कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर पढ़िए ध्रुव गुप्त का आर्टिकल : जाने कहां गए वो लोग !

दलितों, पिछड़ों और वंचितों के मसीहा, समाजवाद के सबसे मजबूत स्तम्भों में एक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कर्पूरी ठाकुर ने बगैर किसी तामझाम और प्रचार के बिहार की राजनीति में न्याय, पारदर्शिता, ईमानदारी और के जो प्रतिमान उपस्थित किए, उसके आसपास भी पहुंचना उनके बाद के किसी राजनेता के लिए संभव नहीं हुआ। एक गरीब नाई परिवार से आए कर्पूरी जी सत्ता के तमाम प्रलोभन और आकर्षण के बीच भी जीवन भर सादगी, सौम्यता और निश्छलता की…

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नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती पर पढ़िए ध्रुव गुप्त का आर्टिकल : ये जिंदगी है कौम की !

‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा’ के उद्घोषक, अंग्रेजी शासन के खिलाफ गठित आज़ाद हिन्द फ़ौज के संस्थापक और सर्वोच्च कमांडर, देश को ‘जय हिन्द’ का नारा देने वाले भारतीय स्वतंत्रता-संग्राम के महानायक नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने सीमित साधनों से जिस तरह ताक़तवर ब्रिटिश साम्राज्यवाद का मुकाबला किया, वह विश्व इतिहास की कुछ दुर्लभ घटनाओं में एक थी। आजाद हिन्द फौज को छोड़ विश्व-इतिहास में ऐसा कोई दृष्टांत नहीं मिलता जहां मात्र कुछ हजार युद्धबन्दियों ने…

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क्रिसमस पर पढ़िए ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल- ‘हिंदुओ के छोटे से तबके ने एजेंडे के तहत मुस्लिम-ईसाई त्योहारों के बहिष्कार की मुहिम चला रखी है’

पिछले कुछ दशकों में कट्टर हिंदुत्व के प्रसार के साथ ही हिन्दुओं के एक छोटे-से तबके ने एक एजेंडे के तहत मुस्लिम और ईसाई त्योहारों के वहिष्कार की मुहिम चला रखी है। मूर्खताओं के इस सिलसिले की नवीनतम कड़ी है मानवता के सबसे बड़े प्रवक्ताओं में एक ईसा मसीह के जन्मदिन का विरोध। 25 दिसंबर के दिन क्रिसमस के समानांतर तुलसी पूजन दिवस का कर्मकांड रचा गया है। हवा बनाई जा रही है कि पवित्र तुलसी आज के ही…

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कमलेश तिवारी हत्याकांड पर पढ़िए WA त्यागी का आर्टिकल : इंसान की मौत पर खुश होना वैसे तो गिद्धों का काम है…

पैगंबर ए इस्लाम पर अपमानजनक टिप्पणी करके सुर्खियो मे आने वाले कमलेश तिवारी की लखनऊ मे दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। पुलिस हत्यारोपियो को पकड़ने में जुटी है। मृतक कमलेश के नौकर का कहना है कि दो युवक बाइक पर आए जिसमें एक ने भगवा कपड़े पहने हुए थे, उन्होंने पहले साथ बैठकर चाय पी, मिठाई खाई और फिर कमलेश की हत्या कर दी। कमलेश की हत्या को एक बहुत बड़ा वर्ग सांप्रदायिक रंग देने में लगा हुआ है।…

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UP में बन्दर मारने पर मुस्लिम युवक गिरफ्तार, वसीम अकरम ने लिखा- ‘तो क्या अब सांप और चूहे को मारने से भी धार्मिक भावनाऐ आहत होगी ?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली जनपद के गांव बीना माजरा में बंदरों के आतंक से परेशान हफीज ने बंदर को गोली मार दी, जिससे बंदर की मौत हो गई। जैसे ही जानकारी बजरंगदल के लोगो को मिली तो उन्होंने हफीज का घर धावा बोल दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह की अनहोनी को तो टाल दिया लेकिन गांव में तनाव बना हुआ है। हफीज समेत उनके दो और भाईयो के ऊपर धार्मिक भावनाएं भड़काने समेत कई धाराओ…

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‘इंजीनियर्स डे’ पर पढ़िए ध्रुव गुप्त का आर्टिकल : विश्वकर्मा होने का अर्थ !

प्राचीन आर्य संस्कृति के विकास में जैसे आर्य ऋषियों की भूमिका रही थी, वैसी ही भूमिका आर्य सभ्यता के निर्माण में उस युग के वास्तुकारों और यंत्र निर्माताओं की रही थी। पुराणों ने जिस एक व्यक्ति को उस सभ्यता के विकास का सर्वाधिक श्रेय दिया है, वे हैं विश्वकर्मा। उन्हें जीवन के लिए उपयोगी कुआं, बावड़ी, जलयान, कृषि यन्त्र, आभूषण, भोजन-पात्र, रथ आदि का अविष्कारक माना जाता है। अस्त्र-शस्त्रों में उन्होंने कर्ण के रक्षा कुंडल, विष्णु के घातक हथियार…

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अटल की पुण्यतिथि पर पढ़िए ध्रुव गुप्त का आर्टिकल- गीत नहीं गाता हूं !

जनसंघ और भाजपा की सांप्रदायिक राजनीति में अटल बिहारी बाजपेयी हिंदुत्व के एकमात्र उदार और समावेशी नेता थे जिनके मन में सभी धर्मों के प्रति आदर भी था और सबको साथ लेकर चलने की काबिलियत भी। लोगों ने उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुखौटा भी कहा और एक गलत विचारधारा के जुड़ा सही राजनेता भी, लेकिन यह भी सही है कि अपने दल में वे ऐसे एकमात्र शख्सियत थे जो संघ की विचारधारा की उपज होनेके बावजूद उससे इतर…

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घाटे का सौदा नहीं करतीं मायावती, 370 हटाने के समर्थन के पीछे ये हैं बड़े कारण-

बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने काफी सोच−समझकर धारा 370 के खिलाफ मतदान किया है। ऐसा करते समय उन्होंने यह भी नहीं सोचा कि उनके इस फैसले से उनका मुस्लिम वोट बैंक खिसक सकता है। संभवतः मायावती को मुस्लिम वोटों से अधिक दलित वोट बैंक की चिंता तो रही ही होगी, इसके अलावा वह यह भी नहीं चाहती होंगी कि कोई उनके ऊपर अम्बेडकर विरोधी होने का ठप्पा लगाए। क्योंकि मायावती की पूरी सियासत संविधान निर्माता और दलितों…

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पढ़िए देश को आईना दिखाता तनवीर का यह आर्टिकल- कश्मीर वह नहीं है, जो मीडिया हमें दिखाता है !

आज कल के तनाव को देखते हुए ऐसा लगता है की मैं कश्मीर से सही समय पे निकल आया. मगर सवाल केवल मेरा नहीं है, देश के एक ऐसे भाग का है जो की भारत के सर का मुकुट है. बहुत से लोग कश्मीर को भारत का अंग नहीं मानते हैं. वह लोग ग़लतफ़हमी में हैं. कश्मीर का फैसला अक्टूबर १९४७ में ही हो गया था, जब वहां के महाराजा ने भारत के साथ संधि पे हस्त्याक्षर किये थे….

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पढ़िए समाज और नेताओं को आईना दिखता ध्रुव गुप्त का आर्टिकल : उन्नाव के आगे क्या ?

उन्नाव के बलात्कार कांड में जो होता हुआ दिख रहा है, वह अपने आधुनिक भारत का शायद सबसे नृशंस और बर्बर परिदृश्य है। एक बच्ची एक दबंग विधायक और उसके गुर्गों के हाथों बलात्कार का शिकार होती है। थाने में अपनी रपट लिखाने के लिए उसे प्रदेश के मुख्यमंत्री के आवास के आगे आत्मदाह की कोशिश करनी पड़ती है। केस दर्ज होने के बाद न्यायालय के दबाव में विधायक की गिरफ्तारी तो हो जाती है, लेकिन पीड़िता के पिता…

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