व्यंग : फिल्मों में पुलिस : क़ानून के हाथ बंधे हैं ! और यह तस्वीर भी कुछ कहती है !!

कार्यालय|….आजकल यह तस्वीर फेसबुक व सोशल-मिडिया पर तैर रही है,अनायास ही कुछ देर ध्यान आकर्षित कराती है और सोचने पर मजबूर करती है कि फिल्मों के डायलाग क्या ,जमीनी हक़ीकत बन सकते हैं ? रोज यातायात-पुलिस हेलमेट के चालान काट रही होती है, थाना-चौकी में भी मेहमान आ रहे है,कुटाई चल रही है,परन्तु किसकी ? लोगों को कहते हुए सुना जाता है कि पुलिस का चक्कर पड़ गया है,अब रुपयों का इंतजाम करना पड़ेगा, आरोपी और अभियुक्त दोनों को ही कर्ज लेते हुए देखा जा सकता है|
जब से मोबाइल सुविधा शुरू हुयी है,इंस्पेक्टर साहब के मोबाइल पर 90% फोन आते हैं और आवाज आती है कि हमारा ख़ास कार्यकर्त्ता है| लॉ-इन-आर्डर के कलश में कौन सुराख करता है,और क़ानून के हाथ बंध जाते हैं| खैर,,,हो सकता है,सब कुछ ठीक हो,हमारी आँखों में मिर्च के हाथ लग गये हों,,,,कचौड़ी वाले ने हरी-मिर्च रख दी थीं|