भारतीय मूल के अभिजीत बनर्जी को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार, सोशल मीडिया पर छाए

नई दिल्ली | अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार की घोषणा कर दी गई है। भारतीय मूल के अभिजीत बनर्जी, उनकी पत्नी एस्थर डफ्लो और माइकल क्रेमर को ‘वैश्विक गरीबी खत्म करने के प्रयोग’ के उनके शोध के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित करने का एलान किया गया है | अर्थशास्त्र के क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित भारतीय मूल के अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था डांवाडोल है। नोबेल जीतने के बाद बनर्जी ने भारत को लेकर यह पहली प्रतिक्रिया दी है। बनर्जी ने कहा कि मौजूद समय में उपलब्ध आंकड़े यह भरोसा नहीं जगाते हैं कि देश की आर्थिक स्थिति में जल्द कोई सुधार होगा। उन्होंने कहा, “भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति अस्थिर है। मौजूदा (विकास) के आंकड़ों को देखने के बाद, इसके बारे में निश्चित नहीं हूं (निकट भविष्य में अर्थव्यवस्था का पुनरुद्धार)। अभिजीत सोशल मीडिया पर छ गए हैं | लोग उन्हें बधाइयाँ दे रहे हैं |

अमेरिका में मौजूद अभिजीत ने एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा, “पिछले 5-6 साल में हमने कुछ विकास देखा था, लेकिन अब यह भरोसा भी जा चुका है।” भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी और उनकी पत्नी एस्थर डफ्लो को साल 2019 के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा। उनके साथ ही अर्थशास्त्री माइकल क्रेमर को भी इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया है। तीनों को संयुक्त रूप से यह सम्मान दिया जाएगा। नोबेल पुरस्कार समिति ने कहा कि तीनों अर्थशास्त्रियों को ‘अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गरीबी कम करने के उनके प्रयोगात्मक नजरिए’ के लिए पुरस्कार दिया जा रहा है।

58 वर्षीय बनर्जी ने प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार मिलने पर अपनी खुशी का इजहार करते हुए कहा कि उन्होंने सोचा नहीं था कि करियर में इतनी जल्दी उन्हें यह सम्मान मिल जाएगा। अमेरिका में मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी में इकनॉमिक्स पढ़ाने वाले अभिजीत बनर्जी ने कहा, “मैं पिछले 20 सालों से यह रिसर्च कर रहा हूं। हमने गरीबी कम करने के लिए समाधान देने की कोशिश की है।”