राममंदिर ट्रस्ट के लिए ओबीसी चेहरे की खोज, पूर्व गवर्नर कल्याण सिंह हो सकते हैं मनोनीत

नई दिल्ली | राम मंदिर निर्माण के लिए गठित राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में ओबीसी को भागीदारी देने के लिए मंथन का दौर शुरू हो गया है। मंथन की शुरुआत तब हुई जब मंदिर आंदोलन के अग्रणी चेहरों में शुमार कल्याण सिंह और उमा भारती ने ट्रस्ट में ओबीसी की भागीदारी न होने पर सवाल उठाए। इस समय ट्रस्ट में दो जगह खाली हैं। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही इन खाली पदों में से एक पद ओबीसी वर्ग को देगी। सरकारी सूत्रों का यह भी कहना है कि पूर्व सीएम कल्याण सिंह ट्रस्ट में मनोनीत किये जा सकते हैं |

दरअसल वर्तमान में ट्रस्ट में जिन नौ लोगों को शामिल किया गया है उनमें से 8 ब्राह्मण और एक दलित वर्ग के हैं। ट्रस्ट में ओबीसी को भागीदारी नहीं मिलने पर राम मंदिर आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने और अन्य पिछड़ा जाति वर्ग से आने वाले दो कद्दावर नेताओं कल्याण सिंह और उमा भारती ने सवाल उठाए। उमा का तो साफ कहना था कि मंदिर आंदोलन का नेतृत्व कल्याण सिंह, विनय कटियार और उन्होंने खुद किया था जो कि ओबीसी से हैं। ऐसे में ओबीसी को ट्रस्ट में जगह न मिलना सही नहीं है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट में खाली पड़े दो पदों में से एक ओबीसी वर्ग का होगा। इस पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। इसके साथ ही इसके लिए ओबीसी चेहरे की तलाश हो रही है जिनका मंदिर आंदोलन से जुड़ाव हो या जिसे परोक्ष अथवा प्रत्यक्ष रूप से भगवान राम के प्रचार प्रसार से जोड़ा जा सके।

दरअसल ट्रस्ट गठित होने के बाद इसका कई कारणों से विरोध हो रहा है। इसमें ओबीसी को जगह मिलने, अयोध्या के बाहर को लोगों को ज्यादा महत्व मिलने और महंत नृत्य गोपाल दास को जगह न मिलने जैसे सवाल उठाए गए हैं। मुश्किल यह है कि मंदिर आंदोलन से जुड़े पिछड़ा वर्ग के नेता कल्याण सिंह, विनय कटियार और उमा भारती तीनों पर बाबरी विध्वंस का मामला चल रहा है। नृत्य गोपाल दास के साथ भी यही मुश्किल है।