कैंसर को हराकर शहीदों के सम्मान में दौड़ेंगी ‘रश्मि’

मुंबई | आईडीबीआई फेडरल लाइफ इंश्योरेंस द्वारा मुम्बई पर साल 2011 में हुए आतंकवादी हमले में हताहत लोगों के सम्मान में आयोजित होने वाली द ट्रिब्यूट रन में हिस्सा लेने जा रहीं मुंबई निवासी रश्मि मेहरा की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं। अपने मजबूत इरादों के दम पर कैंसर जैसी बीमारी से जीत हासिल करने के बाद रश्मि अब शहीदों के सम्मान में होने वाले द ट्रिब्यूट रन में दौड़ती हुई नजर आएंगी। ट्रिब्यूट रन का आयोजन 25 नवम्बर को होगा। रश्मि ट्रिब्यूट रन में अपने बेटे आर्यन कुमार के साथ हिस्सा लेंगी। रश्मि 21 किलोमीटर की रेस में हिस्सा लेंगी, वहीं आर्यन पांच किलोमीटर की रेस में दौड़ेंगे।

वित्तीय उद्योग में 15 साल तक काम कर चुकी रश्मि ने आईएएनएस के साथ साक्षात्कार में अपनी कैंसर की लड़ाई से लेकर मैराथन में हिस्सा लेने तक के सफर को साझा किया। कैंसर के बारे में पता चलने और इससे संघर्ष के बारे में रश्मि ने कहा, “जनवरी, 2016 में मुझे पता चला कि मुझे ओवेरियन कैंसर है। हालांकि, यह सबसे अच्छी बात थी कि मुझे सही समय पर इसका पता चल गया। इससे मुझे बेहतर होने में अधिक मदद मिली। मेरे परिवार और दोस्तों से मिले समर्थन ने मुझे इस बीमारी से लड़ने में मेरी मदद की।” रश्मि ने कहा कि कैंसर जैसी बीमारी से संघर्ष के दौरान दौड़ने की प्रेरणा उन्हें अपनी बहन से मिली। उन्होंने कहा, “कीमोथैरेपी के दौरान मैं अपने पति और बहन के साथ सुबह की सैर पर जाती थी। लेकिन 100 मीटर के बाद मेरे लिए चल पाना मुश्किल होता था, क्योंकि कीमोयोथैरेपी ने मेरी शारीरिक क्षमता पर सबसे अधिक प्रभाव डाला था।”

रश्मि ने कहा, “मेरे शरीर का बाईं तरफ का हिस्सा कमजोर हो गया था और ऐसे में मैंने अपने आप को मजबूत करने का फैसला लिया। मेरी बहन ने मुझे दौड़ने के लिए प्रेरित किया। अपने जीवन की पहली 21 किलोमीटर की रेस उन्होंने मुझे समर्पित की। इससे मुझे काफी प्रेरणा मिली और मैंने धीरे-धीरे सैर करने के दौरान दौड़ना शुरू किया।” एक बार रश्मि ने दौड़ना शुरू किया, तो पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह अब तक 12 मैराथन में हिस्सा ले चुकी हैं। इस ओर अपने पहले कदम के बारे में उन्होंने कहा, “सितम्बर, 2016 में मैंने अपनी शारीरिक क्षमता को वापस हासिल करने का फैसला किया। इस प्रकार मैंने जीवन में शारीरिक फिटनेस की महत्ता को पहचाना।”

दौड़ने के कारण हुए बदलाव से रश्मि इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने इसी में अपना करियर भी बना लिया। 15 साल तक वित्तीय उद्योग में अपनी सेवाएं देने के बाद अब रश्मि एक प्रमाणित काउंसलर और मानसिक फिटनेस कोच हैं। एक महिला के लिए काम और घर की जिम्मेदारिया संभालना आसान नहीं। ऐसे में अपने घर और काम के बीच संतुलन बनाकर अपने जीवन की प्रेरणा को बनाए रखने के बारे में रश्मि ने कहा, “जीवन में कई दिन काफी थका देने वाले होते हैं, लेकिन सबसे अहम बात है कि मुझे जो चीज पसंद है वह मैं करती हूं। मैं लोगों को उनके भरोसे को फिर से कायम करने में मदद करती हूं।” अपने जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा के बारे में रश्मि ने कहा, “मेरे बच्चे, माता-पिता, पति और वे सभी लोग जिन्होंने अंधेरे से लड़कर बाहर निकलकर जीवन को संवारा है। वे सभी लोग मेरी प्रेरणा हैं। मेरा मानना है कि कैंसर ने मुझे खुद को पहचानने का एक मौैका दिया।”