ताई के बाद भाई ने भी इंदौर से चुनाव लड़ने से किया इंकार

इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर लोकसभा क्षेत्र से टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने बुधवार सुबह चौंकाने वाली घोषणा की कि वह आम चुनाव नहीं लड़ेंगे। इसके बाद भाजपा के इस 30 साल पुराने गढ़ के भावी चुनावी चेहरे को लेकर कयासों का दौर तेज हो गया है। विजयवर्गीय ने ट्विटर पर कहा,‘‘इंदौर की जनता, कार्यकर्ताओं व देश भर के शुभचिंतकों की इच्छा है कि मैं लोकसभा चुनाव लड़ूं,पर हम सभी की प्राथमिकता समर्थ और समृद्ध भारत के लिये नरेंद्र मोदी को पुनः प्रधानमंत्री बनाना है। पश्चिम बंगाल की जनता मोदी जी के साथ खड़ी है। बंगाल में रहना मेरा कर्तव्य है। अतः मैंने चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया है।


स्थानीय लोगों में ‘भाई’ के नाम से मशहूर विजयवर्गीय ने इंदौर से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में पंकज संघवी का नाम घोषित होने के तकरीबन 12 घंटे बाद खुद को चुनावी टिकट की दावेदारी से अलग किया। इस बीच, विजयवर्गीय की चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा पर कांग्रेस ने निशाना साधा है। प्रदेश कांग्रेस समिति के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने कहा, ताई (सुमित्रा महाजन का लोकप्रिय उपनाम) की तरह भाई (विजयवर्गीय) ने भी टिकट नहीं मिलता देख कह दिया कि मैं चुनाव नहीं लड़ना चाहता हूँ। विजयवर्गीय एक दिन पूर्व तक तो कह रहे थे कि उनके लिये बंगाल की चुनौती बड़ी है, लेकिन पार्टी आदेश देगी तो वह इंदौर से लोकसभा चुनाव लड़ लेंगे।  

गौरतलब है कि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन पहले ही घोषणा कर चुकी हैं कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगी।  ताई  (मराठी में बड़ी बहन का सम्बोधन) के नाम से प्रसिद्ध वरिष्ठ भाजपा नेता इंदौर क्षेत्र से वर्ष 1989 से सतत चुनाव जीत रही हैं। भाजपा की ओर से इस बार भी महाजन को मध्यप्रदेश की इस सीट से भाजपा के टिकट का शीर्ष दावेदार माना जा रहा था। भाजपा ने इंदौर सीट से अपना प्रत्याशी अब तक घोषित नहीं किया है। इंदौर सीट से भाजपा के चुनावी टिकट के दावेदारों के रूप में शहर की महापौर व पार्टी की स्थानीय विधायक मालिनी लक्ष्मणसिंह गौड़, भाजपा के अन्य विधायक-रमेश मैंदोला,पूर्व लोकसभा सांसद कृष्णमुरारी मोघे और इंदौर विकास प्राधिकरण के पूर्व चेयरमैन शंकर लालवानी के नाम भी चर्चा में बने हैं।