श्री श्री से मिले जसीम, बोले- ‘#रामजन्मभूमि-#बाबरी #मस्जिद विवाद कोर्ट के बाहर हो हल’

अलीगढ़ | अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व मीडिया सलाहकार डाॅ0 जसीम मोहम्मद ने अधात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर से उनके नई दिल्ली स्थित निवास स्थान पर शिष्टाचार भेंट की तथा इस बात में अपनी सहमति दी कि बाबारी मस्जिद विघवंस अब केवल एक राजनीतिक मुद्दा है और रामजन्म भूमि बाबरी मस्जिद विवाद को कोर्ट के बाहर हल किया जाए। इस सम्बन्ध में डाॅ0 जसीम मोहम्मद ने कहा कि उन्होंने गुरूदेव श्री श्री रविशंकर से एक शिष्टाचार भेंट की तथा बाबरी मस्जिद विवाद पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि वे श्री श्री रवि शंकर ने रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को कोर्ट के बाहर हल करने पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा बाबरी मस्जिद विघवंस भारतीय इतिहास की एक दुखद घटना है परन्तु अब यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा है और इसका हल कोर्ट के बाहर कर के आपसी विश्वास और प्रेम कायम किया जाना चाहिए। डाॅ0 जसीम मोहम्मद ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड भारतीय मुसलमानों की एक मात्र घार्मिक संस्था है।

उन्होंने कहा कि यह तथ्य है कि तीन तलाक पर मुस्लिम पर्सनल बोर्ड एक आम सहमति बनाने मे विफल रहा तथा बोर्ड वास्तव मे पढ़े लिखे लोगों को शामिल करने मे हिचक महसूस करता है परन्तु बोर्ड की अपनी गरिमा है और भारतीय मुसलमान उसका सम्मान करते है। आज मुस्लिम लाॅ बोर्ड एक राजनीतिक साजिश का शिकार है और केवल कुछ राजनीतिज्ञों तथा दलों का प्लेटफार्म बन कर रह गया। डाॅ0 जसीम मोहम्मद ने कहा कि चूकिं मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड भारतीय मुसलमानों के हित सुरक्षित रखने मे विफल रहा और केवल राजनीतिक अखाड़ा बन गया गया इसलिए अब मुस्लिम बुद्धिजीवी अन्य इस्लामी विद्वानों के साथ आॅल इण्डिया शरिया बोर्ड का गठन करेगें ताकि भारतीय मुसलमानों को इस्लाम के अनुसार सही दिशा प्रदान की जा सके। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित शरिया बोर्ड को राजनीति और राजनीतिज्ञों से दूर रखा जायेगा।

डाॅ0 जसीम मोहम्मद ने आशा व्यक्त की कि मुसलमान गुरूदेव श्री श्री रविशंकर के कोर्ट के बाहर रामजन्म भूमि बाबरी मस्जिद विवाद को हल करने पर सोचे तथा मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड मुसलानों का धार्मिक नेतृत्व करे न कि राजनीतिक। डाॅ0 जसीम मोहम्मद ने श्री श्री रविशंकर जी को सर सैयद की स्मृति चिन्ह भेंट स्वरूप दिया। डाॅ0 जसीम मोहम्मद के साथ दिल्ली की समाजसेविका शबीना खान भी मौजूद थी।