#ATTANDANCE: 7,000 छात्रों के माता-पिता को चेतावनी पत्र भेजेगा JNU

नई दिल्ली | जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) अपने नए अनिवार्य उपस्थिति नियम को पूरा करने में नाकाम रहने वाले करीब 7,000 छात्रों के माता-पिता को चेतावनी पत्र भेजने की योजना बना रहा है। यह आंकड़ा जेएनयू के कुल छात्रों का 86% है। वर्तमान में जेएनयू में करीब 8,100 शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।सूत्रों ने बताया कि स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स के एमफिल/पीएचडी के तीन छात्रों को 16 अप्रैल को सहायक रजिस्ट्रार (मूल्यांकन) के कार्यालय द्वारा जारी किए गए ऐसे चेतावनी पत्र भेज दिए गए हैं। छात्रों के माता-पिता को भेजे जा रहे इन पत्रों में यह बताया जा रहा है कि फरवरी 2018 के अंत तक वर्तमान विंटर सेमेस्टर 2018 में केंद्र/स्कूल द्वारा उनके बच्चे के अनधिकृत रूप से गैरहाजिर रहने की सूचना मिली है। इसके साथ ही पत्र में आगे कहा जाता है, “आपके बच्चे की भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए, आपसे अनुरोध है कि आप अपने बच्चे को उपस्थिति नियमों का पालन करने की सलाह दें। हालांकि, 25 वर्ष से ऊपर के इन सभी छात्रों ने इस संबंध में माता-पिता को बताने के विश्वविद्यालय के कदम की आलोचना की है। ऐसे पत्रों के बारे में पूछे जाने पर जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन की उपाध्यक्ष सिमोन जोया खान ने हैरानी व्यक्त की है।

जोया ने कहा कि ये सभी 27, 28 और 29 साल के शोधकर्ता छात्र हैं। इनके माता-पिता को पत्र भेजने का क्या मतलब है? इनमें से कुछ तो शादीशुदा हैं और उनके बच्चे भी हैं। यह छात्रों की आवाज दबाने और संगठन को कमजोर करने का विश्वविद्यालय का तरीका है। मेरा मतलब है, बीए या एमए के छात्रों के लिए मैं समझ सकती हूं। लेकिन, शोधकर्ता छात्रों के लिए यह सिर्फ बेतुका है। जेएनयू के सहायक रजिस्ट्रार (मूल्यांकन) सज्जन सिंह ने कहा कि वे ऐसे छात्रों के माता-पिता को ही ये पत्र भेजना चाहते थे, जो आवश्यक 75% उपस्थिति नियम को पूरा करने में नाकाम रहे।

उन्होंने कहा कि हमें लगभग 7,000 पत्र भेजने हैं। लेकिन मुझे यह पता नहीं है कि अब तक कितने पत्र पहले ही भेजे जा चुके हैं। स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स के एक्टिंग डीन मजहर असिफ ने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं, जेएनयू वीसी, रजिस्ट्रार, चीफ प्रोक्टर, रेक्टर्स 1-3, सभी ने कॉल और टेक्स्ट मैसेजों का कोई जवाब नहीं दिया है।