा आगरा के खंदोली में बुलाई गयी आलू किसान पंचायत सुपरहिट रही | आगरा, हाथरस, मथुरा, अलीगढ के हजारों किसानो ने पंचायत में पहुंचकर आलू किसानो सहित अन्य किसानो के मुद्दे पर रालोद युवराज जयंत चौधरी से संघर्ष करने और आवाज़ बुलंद करने का आव्हान किया | जयंत चौधरी भी भीड़ को देखकर गद गद नजर आये | किसानो ने भी जयंत चौधरी में किसान मसीहा चौ चरण सिंह का अक्स देखा और खुलकर कहा भी | कई बुजुर्ग किसानो ने जयंत को चरण सिंह के तेवर वाला बताते हुए किसान राजनीति के पुराने दिन वापिस लौट आने की बात कही | एक कलाकार ने तो ‘ कोई न और किसानो का नेता, अब बात कोई न भाती, किसानन की अब बात सुनेगौ चरण सिंह को नाती’| हजारों किसानो के समूह ने प्रस्तुति को स्वीकारा | गुरूवार को सर्द मौसम में भी आगरा में किसानो की गर्माहट ने यूपी में योगी सरकार के खिलाफ किसान आन्दोलन का शंखनाद कर दिया है |

आलू किसान पंचायत में यह प्रस्ताव हुए पारित-

प्रदेश का आलू काश्तकार आज विषम परिस्थितियों मे फंस गया है। विगत तीन वर्षों से लागत मूल्य भी ना मिल पाने के कारण किसान की आर्थिक स्थिति बेहद शोचनीय हो चुकी है। वर्तमान मे विगत वर्ष की फ़सल के आलू को खपत ना होने के कारण शीतगृहों से निकालकर सड़कों पर फेंका जा रहा है।दो माह बाद फरवरी मे आने वाली फसल का भविष्य भी खराब होने की आशंका से किसान भयभीत है।
आलू किसान को जीवनदान देने के लिए ये पंचायत प्रदेश सरकार को निम्नलिखित सर्वसम्मत प्रस्ताव प्रेषित करती हैं।
1-माह जनवरी 2018 के अन्त तक आलू के लाभप्रद समर्थन मूल्य की घोषणा कर फरवरी के दूसरेे सप्ताह से आलू की सरकारी खरीद की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
2-शीतगृह भण्डारण दर ,वर्ष 1998 से पहले की व्यवस्थानुसार सरकार द्वारा गठित विषय विशेषज्ञों-किसान-शीतगृहस्वामी की कमेटी द्वारा तय की जाए और इस दर की घोषणा हर सूरत फरवरी माह के प्रथम सप्ताह मे कर दी जाए।
3- आलू उत्पादन मे प्रदेश के अग्रणी जनपदो आगरा, मथुरा, हाथरस, अलीगढ, फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, कन्नौज, हापुड़,मेरठ आदि मे आलू प्रसस्करण उधोग स्थापित किए जॉए।
4- आलू को अन्य प्रदेशों मे भेजने पर दी जाने वाली ट्रान्सपोर्ट सब्सिडी सीधे किसानों के बैंक खाते मे भेजी जाए ताकि अधिकारी-व्यापारी गठजोड़ की लूट रुक सके।
5- ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं पर बढ़ाई गई विधुत दर अविलंब वापिस ली जाए।
6- नहर का पानी रोस्टर के अनुसार आपूर्ति ना होने पर किसान को होने वाली आर्थिक क्षति की भरपाई सरकार करे।
7- आवारा पशुओं से हुए किसान के नुक़सान की भरपाई सरकार करे।
उपरोक्त प्रस्ताव पर कार्रवाई ना होने की स्थिति मे उत्तर प्रदेश सरकार व केन्द्र सरकार गंभीर किसान आंदोलन का सामना करने के लिए तैयार रहे।

पश्चिमी यूपी के प्रदेश अध्यक्ष रालोद डॉ अनिल चौधरी भी पंचायत की सफलता से प्रसन्न नजर आये और बोले, ‘यह शुरुआत है | रालोद किसान और नौजवान विरोधी इस सरकार को उखाड़ फेंकेगा | उन्होंने कहा कि किसानो के हक़ की बात कोई दल नहीं कर रहा, अब जयंत जी ने शंखनाद किया है , किसानो की राजनीति के अब पुँराने दिन लौटेंगे |