राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद की कार्यक्रम परामर्श समिति की सदस्या बनीं डॉ कविता भट्ट

नई दिल्ली । उत्तराखंड की मूल निवासी तथा साहित्य व लेखन जगत में शैलपुत्री के नाम से विशिष्ट पहचान रखने वाली हे.न.ब. गढ़वाल (केंद्रीय) विश्वविद्यालय, श्रीनगर (गढ़वाल) उत्तराखंड के फेकल्टी डेवलपमेंट सेंटर में कार्यरत डॉ कविता भट्ट   को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की कार्यक्रम परामर्श समिति की सदस्या बनाया गया है। 

उल्लेखनीय है कि उपर्युक्त समिति विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ज्ञान-विज्ञान लोकव्यापीकरण के विभिन्न पहलुओं  का मूल्यांकन करते हुए इसके विविध पक्षों पर परामर्श और अग्रसारण का कार्य करती है। इसके अंतर्गत यह समिति परियोजना स्क्रीनिंग समिति द्वारा जांच किए गए प्रस्तावों, इनके बजट का मूल्यांकन, समर्थन के प्रस्तावों की सिफारिश करना, विज्ञान संचार के क्षेत्र में नई पहलों पर विचार-विमर्श करना परियोजनाओं और पहलों की प्रगति की समीक्षा करने के लिए मार्गदर्शन करना, समिति हेतु अन्य सदस्यों का सह-चयन करना तथा विशेषज्ञों को बैठकों में आमंत्रित करना इत्यादि जैसे विशिष्ट दायित्त्वों का निर्वहन करती है। 

बताते चलें कि डॉ भट्ट एक लेखिका (शैक्षणिक एवं साहित्यिक) होने के साथ ही सम्पादिका तथा योग-दर्शन विशेषज्ञ हैं। डॉ भट्ट उन्मेष की राष्ट्रीय महासचिव होने के अतिरिक्त ज्ञान, विज्ञान,  साहित्य और संस्कृति सेवा हेतु समर्पित अनेक अतंर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय संगठनों की पदाधिकारी के रूप में  समाज सेवा में निरन्तर निरत हैं। शैक्षणिक एवं साहित्यिक लेखन हेतु विभिन्न  प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा इनको अनेक अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय अवार्ड्स से सम्मानित किया गया है। देश-विदेश में अनेक आमन्त्रित व्याख्यानों के अतिरिक्त इनको अनेक मंत्रालयों, साहित्य अकादमियों, दूरदर्शन और आकाशवाणी इत्यादि द्वारा भी पिछले अनेक वर्षों से समसामयिक विषयों पर वार्त्ताओं, व्याख्यानों, परिचर्चाओं और काव्यपाठ  इत्यादि हेतु आमन्त्रित किया जाता रहता है। इन्होंने हिमालय लोकनीति मसौदा समिति की सदस्या के रूप में भी कार्य किया।

अनेक वर्षों के दीर्घकालिक अध्ययन-अध्यापन-शोध-लेखन अनुभव में डॉ कविता भट्ट की एक दर्जन से अधिक पुस्तकें, सैकड़ों शोधपत्र, लोकप्रिय आलेख, कविताएँ आदि विभिन्न प्रिंटेड और ऑनलाइन अतंर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं तथा वेबसाइट्स में प्रकाशित हो चुकी हैं। योगदर्शन पर प्रकाशित इनकी कुछ पुस्तकें विश्वविद्यालयीय पाठ्यक्रम में भी सम्मिलित हैं। ज्ञान विज्ञान के प्रसार और लोकव्यापीकरण हेतु आपके कार्यों की निरन्तर सराहना होती रही है।