पांच साल की लड़ाई के बाद AMU में रचना कौशल को मिला इंसाफ, बनीं प्रोफेसर

अलीगढ | अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रचना कौशल को लम्बी लडाई के बाद आखिर विजयी मिल ही गई। यूजीसी, एमएचआईडी व हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद एएमयू ने अब न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए रचना कौशल को प्रोफेसर पद पर पदोन्नति दे दी है। एएमयू के राजनीति शास्त्र में एसोसिएट प्रोफेसर रचना कौशल के प्रमोशन को लेकर विवाद चल रहा था।

पूर्व कुलपति जनरल जमीरुद्दीन शाह पर वेटिज माक्र्स डिस्ट्रीब्यूशन लिस्ट में छेड़छाड करने का आरोप लगाया गया। मामले की शिकायत यूजीसी से की गई थी। जिसमें जवाब में विश्वविद्यालय की ओर से दिये गए जवाबी दस्तावेजों में अंकों से छेड़छाड़ की बात उजागर हुई थी। यह हकीकत उजागर होने के बाद प्रकरण की शिकायत मानव संसाधन विकास मंत्रालय से की गई थी। जिसमें एसोसिएट प्रोफेसर रचना कौशल ने बताया कि इंटरव्यू के समय उनके पास दो पीएचडी, एक एमफिल और एक मेजर रिसर्च प्रोजेक्ट था। जबकि प्रमोशन डॉ. फरहाना कौसर का कर दिया गया। जिनके पास कोई प्रोजेक्ट नहीं था। डॉ. रचना ने यह भी आरोप लगाया था कि उनके इंटरव्यू के छह दिन बाद ही फाइन आर्ट डिपार्टमेंट में हुई सलेक्शन कमेटी में कुछ शिक्षकों को बिना पीएचडी और प्रोजेक्ट के ही प्रमोशन दे दिया गया था। उन्होंने इन शिक्षकों के एकेडमिक परफामेंस स्कॉर पर भी आपत्ति उठायी थी। एमएचआरडी ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एएमयू से पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब की।

विश्वविद्यालय स्तर पर एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन कर प्रकरण की जांच के आदेश दिये थे। फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में भी कहा गया था कि शिकायतकर्ता के 15 अंक है। जिनमें छेड़छाड कर 12 अंक कर दिया गया। लेकिन प्रमोशन 10 अंक वाले को दिया गया है। फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट सामने आने के बाद शिक्षक को इंसाफ नहीं मिला। ऐसे में निराश होकर रचना कौशल ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय ने शिक्षिका के पक्ष में फैसला सुनाते हुए दो माह में उनको प्रमोशन देने का आदेश जारी किया था। न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए इंतजामिया ने गुरूवार को उनको प्रमोशन देकर प्रोफेसर पद पर तैनाती दे दी है। विश्वविद्यालय की ओर से यह आदेश संयुक्त कुलसचिव नफीस अहमद फारूखी की ओर से किया गया है।