वैलेंटाइन वीक पर जरूर पढ़ें पूर्व IPS ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल- कहो ना प्यार है !

हमारी पीढ़ी में अपने सपनों की मलिका को प्रोपोज करने का साहस कम ही होता था। वह कभी मुख़ातिब भी हुई तो मुंह से ज़ुबान गायब। जब तक कुछ कहने का साहस जुटा पाएं, हमारी दुनिया लुट चुकी होती थी। वह दिल में किसी की तस्वीर बनाकर उसके तसव्वुर में जिंदगी गुज़ार देने वाला दौर था। उस शब्दातीत, अतीन्द्रिय, एकांत प्रेम की कुछ अलग व्यथा, कुछ अलग ही तिलिस्म हुआ करता था। आज की पीढ़ी खुली हुई है। वह एकतरफा रिश्तों के साथ अपना वक़्त बर्बाद करने को तैयार नहीं।

वैलेंटाइन बाबा ने आज का ‘प्रोपोज डे’ ऐसे ही युवाओं के लिए बनाया है। आपका दिल सचमुच किसी के लिए धड़कता है तो उसे आज प्रोपोज कर दीजिए। लेकिन बहुत एहतराम के साथ। हमारी दुआ है कि आपका प्रस्ताव स्वीकृत हो जाय ! अस्वीकृति मिलती है तो उसे बड़ी शालीनता के साथ स्वीकार करें और उसे दुआओं से नवाज़ते हुए निकल पड़े अगले सफ़र पर ! शादीशुदा लोगों को सलाह कि आज के दिन वे घर के बाहर प्रेम की संभावनाएं तलाशने के बजाय यह सोचें कि अपनी पत्नी या पति को आखिरी बार आपने कब प्रोपोज़ किया था ! ज़माने बीत गए हैं न ? आज मौके का फायदा उठा कर एक बार फिर जीवनसाथी को प्रोपोज़ कर दीजिए ! क्या पता दांपत्य के ठहरे हुए रिश्ते में ताजगी का एक नया, ताजा अध्याय ही जुड़ जाय !

आप सबको ‘प्रोपोज़ डे’ की बहुत शुभकामनाएं !

-लेखक ध्रुप गुप्त पूर्व आईपीएस हैं और देश के बड़े साहित्यकार हैं |