आगरा में जिंदा जलाई गई बेटी दलित न होती तो मीडिया और हिन्दूवादियों के लिए सुर्खियां होती !

डिजिटल होती दुनिया के दौर में हिंदुस्तान में अभी भी जाति और धर्म पर बहस राजनैतिक एवं सामाजिक रूप से हावी है। लोकसभा के चुनाव हों या विधानसभा के देश मे सरकारे रोजगार, विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दे पर न बनकर धर्म और जाति पर बन रही हैं । विशेष बात यह है कि अब भगवान की जाति बताने का दौर भी भारत मे शुरू हो गया है । विश्व जहां नए नए अविष्कार कर रहा है, वहीँ…

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