#धर्म और #जाति पर ही बहस #देश के विरुद्द के एक बड़ा #षड्यंत्र !

हिंदुस्तान में स्वामी #_विवेकानंद से बड़ा सनातन धर्म का प्रचारक आज तक नहीं हुआ । विवेकानंद जी ने अमेरिका में धर्म की पताका फहराकर विश्व का सनातन धर्म से जो परिचय कराया उसे आजतक याद किया जाता है । क्यों ?

सीधा सा जवाब है कि जिस सनातन धर्म को स्वामी विवेकानंद ने प्रचारित प्रसारित किया उसमें ईर्ष्या, घृणा, नफ़रत, भेदभाव का कोई स्थान नहीं था । विश्व बंधुत्व की भावना और प्रत्येक धर्म का सम्मान उसकी विशेषता थी ।लेकिन आज जब विश्व के अन्य देश नित नए आविष्कार कर रहे हैं, आधुनीकरण का दौर है हम और हमारा देश हिंदू मुस्लिम की राजनीति में फँसे हैं । देश में हिंदू रहेंगे या मुसलमान यह तय करने में लगे हैं, युवाओं को सशक्त बनाने, रोज़गार देने के बजाय उन्हें धर्म के नशे की लत लगाने में व्यस्त हैं ? भ्रष्टाचार को ख़त्म करने, किसानो की समस्याओं को दूर करने , श्रमिकों को मजबूर बनाने, ग़रीबी, जनसंख्या वृद्धि को दूर करने और देश में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चहित करने के बजाय देशभर चंद नेताओं के बयान मीडिया की सुर्ख़ियो में हैं ।

लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ (मीडिया) जिसपर आम आदमी सबसे ज़्यादा यक़ीन करता था अब उसी पर विश्वास का संकट है । देशभर में लोगों को गुमराह करने और धर्म की राजनीति में फँसाए रखने का माध्यम राजनैतिक दलों के लिए मीडिया बन गया है । मुद्दों की बात छोड़ मीडिया अब पार्टियों के एजेंडे के हिसाब से डिबेट करवा रहा है । कभी हिंदू ख़तरे में है दिखाता है तो कभी मुस्लिमों को ख़तरे में बताता है । हिंदुस्तान की जनता अब दलों और मीडिया घराने के इस एजेंडे को समझ भी रही है । इस सबके बावजूद बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि नौजवानो, किसानो, मज़दूरों से जुड़े स्वास्थ्य, शिक्षा, रोज़गार के बजाय धर्म पर ही बहस क्यों ?

आप मीडिया समूहो को जब समझने बैठ जाएँगे तो हक़ीक़त सामने आ जाएगी । धर्म में देश को फँसाए रखना दरअसल देश के विरुद्ध एक बड़ा षड्यंत्र है । सत्ता पर क़ब्ज़ा बनाए रखने के लिए देश के राजनैतिक दल धर्म को आगे रख नूरकुशती कर रहे हैं जिससे कि वोटों का ध्रुवीकरण हो सके । देश को प्रतिदिन नफ़रत की आग और गर्त में ले जा रहे इन राजनैतिक दलों को पूँजीपतियों का मीडिया के रूप में संरक्षण प्राप्त है जो ख़ुद के फ़ायदे के लिए किसी भी हदतक जाने को तैयार है । हिंदू-मुस्लिम का राग अलापकर जनता को बरगलाने की साज़िश हो रही है । सत्ता और विपक्ष अपने मोहरों से बयान दिलाकर तमाशा करवा रहे हैं और हम तमाशाबीन हैं । वक़्त रहते सोचा नहीं गया तो नेता, मीडिया और पूँजीपतियों का देश के विरुद्द यह गठजोड़ एकएक नागरिक पर भारी होगा । हमें और आपको ही अब देश की एकजुटता के लिए आगे आकर कमान संभालनी होगी, धर्म की अफ़ीम खिलाने का प्रयास कर रहे लोगों का बहिष्कार करना होगा और विवेकानंद जी की विश्व बंधुत्व की भावना को प्रचारित प्रसारित करना होगा ।

– लेखक जियाउर्रहमान व्यवस्था दर्पण के सम्पादक हैं ।