AMU# आज़ादी के बाद पहली बार सर सैयद के गुलिस्तां में दिखा #संघ का दबाब

अलीगढ़| जिन्ना की तस्वीर का मामला हो या शिक्षा में दलित आरक्षण पर चल रही ताज़ा बहस हो,अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय प्रशासन आज़ादी के बाद,पहली बार पर्दे के पीछे से मिल रहे केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों को लेकर साफ़तौर पर दबाब में कार्यवाही करता हुआ प्रतीत हो रहा है|विश्वविद्यालय के इस बदले व्यवहार से हर कोई चकित है|

उक्त विचार,समाजसेवी एवं वामपंथी विचारक रंजन राना ने एक कार्यक्रम में बोलते हुए व्यक्त किये|श्री राना ने कहा कि तानाशाही व चाटुकारिता का तालमेल पुराने समय से चलता आ रहा है,परन्तु आज स्थिति और भयानक होती जा रही है|आज आप आँखें बंद करके सरकार का गुणगान नही कर रहे है तो आप को सरकारी लाभ कभी भी रोका जा सकता है|

श्री राना ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय,छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष नदीम के संदर्भ में भी कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूर्व उपाध्यक्ष को नोटिस भेजकर जो कार्यवाही की है,वह साफ़तौर पर संघ की भगवा सोच का प्रतीक है|पूर्व उपाध्यक्ष ने एक झूठी चाटुकारिता भरी चालीसा लिखने वाले का पर्दाफ़ाश करते हुए सजग किया था कि ऐसा व्यक्ति कभी भी ख़तरनाक सिद्ध हो सकता है और यह अपने निजी फ़ायदे के लिए अमुवि के बैनर का लगातार दुर्पयोग भी कर रहा है,परन्तु अमुवि प्रशासन द्वारा बिना किसी जांच के नोटिस भेजने का फैसला मदरसे में हर किसी को चकित कर रहा है|