हाथरस गैंगरेप पर बोलीं अलका लांबा- दलित की बेटी को न इंसाफ दिया गया, न सम्मान से अंतिम संस्कार किया गया, RSS की संस्कृति में क्या यही हिन्दू राष्ट्र है ?

नई दिल्ली | हाथरस गैंगरेप मामले में प्रदेश की योगी सरकार लगतार घिरती जा रही है | जबरन अंतिम संस्कार कराने और परिजनों को मृतका का चेहरा तक न दिखाने से देशभर में आक्रोश है | कांग्रेस प्रवक्ता अलका लांबा ने तो सरकार पर कई बड़े प्रहार किये हैं | अलका लांबा ने आरएसएस और भाजपा को भी लपेटे में लिया है | कथित हिंदूवादियों के मौन पर भी अलका लांबा ने हमला बोलै है | अलका केट्वीट ट्विटर पर ट्रेंड हो रहे हैं |

अलका लांबा ने लिखा कि- हाथरस में जिस तरह से अजय बिष्ट की पुलिस ने रेप पीड़िता का जबरन अंतिम संस्कार किया है वो बीजेपी की गुंडई का जीता जागता उदाहरण है। दलित की बेटी को न इंसाफ दिया गया और न ही सम्मान से अंतिम संस्कार ही किया गया, RSS की संस्कृति में क्या यही हिन्दू राष्ट्र है ? कथित हिंदूवादी मौन क्यों है ?

ट्विटर पर अलका ने लिखा कि- माँ बेटी के हाथों में संस्कारों के मुताबिक अंतिम बार हल्दी लगाना चाहती थी पर अजय बिष्ट के आदेशानुसार पुलिस और प्रशासन ने माँ की इस इच्छा की भी परवाह किए बगैर जबरन अंतिम संस्कार कर दिया. लानत है तुम सब पर.. आ थू.. अजय बिष्ट, BJP, मोदी सरकार

ट्विटर पर अलका ने लिखा कि- माँ बेटी के हाथों में संस्कारों के मुताबिक अंतिम बार हल्दी लगाना चाहती थी पर अजय बिष्ट के आदेशानुसार पुलिस और प्रशासन ने माँ की इस इच्छा की भी परवाह किए बगैर जबरन अंतिम संस्कार कर दिया. लानत है तुम सब पर.. आ थू.. अजय बिष्ट, BJP, मोदी सरकार

अलका लांबा ने लिखा कि- पर्यटन पर आने वालों यह भाजपा के अजय बिष्ट का उत्तर प्रदेश है, आने से पहले अपनी बेटियों को घरों में, तालों में बंद कर के आना… क्योंकि बेटियों की जिम्मेदारी ना इनकी है ना ही प्रधानमन्त्री मोदी जी की….

https://twitter.com/LambaAlka/status/1311157131672825856?s=20

एक अन्य ट्वीट में अलका लांबा ने लिखा कि- गैंग रेप की पुष्टि #AIIMS में मेडिकल जाँच से या फिर मरने के बाद पोस्टमार्टम के ज़रिए हो सकता थी, सच्चाई सामने ना आ सके इसलिए मुख्यमंत्री अजय बिष्ट ने आदेश देकर परिवार की इच्छा के बिना और अनुपस्थित में पीड़िता का आधी रात को ही अपनी पुलिस के हाथों अंतिम संस्कार करवा डाला.

एक अन्य ट्वीट में अलका ने लिखा कि- बलात्कार की घटनाएँ हर रोज रहीं हैं,कोई राज्य इससे अछूता नहीं, दुःख और पीड़ा तब और बढ़ जाती है जब मात्र अपनी छवि बचाने के लिए,मामले को दबाने के लिए पूरी की पूरी सरकार,प्रशासन, पुलिस अपराधियों के साथ खड़ी दिखती है. और न्याय के नाम पर बस मुआवजा देकर परिवार को ख़ामोश कर दिया जाता है.