हिंदी रंगमंच दिवस पर प्रधानमंत्री की नाटकबाज़ी ! पढ़िए नवेद शिकोह का यह आर्टिकल-

अन्यथा मत लीजिएगा। मैं नाटकबाजी कहने को इज़्ज़त अफ्ज़ाई मानता हूं। मेरा हिंदी रंगमच से रिश्ता रहा है। नाटक की हर विधा से वाक़िफ हूं। एक्टिंग, सैट, लाइट, प्रॉप, मेकअप, कास्टयूम, स्क्रिप्ट, प्रचार.. से वाक़िफ रहा हूं। प्रोसेनियम, नुक्कड़ और रेडियो नाटक का पेशेवर रहा। आकाशवाणी के लिए दर्जनों नाटक लिखे। तक़रीबन दस साल पेशेवर नाट्य समीक्षक रहा। इसलिए नाटक को इबादत मानता हूं। सम्मान मानता हूं। इस विधा से भावनात्मक रूप से जुड़ा हूं। बिना किसी सोर्स सिफारिश…

Read More

जमातियों को NSA के तहत जेल में बंद करके पढ़ने को मुहैया कराया जाए क़ुरआन शरीफ़ ! पढ़िए ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल-

देश-दुनिया पर उपस्थित कोरोना संकट के बीच कानूनों और चेतावनियों की अनदेखी कर दिल्ली में सैकड़ों विदेशियों के साथ तब्लीगी जमात द्वारा आयोजित बड़ा जलसा मुझे मूर्खता के सिवा कुछ नहीं लगा था। जैसा कि जलसे में शिरक़त करने वालों को भरोसा दिलाया गया था, अल्लाह द्वारा उनकी सुरक्षा में तैनात सात हजार फरिश्तों में से एक भी उन्हें बचाने नहीं आया। देश भर में अबतक चार सौ से ज्यादा तब्लीगी कोरोना संक्रमित पाए जा चुके हैं और दर्जन…

Read More

मरकज़ में लोग छिपे हैं लेकिन मंदिरों में श्रध्दालु फंसे हैं, दरअस्ल यह बोद्धिक आतंकवाद है, पढ़िए मीडिया को आईना दिखाता वसीम अकरम त्यागी का यह आर्टिकल-

आख़िरकार भारतीय मीडिया को वह कामियाबी मिल ही गई जिसकी उसे बीते सप्ताह से तलाश थी। अब कोरोना का ठीकरा ‘निज़ामुद्दीन’ पर फोड़ा जा रहा है। मीडिया सवाल नहीं उठाएगा, बल्कि ज़िम्मेदारी तय करेगा, कोरोना का ठीकरा फोड़ने के लिए वही सर मिल गया जिस पर किसी भी तरह का इलजाम लगाना ‘राष्ट्रभक्ती’ माना जाता है। अब यह सवाल नहीं होगा निज़ामुद्दीन मरकज़ ने तो 25 मार्च को ही प्रशासन को पत्र लिखकर बताया था कि मरकज से 1500…

Read More

सिखों पर हमला करने वाले इस्लामी स्टेट के आतंकी दरअसल हरामी स्टेट के हैं ! कट्टरपंथी मुस्लिम जरूर पढ़ें नवेद शिकोह का आर्टिकल-

दुनिया में भारत हिंदू-मुसलमान की एकता की मिसाल रहा। देश की आजादी के फौरन बाद नफरत के बंटवारे ने बहुत नफरत घोली। फिर भी कड़वा इतिहास भूल कर भारतीय हिंदू-मुसलमान एकजुट होकर दुनिया के सामने दो धर्मों के बीच सौहार्द की मिसाल क़ायम करते रहे। फिर तालिबान और इस्लामिक स्टेट जैसे संगठन पैदा हुए जिनके ज़ुल्म ने हिंदुओं के मन में मुसलमानों के प्रति नफरत पैदा करने के प्रयास शुरु कर दिए। आग में घी का काम किया भारतीय…

Read More

कोरोना वायरस की चर्चा के बीच पढ़िए ध्रुव गुप्त का आर्टिकल- एक नज़र जेलों पर भी !

प्रधानमंत्री के देश को संबोधन में जो एक बात सबसे अच्छी लगी वह थी अपने को खतरे में डालकर कोरोना के विरुद्ध ज़रूरी लड़ाई लड़ रहे चिकित्सा, पुलिस, प्रशासन से जुड़े लोगों और सफाईकर्मियों के प्रति सम्मान प्रकट करने की भावुक अपील। कोरोना के खतरे के मद्देनज़र सामाजिक संपर्क को यथासंभव टालने की प्रधानमंत्री की अपील पर अमल ज़रूरी है। आश्चर्य बस इस बात का है कि देश के जेलों में बंद कैदियों की अनावश्यक भीड़ पर किसी का…

Read More

दिल्ली हिंसा पर पढ़िए नवेद शिकोह का आर्टिकल : बेगुनाहों के ख़ून की बली देकर बनते हैं बड़े नेता !

कुछ भव्य फिल्में स्टार कास्ट नहीं होती। बड़ा निर्देशक पर्दे के पीछे होता है और छोटे कलाकार सधे हुए परिपक्व निर्देशन में बेहतर फरफार्म करते हैं। निर्देशक प्रधान फिल्मों में नवोदित और सस्ती प्रतिभाओं को मौका मिल जाये तो वो स्टार बनाने की लाइन में होते हैं। दिल्ली के दंगों की फिल्म की स्क्रिप्ट और निदेशन की ज़िम्मेदारी भले ही नामचीन लोगों ने तैयार की हो लेकिन पर्दे पर छुटभैय्ये ही नजर आये। इन छुटभैय्यों के खिलाफ कोई कार्यवाही…

Read More

फणीश्वरनाथ रेणु पर पढ़िए ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल : मिट्टी का संगीतकार !

हिन्दी के कालजयी कथाकार स्वर्गीय फणीश्वर नाथ रेणु को पहला आंचलिक कथाकार माना जाता है। हिंदी कहानी में देशज समाज की स्थापना का श्रेय उन्हें प्राप्त है। उनके दो उपन्यासों – ‘मैला आंचल’, ‘परती परिकथा’ और उनकी दर्जनों कहानियों के पात्रों की जीवंतता, सरलता, निश्छलता और सहज अनुराग हिंदी कथा साहित्य में संभवतः पहली बार घटित हुआ था। हिंदी कहानी में पहली बार लगा कि शब्दों से सिनेमा की तरह दृश्यों को जीवंत भी किया जा सकता है। रेणु…

Read More

आशिक जरूर पढ़ लें ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल- ऐ मुहब्बत तेरे अंज़ाम पे रोना आया !

डेढ़ दशक पहले प्रो. मटुकनाथ चौधरी और उनकी छात्रा जूली की प्रेमकथा देश की सर्वाधिक चर्चित प्रेमकथाओं में एक रही थी। तमाम सामाजिक, पारिवारिक और नैतिक विरोध झेलते हुए दोनों ने साथ रहना स्वीकार किया था। वह भी एक ऐसे वक्त में जब लिव इन रिलेशन प्रचलित नहीं हुआ था। हम सबने मीडिया में उदात्त प्रेम पर उनके सैकड़ों प्रवचन पढ़े-सुने थे। कुछ ही सालों में जाने क्या हुआ कि दोनों के बीच अलगाव की ख़बरें आईं और उसके…

Read More

पढ़िए सत्ता के चापलूसों को आइना दिखाता नवेद शिकोह का आर्टिकल : सुधीर जाहिल नेता हैं या पत्रकार !

खुल कर तो नहीं कहा पर बंद मायनों में सुधीर चौधरी ने दिल्ली की जनता को गद्दार, खुदगर्ज और देशद्रोही तक बोल दिया। उन्होंने जी न्यूज के डीएनए मे अपने विश्लेषण मे कहा कि दिल्ली की जनता को देश की कोई चिंता नहीं। देश टूटे-फूटे इससे उनका कोई लेना देना नहीं। बालाकोट और एयर स्ट्राइक से उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। राष्ट्र, राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय मुद्दों से कोई लेना-देना नहीं। दिल्ली की जनता बस अपनी स्थानीय दुनिया तक सीमित…

Read More

वैलेंटाइन वीक पर जरूर पढ़ें पूर्व IPS ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल- कहो ना प्यार है !

हमारी पीढ़ी में अपने सपनों की मलिका को प्रोपोज करने का साहस कम ही होता था। वह कभी मुख़ातिब भी हुई तो मुंह से ज़ुबान गायब। जब तक कुछ कहने का साहस जुटा पाएं, हमारी दुनिया लुट चुकी होती थी। वह दिल में किसी की तस्वीर बनाकर उसके तसव्वुर में जिंदगी गुज़ार देने वाला दौर था। उस शब्दातीत, अतीन्द्रिय, एकांत प्रेम की कुछ अलग व्यथा, कुछ अलग ही तिलिस्म हुआ करता था। आज की पीढ़ी खुली हुई है। वह…

Read More