महाकवि दिनकर की पुण्यतिथि पर पढ़िए ध्रुप गुप्त का आर्टिकल- अपने समय का सूर्य हूं मैं !

रामधारी सिंह दिनकर हिंदी के उन गिनेचुने कवियों में एक थे जिनकी कविताओ में एक ओर ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रान्ति का तेज है तो दूसरी ओर कोमल श्रृंगारिक भावनाओं और प्रेम की इतनी कोमल अभिव्यक्ति जिसकी बारीकी पढ़ने वालों को स्तब्ध करती है। उनका ‘कुरुक्षेत्र’ श्रेष्ठ ओजपूर्ण काव्यों में और ‘उर्वशी’ श्रेष्ठ श्रृंगारिक काव्यों में शुमार होते हैं। दोनों काव्य रचनाएं उनके व्यक्तित्व के दो ऐसे ध्रुव है जिनके अंतर्संघर्ष की बुनियाद पर उनका विराट काव्य-संसार खड़ा है।…

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जमातियों को NSA के तहत जेल में बंद करके पढ़ने को मुहैया कराया जाए क़ुरआन शरीफ़ ! पढ़िए ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल-

देश-दुनिया पर उपस्थित कोरोना संकट के बीच कानूनों और चेतावनियों की अनदेखी कर दिल्ली में सैकड़ों विदेशियों के साथ तब्लीगी जमात द्वारा आयोजित बड़ा जलसा मुझे मूर्खता के सिवा कुछ नहीं लगा था। जैसा कि जलसे में शिरक़त करने वालों को भरोसा दिलाया गया था, अल्लाह द्वारा उनकी सुरक्षा में तैनात सात हजार फरिश्तों में से एक भी उन्हें बचाने नहीं आया। देश भर में अबतक चार सौ से ज्यादा तब्लीगी कोरोना संक्रमित पाए जा चुके हैं और दर्जन…

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कोरोना वायरस की चर्चा के बीच पढ़िए ध्रुव गुप्त का आर्टिकल- एक नज़र जेलों पर भी !

प्रधानमंत्री के देश को संबोधन में जो एक बात सबसे अच्छी लगी वह थी अपने को खतरे में डालकर कोरोना के विरुद्ध ज़रूरी लड़ाई लड़ रहे चिकित्सा, पुलिस, प्रशासन से जुड़े लोगों और सफाईकर्मियों के प्रति सम्मान प्रकट करने की भावुक अपील। कोरोना के खतरे के मद्देनज़र सामाजिक संपर्क को यथासंभव टालने की प्रधानमंत्री की अपील पर अमल ज़रूरी है। आश्चर्य बस इस बात का है कि देश के जेलों में बंद कैदियों की अनावश्यक भीड़ पर किसी का…

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होली पर पढ़िए ध्रुव गुप्त का आर्टिकल : फिर तुम्हारी याद आई ओ सनम !

सामाजिकता का चलन ख़त्म होने के साथ हमारी उम्र के लोगों के लिए होली अब स्मृतियों और पुराने फिल्मी गीतों में ही बची रह गई है। रंग तो अब गुज़रे ज़माने की बात है। शाम को पड़ोस से आकर किसी ने पैरों पर अबीर रखकर प्रणाम कर लिया तो कर लिया। अभी यूट्यूब पर मनपसंद पुराने होली गीत सुन रहा था कि बचपन की होलियों की याद आई। तब दिन में हम गांव के कुछ लड़के-लडकियां रंग-अबीर लेकर गांव…

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फणीश्वरनाथ रेणु पर पढ़िए ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल : मिट्टी का संगीतकार !

हिन्दी के कालजयी कथाकार स्वर्गीय फणीश्वर नाथ रेणु को पहला आंचलिक कथाकार माना जाता है। हिंदी कहानी में देशज समाज की स्थापना का श्रेय उन्हें प्राप्त है। उनके दो उपन्यासों – ‘मैला आंचल’, ‘परती परिकथा’ और उनकी दर्जनों कहानियों के पात्रों की जीवंतता, सरलता, निश्छलता और सहज अनुराग हिंदी कथा साहित्य में संभवतः पहली बार घटित हुआ था। हिंदी कहानी में पहली बार लगा कि शब्दों से सिनेमा की तरह दृश्यों को जीवंत भी किया जा सकता है। रेणु…

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आशिक जरूर पढ़ लें ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल- ऐ मुहब्बत तेरे अंज़ाम पे रोना आया !

डेढ़ दशक पहले प्रो. मटुकनाथ चौधरी और उनकी छात्रा जूली की प्रेमकथा देश की सर्वाधिक चर्चित प्रेमकथाओं में एक रही थी। तमाम सामाजिक, पारिवारिक और नैतिक विरोध झेलते हुए दोनों ने साथ रहना स्वीकार किया था। वह भी एक ऐसे वक्त में जब लिव इन रिलेशन प्रचलित नहीं हुआ था। हम सबने मीडिया में उदात्त प्रेम पर उनके सैकड़ों प्रवचन पढ़े-सुने थे। कुछ ही सालों में जाने क्या हुआ कि दोनों के बीच अलगाव की ख़बरें आईं और उसके…

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गोडसे ने गांधी की देह की हत्या की लेकिन आत्मा को किश्तों में मारने के दोषी हम सब हैं…

ओह, गांधी !गोडसे और उसकी विचारधारा ने गांधी की सिर्फ देह की हत्या की थी, उनकी आत्मा को किश्तों में मारने के दोषी थोड़े-बहुत हम सब हैं। भारतीय स्वतंत्रता-संग्राम का यह महानायक आज़ादी की आहट मिलने के साथ ही अकेला पड़ने लगा था। उसकी सुनने वाला कोई नहीं था। उसने नहीं चाहा कि देश का बंटवारा हो, लेकिन उसके सत्तालोलुप शिष्यों ने व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के लिए देश के टुकड़े कर डाले। उसने नहीं चाहा कि देश में हिन्दू-मुस्लिम दंगे…

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कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर पढ़िए ध्रुव गुप्त का आर्टिकल : जाने कहां गए वो लोग !

दलितों, पिछड़ों और वंचितों के मसीहा, समाजवाद के सबसे मजबूत स्तम्भों में एक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कर्पूरी ठाकुर ने बगैर किसी तामझाम और प्रचार के बिहार की राजनीति में न्याय, पारदर्शिता, ईमानदारी और के जो प्रतिमान उपस्थित किए, उसके आसपास भी पहुंचना उनके बाद के किसी राजनेता के लिए संभव नहीं हुआ। एक गरीब नाई परिवार से आए कर्पूरी जी सत्ता के तमाम प्रलोभन और आकर्षण के बीच भी जीवन भर सादगी, सौम्यता और निश्छलता की…

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क्रिसमस पर पढ़िए ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल- ‘हिंदुओ के छोटे से तबके ने एजेंडे के तहत मुस्लिम-ईसाई त्योहारों के बहिष्कार की मुहिम चला रखी है’

पिछले कुछ दशकों में कट्टर हिंदुत्व के प्रसार के साथ ही हिन्दुओं के एक छोटे-से तबके ने एक एजेंडे के तहत मुस्लिम और ईसाई त्योहारों के वहिष्कार की मुहिम चला रखी है। मूर्खताओं के इस सिलसिले की नवीनतम कड़ी है मानवता के सबसे बड़े प्रवक्ताओं में एक ईसा मसीह के जन्मदिन का विरोध। 25 दिसंबर के दिन क्रिसमस के समानांतर तुलसी पूजन दिवस का कर्मकांड रचा गया है। हवा बनाई जा रही है कि पवित्र तुलसी आज के ही…

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‘इंजीनियर्स डे’ पर पढ़िए ध्रुव गुप्त का आर्टिकल : विश्वकर्मा होने का अर्थ !

प्राचीन आर्य संस्कृति के विकास में जैसे आर्य ऋषियों की भूमिका रही थी, वैसी ही भूमिका आर्य सभ्यता के निर्माण में उस युग के वास्तुकारों और यंत्र निर्माताओं की रही थी। पुराणों ने जिस एक व्यक्ति को उस सभ्यता के विकास का सर्वाधिक श्रेय दिया है, वे हैं विश्वकर्मा। उन्हें जीवन के लिए उपयोगी कुआं, बावड़ी, जलयान, कृषि यन्त्र, आभूषण, भोजन-पात्र, रथ आदि का अविष्कारक माना जाता है। अस्त्र-शस्त्रों में उन्होंने कर्ण के रक्षा कुंडल, विष्णु के घातक हथियार…

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