सुशांत सिंह राजपूत के यूँ चले जाने से लोग सपने देखने से डरेंगे- उड़ने से डरेंगे : ज्योति मदनानी सिंह

कोरोना आपदा के बीच मुंबई से आई खबर ने देश के प्रत्येक नागरिक को और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को स्तब्ध कर दिया है | रविवार को चर्चित अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के आत्महत्या करने की खबर से लोग हैरान रह गए | खुशमिजाज और शानदार #अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के आत्महत्या करने से समाज में नई बहस छिड़ गयी है | करों पर मंथन जारी है और लोग तरह तरह के कयास लगा रहे हैं | ‘आत्महत्या’ पर छिड़ी बहस के बीच मुंबई में फिल्म इंडस्ट्री से जुडी कॉस्ट्यूम डिजाइनर और स्टाइलिस्ट ज्योति मदनानी सिंह ( #JyotiMadnaniSingh ) से व्यवस्था दर्पण ने वार्ता की | पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश-

व्यवस्था दर्पण : सुशांत राजपूत की आत्महत्या पर क्या कहेंगी ? क्या कारण हो सकते है ?


ज्योति : सुशांत सिंह राजपूत का यूँ चले जाना बहुत ही दुख़द है। ३४ वर्ष की उम्र में जहाँ बॉलीवुड में कई लोगों का कैरियर शुरू होता है वहाँ उनके जीवन का अंत हो गया। उनके आत्महत्या के कारण पर अभी टिपन्नि करना अनुचित होगा। पुलिस छान-बीन कर रही है। उनके परिवारजनों का ये भी कहना है की सुशांत आत्म-हत्या नहीं कर सकते। हमें सच का ख़ुलासा होने का इंतज़ार करना चाहिये।

व्यवस्था दर्पण : बॉलीवुड की रीयल और रील लाइफ पर आपकी प्रतिक्रिया ?


ज्योति : एक कलाकार की रील लाइफ़ के पीछे बहुत ही योग्य और निपुण लोगों का समूह होता है। वो अपनी कुशलता से एक कलाकार (पात्र) के जीवन के एक-एक फ़्रेम, एक-एक सेकंड को सँवारते हैं। स्टॉर तो मात्र ज़िल्द होता है। रील लाइफ़ में उसका जीवन सिर्फ़ उसका नहीं होता लेकिन जनता उसे देखती है और उसे सत्य समझती है। जितना ज़्यादा जनता उससे जुड़ती है, उतनी ज़्यादा ख़ुशी और सफलता एक स्टॉर के पीछे काम कर रहे लोगों को होती है। जबकि रियल लाइफ़ तो बहुत हद तक सिर्फ़ आपका और आपका होता है जिसमें परिवार, दोस्त, जीवन साथी वैगरह शामिल होते हैं। रियल लाइफ़ में अपने जीवन के ज़िम्मेदार आप ख़ुद होते हैं। रियल और रील लाइफ़ में ज़मीन-आसमान सरीखा अंतर है।

व्यवस्था दर्पण : यूथ जिन्हें फॉलो करता है, उनका इस तरह जाना समाज मे क्या संदेश छोड़ेगा ?


ज्योति : यूथ हतोत्साहित हो जाता है। उसे अपने सपनों पे शक होने लगता है। उसके दोस्त, उसके माँ-बाप उसके आदर्श की अमुख घटना का उदाहरण दे कर उसके सपनों और अरमानों की हिम्मत तोड़ते हैं। एक सुशांत राजपूत की सफलता ने बिहार के लाखों युवाओं में हिम्मत दी होगी कि वो भी बॉलीवुड में A-लिस्ट ऐक्टर हो सकते हैं। सुशांत राजपूत का टी॰वी॰ ऐक्टर होने के बावजूद फ़िल्मों में सफलता पाने ने ना जाने हज़ारों टीवी कलाकारों में ये उम्मीद जगाई होगी कि वे भी टीवी सीरीयल में काम करने के बावजूद फ़िल्मों में सूपरस्टॉर बन सकते हैं। सुशांत राजपूत की सफलता ने ऐसे कई इंजीनियरिंग, मेडिसिन की पढ़ाई पढ़ रहे विद्यार्थी जो बॉलीवुड में काम करना चाहते हैं, उनके सपनों के पंख को परवाज़ दी होगी। उनके चले जाने से बहुत लोग सपने देखने से ड़रेंगे, बहुत लोग उड़ने से ड़रेंगे।

व्यवस्था दर्पण : आत्महत्या पर समाज को आपका कोई संदेश ?


ज्योति : जीवन एक ख़ूबसूरत तोहफ़ा है, किसी भी कारण से इसे यूँ गँवाना ठीक नहीं। ये बहुत ज़रूरी है की बचपन से हमें मानसिक स्वास्थ्य के महत्व की शिक्षा मिले। हमें ये बताया जाये कि जीवन अनमोल है, अगर एक रास्ता बंद होता है तो दूसरा स्वतः खुल जाता है। दरिया की तरह चलते रहने का नाम है ज़िंदगी।