RLD सुप्रीमो चौ अजित सिंह बोले- ‘खुला है महागठबंधन का विकल्प, सीटें तय करेगी अखिलेश-जयन्त की मुलाकात’

मथुरा । रालोद मुखिया चौ. अजित सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय लोकदल महागठबंधन का हिस्सा होने का विकल्प खुला है। रालोद को कितनी सीटें मिलेंगी, यह वार्ता के बाद तय होगा। जयन्त और अखिलेश की मुलाकात के सब स्पष्ट होगा।

चौ. अजित सिंह शुक्रवार को यहां एक होटल में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भाजपा को हराने का एक ही रास्ता है कि भाईचारा बनाया जाए। भाजपा नफरत की राजनीति करती है। हमने भाईचारा बनाने का काम मुजफ्फरनगर से शुरू किया है। रालोद नेता ने कहा कि महागठबंधन कर भाजपा को हराया जाएगा। क्या महागठबंधन में रालोद को दो सीटें मिल रही हैं? इस सवाल पर अजित सिंह ने कहा कि सीट बंटवारे की अभी कोई बात नहीं हुई है। प्रदेश में दो बड़ी पार्टियां हैं, सपा और बसपा, वे दोनों बात कर रही हैं। अभी फाइनल नहीं हुआ है। जयंत और अखिलेश यादव की भी मुलाकात होनी है। कुछ दिनों में सब कुछ तय हो जाएगा।

भाजपा के साथ जाने का सवाल नहीं-
यह पूछे जाने पर कि क्या वह भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं? इस पर अजित सिंह ने कहा कि भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का कोई मतलब ही नहीं है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने दल बदल कानून में बदलाव की जरूरत बताई।

.. तो माफ होगा किसानों का कर्ज-
रालोद मुखिया चौ. अजित सिंह ने कहा कि गठबंधन सरकार आई तो किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंकड़े कुछ भी कहें, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी 65 प्रतिशत लोग किसानी पर निर्भर हैं। किसान खुशहाल नहीं है। किसान की आय कम हुई है। मोदी सरकार ने किसान को बर्बाद कर दिया है। होना यह चाहिए कि बुवाई से पहले किसान को पांच लाख रुपये प्रति एकड़ दे देना चाहिए।

सवर्ण आरक्षण में कम हो आय सीमा-
अजित सिंह ने कहा कि सवर्ण गरीबों को आरक्षण मिलना चाहिए। कुछ राजनीतिक दलों ने इस बात को पिछले चुनावों में अपने घोषणापत्र में भी रखा था। भाजपा ने सवर्णों को आरक्षण देने की बात जिस तरह की है, वह धोखा है। इसमें आय सीमा कम करनी चाहिए। तभी सवर्ण गरीबों को इसका लाभ मिल सकेगा। जो मापदंड इस समय रखे हैं, उसमें तो 95 प्रतिशत सवर्ण आ रहे हैं।

विवादित जगह न बने राम मंदिर-
अजित सिंह ने कहा कि राम मंदिर बनाने में किसी को आपत्ति नहीं है। विवादित जगह राम मंदिर नहीं बनना चाहिए। अगर वहीं पर मंदिर बनाना है, तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करो। अब तो बना हुआ स्ट्रक्चर भी उठाकर कहीं भी ले जाया जा सकता है। जब तक फैसला नहीं आता, कहीं और मंदिर बना लिया जाए, अगर फैसला मंदिर के पक्ष में आए तो उस मंदिर को उठाकर निर्धारित स्थान पर रख दिया जाए।