पढ़िए मुस्लिम नेताओं को आईना दिखाता नवेद का आर्टिकल- ‘दलित-पिछड़ों के मिलन में दोराहे पर UP का मुसलमान’

दलितों और पिछड़ों की राजनीति में माहिर दल सपा-बसपा दशकों पुरानी तल्खियां भुला कर एक हो गये। दलितों-पिछड़ों को एक छतरी के नीचे लाकर यूपी से भाजपा को साफ किया जा सकता है, इस कॉन्फिडेंस में ये गठबंधन मुस्लिम वोट को लेकर ओवर कॉन्फिडेंस मे है। बसपा प्रमुख मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की साझा प्रेस कांफ्रेंस में गठबंधन की घोषणा में जाति के खूब जिक्र हुए लेकिन मुस्लिम समाज के किसी भी दर्द की चर्चा नहीं हुई।…

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2019 लोकसभा चुनाव की पहली दहाड़ का भोपू बना सोशल मीडिया, बुआ-बबुआ का निजी निमंत्रण पत्र हुआ वायरल

मीडिया तो हाथी के दिखाने के दांतों की तरह इस्तेमाल होगा, देर तक चबाने वाले दांतों जैसी सोशल मीडिया के मुंह में सियासत अपने प्रचार की असली खुराक डालेगी। बेचारे पेशेवर पत्रकारों को इस बात का अहसास तब हुआ जब सपा-बसपा की संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस का आमंत्रण उनके हाथ बहुत बाद आया पहले सोशल मीडिया पर नजर आया। बुआ-बबुआ ने लोकसभा चुनाव की यलग़ार कर दी। आगामी चुनाव में यूपी की भूमिका सबसे अहम है और यूपी में सपा-बसपा…

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शेख हसीना जैसी प्रचंड जीत आजतक दक्षिण एशिया में किसी नेता की नहीं हुई

ढाबांग्लादेश में एक बेगम की पार्टी को 300 में से 287 सीटें मिल गईं और दूसरी बेगम की पार्टी को मुश्किल से छह सीटें मिलीं। पहली बेगम शेख हसीना वाजिद हैं और दूसरी बेगम खालिदा जिया हैं। बांग्लादेश पिछले 30 साल से इन दोनों बेगमों के बीच झूल रहा है। आवामी लीग की नेता हसीना शेख मुजीब की बेटी हैं और बांग्लादेश नेशनल पार्टी की नेता खालिदा जिया राष्ट्रपति जिया-उर-रहमान की पत्नी हैं। जनरल इरशाद की फौजी तानाशाही से…

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…इसलिए मनमोहन कहलाए, ‘एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’?

बात करीब डेढ़ दशक पुरानी है, जब 2004 के लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद सबसे बड़ा गठबंधन होने के नाते यूपीए का शीर्ष नेतृत्व जोड़तोड़ कर केन्द्र में सरकार बनाने का सपना साकार करने जा रहा था। सोनिया गांधी की प्रधानमंत्री के रूप में ताजपोशी होना तय थी, लेकिन सोनिया गांधी का विदेशी मूल का होना भारी पड़ा। सरकार बनाने का दावा ठोंकने के लिये सोनिया गांधी के ने नेतृत्व में तमाम दलों के नेता राष्ट्रपति के…

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अटल जी के जन्मदिवस पर पढ़िए आडवाणी का दर्द बयाँ करती कविता – ‘बेवफा’

अटल जी के जन्मदिवस पर आडवाणी जी का दर्द बयां करती यूपी के वरिष्ठ पत्रकार नवेद शिकोह की कालजयी रचना :- बेवफा : छोड़कर वो घोसला उड़ने के क़ाबिल हो गया, बेवफाओं में अब उसका नाम शामिल हो गया। शाख़ तक जाना चहकना मैंने सिखलाया जिसे, वो परिन्दा आसमां जाने के क़ाबिल हो गया। फूस के इक झोंझ में रहता था वो महफूज था, मौज की लालच में वो नादान ग़ाफिल हो गया। ज़िन्दगी जिसने दी उसको वो अकेला…

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प्रधानमंत्री इस देश में अपनी जान को खतरा महसूस कर सकते हैं तो कोई आम या खास इंसान क्यों नहीं ?

किसी तकलीफ को लेकर मरीज डाक्टर के पास आया। मुंह में तंबाकू दबाये मरीज से डाक्टर ने गुस्से में कहा- मुझे डर है कि आपको कैंसर हो सकता है। तंबाकू छोड़िए। जांच कराइये और फिर इलाज कराइये। ये डाक्टर हर मरीज से ऐसे ही पेश आता होगा। अंदाजा लगाइये कि इस डाक्टर को गद्दार या पक्षपाती कहने वाले किस किस्म के लोग होंगे ! माॅब लिचिंग.. जला के मार दी गयी बच्ची…. भीड़ द्वारा मार दिये गये दरोगा…. का…

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भाजपा ने मुसलमानों को अपने क़रीब करने का सुनहरा मौक़ा गँवा दिया !

2014 का आम चुनाव जीतने के बाद, भाजपा के पास मुसलमानों के प्रति अपनी छवि सही करने का बहुत अच्छा मौक़ा था। लेकिन भाजपा ने अपने नेताओं के ज़बान पर ना तो लगाम लगाया और ना ही उन नेताओं के ज़रिए दिए गए बयानों पे कोई लब कुशाई की। भाजपा के तमाम ऐसे नेता बल्कि मन्त्री अपने हल्के, गैंरसंवैधानिक बयानों से ना तो सिर्फ मुसलमानों के लिए ज़हर उगलते रहे बल्कि हिन्दुतान की बैनुलक़वामी छवि धोमिल करते रहे। 2014…

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बुलंदशहर इंस्पेक्टर सुबोध हत्याकांड : अब पुलिस को चाहिये कि थाने को एक दुकान बना दे !

किसी भी मुल्ज़िम की जो संगीन दफा हत्या और वह भी जघन्य हत्या में मुल्ज़िम हो गिरफ्तार न करे। शोक परेड की औपचारिकता का कोई अर्थ नहीं है जब कर्तव्य पालन में शहीद होने वाले एक इंस्पेक्टर की ह्त्या का नामजद, बजरंगदल का गुंडा अभियुक्त खुले आम वीडियो ब्लॉग बना कर अपनी सफाई दे रहा है और हम सिर्फ इसलिए गिरफ्तार नहीं कर रहे हैं कि वह सत्तारूढ़ दल के नज़दीक है। सीएम गिरफ्तार करने और न करने को…

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एक शहादत ने लाखों जिन्दगियां बचा लीं वरना कुछ ही वक्त में बुलंदशहर श्मशान और कब्रिस्तान में तब्दील हो सकता था !

एक बड़ी साजिश का शक यक़ीन की तरफ बढ़ रहा है । कल्पना कीजिए गांव के गांव भड़का दिये जाते, भोले-भाले ग्रामीणों को बहकाकर उत्पाती उनके साथ दूसरे समुदाय के जलसे की लाखों की भीड़ के आमने-सामने आ जाते तो क्या होता ? कुछ ही वक्त में बुलंदशहर श्मशान और कब्रिस्तान में तब्दील हो सकता था। देशभर में दंगों की आग फैल सकती थी। दरोगा सुबोध कुमार सिंह साजिश का जहर खुद पीकर अपनी जान पर नहीं खेलता तो…

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हत्यारे गोरक्षकों की संवेदना और आस्था तभी जगती है जब सामने वाला मुसलमान हो !

इस देश के हिन्दू संगठनों में गाय के प्रति हिलोरे मार रही करुणा उनकी मानवीय संवेदना की उपज नहीं है। इन संगठनों को पता है कि भारत विश्व का सबसे बड़ा गोमांस निर्यातक देश है। ज्यादातर हिन्दुओं द्वारा संचालित दर्जनों लाइसेंसी कारखानों में हर दिन हज़ारों गाएं और भैंसे कटती हैं और उनके मांस को अरब और यूरोपीय देशों के नागरिकों के डाइनिंग टेबुल पर परोसा जाता है। उन्हें बंद करने की मांग कभी नहीं उठती। भाजपा शासित प्रदेश…

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