काले धन को सफेद करने में हुआ कमीशन का खेल, खरीदा 54 किलो सोना

लखनऊ | नोटबंदी के दौरान कानपुर के किदवईनगर में काले धन को सफेद करने के लिए कमीशन का खेल खेला गया था। करोड़ों के लेनदेन से 54 किलोग्राम सोने की खरीद हुई। बदले में खाताधारक को दो फीसदी कमीशन मिला था, लेकिन खेल करने वालों ने उसके खाते में जमा हो रहे रुपये किसके हैं, इसकी भनक तक नहीं लगने दी। आयकर विभाग की डाटा माइनिंग में पकड़े जाने के बाद जांच शुरू हुई तो पत्ते खुलने शुरू हो गए। खुद को फंसता देख सोना खरीद के असली खिलाड़ियों ने ऐसे किसी लेनदेन से ही इनकार कर दिया। जैन विहार, बिरहाना रोड के सोना कारोबारी प्रशांत जैन और आशीष डालमिया का आरोप है कि नोटबंदी के दौरान 10 से 19 नवंबर 2016 के बीच डीएनएम इंटरप्राइजेज, मेसर्स पन्नालाल महेश चंद्र ज्वैलर्स और राधामोहन पुरुषोत्तम दास ज्वैलर्स प्राइवेट लिमिटेड ने चुन्नीगंज निवासी नितिन स्वरूप अग्रवाल (प्रोपराइटर मेसर्स रामेश्वरम मार्बल्स एंड ग्रेनाइट्स) को 54 किलो सोना दलाल पंकज ओमर के जरिये बेचा था। सोना खरीदने वालों ने इसका भुगतान आरटीजीएस के जरिये तीनों फर्मों के खातों में कराया था। जिस सिंडिकेट बैंक के खाते से रकम ट्रांसफर की गई थी, वह एच ब्लॉक किदवईनगर निवासी मनोज जैन की फर्म श्याम ट्रेडिंग के नाम पर है। आरोप है कि मनोज के खाते के जरिये ही नितिन स्वरूप, पंकज ओमर, विजय त्रिपाठी और संजय पांडेय ने नोटबंदी के दौरान 500 और 1000 के पुराने नोट जमा कराकर खेल किया है। इस पर दोनों कारोबारियों ने पांचों के खिलाफ किदवई नगर थाने में अलग अलग 27-27 किलो सोना खरीद में धोखाधड़ी का आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज कराई है।

खाताधारक केमिकल कारोबारी मनोज जैन ने कमीशन के खेल की पूरी कहानी पुलिस को बता दी है। मनोज ने खुलासा किया कि बर्रा निवासी संजय पांडेय और पत्रकारपुरम, विकास नगर के विजय त्रिपाठी के साथ वह कारोबार करता था। नोटबंदी के दौरान ही दोनों ने उसे कमीशन का लालच देकर खाते में पुराने नोट जमा करके आरटीजीएस करने को कहा था। इसके बदले में उसे दो फीसदी कमीशन दिया गया। संजय और विजय ही उसके साथ बैंक में रुपये जमा कराने गए थे। इसके सीसीटीवी फुटेज भी आयकर विभाग के पास हैं। दोनों ने उसके खाते से करीब चार करोड़ 60 लाख का ट्रांजेक्शन किया था। यही बात मनोज ने आयकर विभाग के अधिकारियों को भी बताई है। पूरे मामले में खुद को फंसता देख संजय और विजय ने आयकर अधिकारियों को बताया कि मनोज के बीमार होने की वजह सेवे उसके साथ गए थे। रुपये जमा जरूर किए थे, लेकिन ये रुपये मनोज के ही थे। आयकर अधिकारियों ने सभी पक्षों से उस दौर के लेनदेन का रिकार्ड मांगा है। सभी पक्षों से पूछा कि आठ से 20 नवंबर तक उनके पास किन स्रोतों से धन आया। सोना खरीद मामले में धोखाधड़ी का केस दर्ज होने के बाद किदवई नगर पुलिस ने अपनी जांच शुरू कर दी है। थानाध्यक्ष शेष नारायण पांडेय का कहना है कि कारोबारियों की तहरीर पर नितिन स्वरूप, पंकज ओमर, मनोज जैन, विजय त्रिपाठी और संजय पांडेय के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। पूछताछ के लिए सभी को बुलाया गया है। सभी से लिए गए बयानों के आधार पर उसका भौतिक सत्यापन किया जाएगा।

सोना खरीद में कालेधन को ठिकाने लगाने के मामले में आयकर विभाग सिंडीकेट बैंक के खाताधारकों का सत्यापन करेगा। विभाग यह भी देखेगा कि जिस खाते से लेनदेन हुआ उसकी केवीसी (खाताधारक की पहचान के दस्तावेज) पूरी है या नहीं। कहीं ऐसा तो नहीं कि बैंक में खाताधारक के नाम से फर्जी एकाउंट खोला गया। ऐसा है तो बैंक की भूमिका की भी जांच होगी। सराफा कारोबारी प्रशांत जैन और आशीष डालमिया का दावा है कि नितिन स्वरूप एंड कंपनी को नंबर एक में माल बेचा गया। इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन होने की वजह से उनका व्यापार नंबर एक में हुआ। आयकर विभाग को इसका विवरण दिया जा चुका है। जांच में और भी तथ्य पेश किए जाएंगे।