पढ़िए नेताओं को आईना दिखाता ध्रुव गुप्त का आर्टिकल- राजनीति और भाषा की मर्यादा !

देश की राजनीति में भाषा, भंगिमा और गंभीरता का गिरता स्तर गंभीर चिंता का विषय है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह सहित भाजपा के ज्यादातर छोटे-बड़े नेता भाषायी दरिद्रता, फूहड़पन और मूर्खता में सबसे आगे हैं। अपने को भावी प्रधानमंत्री के तौर पर देखने वाली ममता बनर्जी और मायावती भी उनसे कुछ कम फूहड़ और अहंकारी नहीं हैं। केजरीवाल, ओवैसी, नीतीश कुमार जैसे लोगों की बातों का अहंकार खींझ पैदा करता है। राहुल गांधी, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी जैसे…

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मदर्स डे पर जरूर पढ़िए ध्रुव गुप्त का आर्टिकल- पहला प्यार !

मां दुनिया की किसी भी भाषा का सबसे मुलायम, सबसे आत्मीय, सबसे खूबसूरत शब्द है। हमारा पहला प्यार मां होती है। हम उसकी अस्थियों, रक्त, भावनाओं और आत्मा के हिस्से हैं। जीवन का सबसे पहला स्पर्श मां का होता है। पहला चुंबन मां का। पहला आलिंगन मां का। पहली गोद मां की जो इस अजनबी दुनिया में आंख खोलने के बाद हमें सुरक्षा, कोमलता, ममता और आत्मीयता के अहसास से भर देती है। पहली भाषा मां सिखाती है। पहला…

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‘जिन देवी-देवताओं को देखा-जाना भी नहीं है, उनके पीछे हम सब पागल हैं’, पढ़िए जल दिवस’ का यह संदेश-

जिन देवी-देवताओं को हमने देखा-जाना भी नहीं हैं, उनके पीछे हम सब पागल है। उनके मंदिरों, इबादतगाहों और स्तुतियों ने हमारे जीवन का ज्यादातर हिस्सा घेर रखा है। जो जीवित देवी-देवता हमारी आंखों के आगे हैं और जो अनंत काल से हमारे लिए सब कुछ लुटाते रहे हैं, यदि हमने उनकी भी इतनी ही चिंता की होती तो हमारी यह दुनिया आज स्वर्ग से भी सुन्दर होती। ऐसे जीवित और वास्तविक देवी-देवताओं में ऊपर सूरज, नीचे धरती तथा जल…

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जब ईश्वर और ख़ुदा के बीच कोई फ़ासला नहीं तो उनके मंदिर और मस्जिद एक साथ क्यों नहीं रह सकते ?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा राम जन्मभूमि मंदिर और बाबरी मस्जिद के विवाद को मध्यस्थता से सुलझाने की आज की कोशिश एक बेहतरीन कदम है। उसे पता है कि इस मसले को जमीन का विवाद मानकर फैसला देने से विवाद सुलझने के बज़ाय कुछ और उलझेगा। उसका फैसला जिसके पक्ष में भी जाए, बहुत सारे दर्द और सवाल छोड़ जाएगा। हिन्दुओं के पक्ष फैसले के बाद राम मंदिर बन भी जाय तो देश के मुसलमानों में लंबे अरसे तक फैसले की…

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हत्यारे गोरक्षकों की संवेदना और आस्था तभी जगती है जब सामने वाला मुसलमान हो !

इस देश के हिन्दू संगठनों में गाय के प्रति हिलोरे मार रही करुणा उनकी मानवीय संवेदना की उपज नहीं है। इन संगठनों को पता है कि भारत विश्व का सबसे बड़ा गोमांस निर्यातक देश है। ज्यादातर हिन्दुओं द्वारा संचालित दर्जनों लाइसेंसी कारखानों में हर दिन हज़ारों गाएं और भैंसे कटती हैं और उनके मांस को अरब और यूरोपीय देशों के नागरिकों के डाइनिंग टेबुल पर परोसा जाता है। उन्हें बंद करने की मांग कभी नहीं उठती। भाजपा शासित प्रदेश…

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मुसलमान वह है जिसके हाथ और ज़ुबान से दूसरे लोग महफ़ूज रहें !

सरकार की आमद मरहबा ! धर्म वह है, जहां कोई बाध्यता नहीं है। आप दूसरों का मार्गदर्शन नहीं कर सकते। ईश्वर चाहे तो उनका मार्गदर्शन अवश्य कर सकता है।’ ‘दयालुता धार्मिकता की पहचान है। जिसमें दया नहीं, वह धार्मिक हरगिज़ नहीं हो सकता। जिसने एक मानव की हत्या की, उसने गोया पूरी मानवता की हत्या की। जिस किसी ने एक मनुष्य को बचा लिया, उसने मानवता को बचा लिया।’ मुसलमान वह है जिसके हाथ और ज़ुबान से दूसरे लोग…

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जाने किस दिन हिन्दोस्तान आज़ाद वतन कहलाएगा !

शहीद अशफाकुल्लाह खां भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक क्रांतिकारी सेनानी और ‘हसरत’ उपनाम से उर्दू के अज़ीम शायर थे। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर शाहजहांपुर में जन्मे अशफाक ने अपनी किशोरावस्था में अपने ही शहर के क्रांतिकारी शायर राम प्रसाद बिस्मिल से प्रभावित होकर अपना जीवन वतन की आज़ादी के लिए समर्पित कर दिया था। वे क्रांतिकारियों के उस जत्थे के सदस्य थे जिसमें राम प्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आज़ाद, मन्मथनाथ गुप्त, राजेंद्र लाहिड़ी, शचीन्द्रनाथ बख्सी, ठाकुर रोशन…

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जरुर पढ़ें – दशहरे पर भारतवासियों के नाम रावण का संदेश !

सभी भारतवासियों को दशहरे की शुभकामनाएं ! आज का यह दिन राम के हाथों मेरी पराजय और मृत्यु का दिन है। यह मेरे लिए उत्सव का दिन है क्योंकि एक योद्धा के लिए विजय और पराजय से ज्यादा बड़ी बात उसका पराक्रम है। मुझे गर्व है कि अपने जीवन के अंतिम युद्ध में मैं एक योद्धा की तरह लड़ा और मरा। आप कह सकते हो कि मुझमें अहंकार था और यही अहंकार मेरे पराभव का कारण बना। यही अहंकार…

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नवरात्रि पर पढ़िए पूर्व IPS ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल, ‘स्त्रीत्व का उत्सव’ !

आज स्त्री-शक्ति के प्रति सम्मान के नौ दिवसीय आयोजन शारदीय नवरात्रि का आरम्भ हो रहा है। यह अवसर है नमन करने का उस सृजनात्मक शक्ति को जिसे ईश्वर ने स्त्रियों को सौंपा है। उस अथाह प्यार, ममता और करुणा को जो कभी मां के रूप में व्यक्त होता है, कभी बहन, कभी बेटी, कभी मित्र, कभी प्रिया और कभी पत्नी के रूप में। दुर्गा पूजा, गौरी पूजा और काली पूजा वस्तुतः स्त्री-शक्ति के तीन विभिन्न आयामों के सम्मान के…

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बहुत याद आओगे, गब्बर ! पढ़िए अमजद खान की पुण्यतिथि पर ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल-

सिनेमा का कोई अभिनेता किसी एक फिल्म से भी अमरत्व हासिल कर सकता है, इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण मरहूम अमजद खान हैं। वैसे तो अमजद ने कोई दो दर्जन से ज्यादा फिल्मों में खलनायक, सहनायक और चरित्र अभिनेता की विविध भूमिकाएं कीं, लेकिन उन स्टीरियोटाइप भूमिकाओं में कुछ भी अलग नहीं था। याद उन्हें सिर्फ ‘शोले’ में गब्बर सिंह की भूमिका के लिए ही किया जाता है। हिंदी सिनेमा के दर्शकों ने किसी डाकू का इतना खूंखार…

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