सीरिया के बिगड़े हालात में भारत को सता रहा तेल की कीमतें बढ़ने का डर

नई दिल्ली | सीरिया पर अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की तरफ से किए गए ताजे हमले के बाद पूरी दुनिया में काफी तनाव है। एक तरफ रूसी विशेषज्ञ अलेक्जेंडर गोल्ट्स ने तीसरे विश्‍व युद्ध की आशंका व्‍यक्‍त की है तो वहीं भारत को कच्‍चा तेल महंगा होने की चिंता सताने लगी है। यदि ऐसा हुआ तो इसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा। इसके अलावा सीरिया पर हुए संयुक्‍त हमले के बाद रूस अमेरिकी कंप‍नियों से न्‍यूक्लियर मिसाइल और एयरक्राफ्ट बनाने संबंधी सहयोग को निलंबित करने पर विचार कर रहा है। इसके साथ ही अमेरिका से आने वाले तंबाकू उत्‍पाद और शराब पर भी प्रतिबंध लगाने की चर्चा जोरों पर चल रही है। सीरिया पर हमले के बाद हालांकि भारत ने काफी सधी ही प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की है। भारत ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने का आह्वान किया है। सीरिया की तरफ से अपने ही नागरिकों पर रासायनिक हमला करने के मामले में भारत का कहना है कि इसकी पूरी जांच संबंधित अंतरराष्ट्रीय एजेंसी से करवाई जानी चाहिए, लेकिन अभी फिलहाल सभी पक्षों को धैर्य दिखाना चाहिए ताकि सीरिया के नागरिकों की मुसीबत और न बढ़े। भारत ने पूरे मामले पर गंभीर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से कहा है कि वे संयुक्त राष्ट्र के तत्वाधान में बातचीत करके मामले का समाधान करे। आपको बता दें कि सीरिया और भारत के बीच वर्षों से बेहतर संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच तकनीक और शिक्षा को लेकर भी कई समझौते हुए हैं। इसके अलावा भारत और सीरिया की सरकार दोनों देशों के 5-5 छात्रों को हर वर्ष हायर एजूकेशन के लिए स्‍कालरशिप मुहैया करवाती है। दोनों देशों के बीच व्‍यापार की यदि बात करें तो अस्‍सी के दशक से लेकर अब तक दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्‍ते भी काफी मजबूत हुए हैं। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल के बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी सीरिया की यात्रा की थी। वहीं पूर्व राष्‍ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने भी सीरिया का दौरा किया था। यह सब बताता है कि भारत और सीरिया के दरमियान किस तरह के रिश्‍ते हैं। कारोबारी रिश्‍तों की बात करें तो भारत से सीरिया को कपड़े से लेकर केमिकल, ट्रांसपोर्ट इकयूपमेंट्स, दवाएं, जूट उत्‍पाद, दालें, मसाले, कृषि उत्‍पाद आदि एक्‍सपोर्ट करता है।

वहीं ओएनजीसी और भारत अर्थमूवर्स नियमित तौर पर वहां भारी मशीनरी एकसपोर्ट करती है। ऐसे में सीरिया पर हुए हमले ने भारत की चिंताओं को बढ़ा दिया है। हालांकि सीरिया पर हुए इस हमले को लेकर भारत का लहजा चीन की तरह तल्ख तो नहीं है, लेकिन भारत ने यह जाहिर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है कि वह पूरे मामले में तटस्थ रहेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा है कि सभी पक्षों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मामला इससे ज्यादा और न बिगड़े। जानकारों का कहना है कि भारत सीरिया पर शनिवार को हुए हमले के बाद रूस की तरफ से जवाबी प्रतिक्रिया जताने को लेकर ज्यादा चिंतित है। रूस के विदेश मंत्री ने देर शाम जिस तरह से प्रेस कांफ्रेंस करके अमेरिका व उसके मित्र राष्ट्रों के खिलाफ जिस तरह से तल्ख भाषा का प्रयोग किया है उससे हालात के बिगड़ने की आशंका भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जताई जा रहे है। इसके अलावा अलेक्जेंडर द्वारा जताई जा रही तीसरे विश्‍व युद्ध की आशंका भी एक चिंता का विषय बन गई है। गोल्ट्स ने कहा है कि ‘एक साल पहले मैंने कहा था कि हम नए शीत युद्ध में प्रवेश कर रहे हैं, लेकिन कोई भी मुझसे सहमत नहीं था। अब हर कोई सहमत है, लेकिन यह भी साफ हो चुका है कि दूसरे विश्व युद्ध में हालात तेजी से बदल रहे थे। इसकी अभी बस शुरुआत भर हुई है।

उधर, अमेरिका में रूस के इस आकलन की जमकर खिल्ली उड़ाई जा रही है। अमेरिका में कहा जा रहा है, ‘यह दिलचस्प है कि रूसी ऐसी बेकार की बातों में विश्वास कर रहे हैं। ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद से अमेरिकी बम शेल्टर प्रोड्यूसर्स का कारोबार लगातार बढ़ रहा है। चीन की सरकारी मीडिया ने सीरिया पर हुए संयुक्‍त हमले के बाद कहा है कि य‍ह काफी लिमिटेड था। ग्‍लोबल टाइम्‍स के मुताबिक अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने ऐसा करके रूस के खिलाफ सीधा युद्ध नहीं छेड़ा है। इस हमले में सीरिया में मौजूद रासायनिक हथियारों के डीपो साइंटिफिक रिसर्च सेंटर को निशाना बनाया गया। हालांकि चीन ने अपने नागरिकों से सीरिया न जाने की अपील की है साथ ही उन नागरिकों के लिए जो सीरिया में मौजूद हैं, को एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि वह मिलिट्री एरिया और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। ग्‍लोबल टाइम्‍स ने यह भी माना है कि यह हमला सीरियाई की सरकार को न तो हटाने के लिए था न ही उनके खिलाफ था।