बरेली के मजदूर ने साईकिल चुराकर मालिक को लिखी भावुक चिट्ठी, पढ़िए बेबसी के ये शब्द-

भरतपुर निवासी साहब सिंह की साइकिल चोरी हो गई. साहब सिंह थाने में रिपोर्ट लिखाने की योजना बना रहे थे, लेकिन जहां पर साइकिल खड़ी थी, वहीं पर एक छोटी सी चिट्ठी पड़ी मिली. इसे साइकिल चुराने वाले ने लिखी थी । मजमून यूं था-


“नमस्ते जी, मैं आपकी साइकिल लेकर जा रहा हूं. हो सके तो मुझे माफ कर देना जी क्योंकि मेरे पास कोई साधन नहीं है. मेरा एक बच्चा है, उसके लिए मुझे ऐसा करना पड़ा, क्योंकि वो दिव्यांग है. चल नहीं सकता, हमें बरेली तक जाना है.
आपका कसूरवार
एक यात्री मजदूर एवं मजबूर
मोहम्मद इकबाल खान
बरेली.”

चिट्ठी से जाहिर है कि इकबाल ने मजबूरी में चारी तो की, लेकिन इसकी सूचना साइकिल मालिक को दे दी है. बैंक लूटता तो बेटे के साथ लंदन में सेटल हो जाता. लेकिन आम आदमी है. ईमान ने गवाही नहीं दी होगी, घर जाने की मजबूरी और बेटा विकलांग. उसने माफी मांग ली. चिट्ठी पढ़कर साधारण किसान साहब सिंह भी पिघल गए. रिपोर्ट लिखाने नहीं गए.

साहब सिंह की उदारता भी इस बात की गारंटी कहां है कि इकबाल और उसका विकलांग बेटा घर पहुंचेंगे ही ।।इक्कीसवीं सदी की जिंदगियां बीते सदियों की करुण कहानियों में तब्दील हो गई हैं ।

-युवा पत्रकार कृष्णकांत के फेसबुक वॉल से