पढ़िए नेताओं को आईना दिखाता ध्रुव गुप्त का आर्टिकल- राजनीति और भाषा की मर्यादा !

देश की राजनीति में भाषा, भंगिमा और गंभीरता का गिरता स्तर गंभीर चिंता का विषय है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह सहित भाजपा के ज्यादातर छोटे-बड़े नेता भाषायी दरिद्रता, फूहड़पन और मूर्खता में सबसे आगे हैं। अपने को भावी प्रधानमंत्री के तौर पर देखने वाली ममता बनर्जी और मायावती भी उनसे कुछ कम फूहड़ और अहंकारी नहीं हैं। केजरीवाल, ओवैसी, नीतीश कुमार जैसे लोगों की बातों का अहंकार खींझ पैदा करता है। राहुल गांधी, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी जैसे…

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पढ़िए UP के वरिष्ठ पत्रकार नवेद शिकोह की रचना- ‘मौलाना के फतवे बिके, हिन्दूवाद के झंडे बिके’

मौलाना भी बिक गये ! मौलाना के फतवे बिकेहिन्दूवाद के झंडे बिके पत्रकारों के कलम बिके नेताओं की शरम बिके मजहबी जज़्बात बिके जातिवाद का श्राप बिके नौटबंदी के घाव बिके लाइन मे मरते इन्सान बिके दादरी के अखलाक बिके बाबरी के अहसास बिके विकास के झासे बिके राम मंदिर के वादे बिके शरियत के तलाक बिके घर वापसी-लव जेहाद बिके एनआरएचएम जरायम बिके जेल में लटके सचान बिके मुजफ्फरनगर नरसंहार बिके जवाहरबाग का काण्ड बिके सत्तर साल बेहाल…

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..बेहतर होगा राष्ट्रवादी चौकीदार नरेंद्र मोदी सैनिक तेजबहादुर के समर्थन में वाराणसी की सीट छोड़ दें !

डर लग रहा है, दूध का दूध और पानी का पानी ना हो जाये। देशभक्त देशभक्ति के इम्तिहान में फेल ना हो जायें। वाराणसी के ही नहीं देशभर के राष्ट्रवादियों की परीक्षा है। जिनका वोट वाराणसी में नहीं हैं उन्हें फौजी का समर्थन करने के लिए मां गंगा मइया बुला रही हैं। रोड शो में फूल बरसाने वालों को भी मां आवाज़ दे रही हैं। किस्म-किस्म के इंटरव्यू करने वाले राष्ट्रवादी चैनलों के लिए गंगा मइया का बुलावा आया…

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अली-बजरंगबली को साथ देखना चाहता है नवाबों का शहर ‘लखनऊ’

नवाबों के शहर का मिज़ाज़ बदल रहा है। इस बार ना तीतर लड़ रहा है ना बटेर। नफरत की प्रतीक लड़ाई मोहब्बत के शहर को पंसद नहीं। बिना लड़े मोहब्बत जीतती दिख रही है।आध्यात्मिक ताकत और सूफिज्म की रंगत नवाबी शहर के चेहरे पर झलक रही है। ज़ेहन मे अली और जिगर में बजरंगबली वाला ये शहर अलहदा हो भी क्यों ना ! शहर को तहज़ीब- तमद्दुल, नज़ाकत-नफासत, मोहब्बत, भाईचार और मज़हबी सौहार्द की नेमतें देने वाले हज़रत अली…

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एक्सक्यूज मी.. राजनीति में जावेद हबीब का क्या काम है !

वीवीआईपी टाइप के लोगों के बाल काटने वाले जावेद हबीब भाजपा में शामिल हो गये। एक पत्रकार ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से पूछा – इनका राजनीति में क्या काम ! अमित शाह बोले- कुछ निजी कामों के लिए भी कुछ खास लोगों को पार्टी में शामिल करना पड़ता है। पत्रकार- अच्छा-अच्छा.. वीवीआईपी नाई बाल काटने के साथ गंजे सर पर बाल उगाते भी हैं। आपको इनकी ख़ास जरूरत होगी।अमित शाह : अरे नहीं बेवकूफ, हम लोग संस्कार वाले…

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साध्वी प्रज्ञा मुस्लिम होती तो आतंकी होती ! पढ़िए मीडिया को आईना दिखाता यह आर्टिकल-

आप सोचिये कि यदि किसी मुस्लिम को जिसपर आतंकी घटना में शामिल होने का केस चल रहा हो उसे कांग्रेस या अन्य कोई दल लोकसभा का प्रत्याशी बना दे तो देश में कथित राष्ट्रवादियों और मीडिया की क्या प्रतिक्रिया होती ? देशभर में भाजपाइयों ने हंगामा खड़ा कर दिया होता और तूफ़ान ला दिया होता | लेकिन राष्ट्रवाद का राग अलापने वाली भाजपा ने अचानक चुनाव में आतंकवाद की आरोपी मालेगांव ब्लास्ट की आतंकी साध्वी प्रज्ञा को भोपाल से…

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‘जिन देवी-देवताओं को देखा-जाना भी नहीं है, उनके पीछे हम सब पागल हैं’, पढ़िए जल दिवस’ का यह संदेश-

जिन देवी-देवताओं को हमने देखा-जाना भी नहीं हैं, उनके पीछे हम सब पागल है। उनके मंदिरों, इबादतगाहों और स्तुतियों ने हमारे जीवन का ज्यादातर हिस्सा घेर रखा है। जो जीवित देवी-देवता हमारी आंखों के आगे हैं और जो अनंत काल से हमारे लिए सब कुछ लुटाते रहे हैं, यदि हमने उनकी भी इतनी ही चिंता की होती तो हमारी यह दुनिया आज स्वर्ग से भी सुन्दर होती। ऐसे जीवित और वास्तविक देवी-देवताओं में ऊपर सूरज, नीचे धरती तथा जल…

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पद और महत्व न मिलने से मुस्लिम मोदी भक्तों में निराशा, मिशन 2019 पर ग्रहण !

वर्ष 2014 मे जब लोकसभा चुनावों की प्रक्रिया चल रही थी जो देश मे एक एैसा माहौल था कि यदि भाजपा और तत्कालीन गुजरात मुख्यमन्त्री नरेन्द्र मोदी सत्ता में आते है तो एक वर्ग विशेष के साथ न्याय नहीं होगा। विशेषरूप से भारतीय मुस्लिम समाज एक प्रकार से डरा हुआ था कि यदि नरेन्द्र मोदी प्रधानमन्त्री बन गए तो उनके लिए देश मे रहना मुस्किल हो जाएगा। परन्तु ऐसे निराशाजनक माहौल मे भी कुछ मुस्लिम तत्कालीन गुजरात मुख्यमन्त्री नरेन्द्र…

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क्या पत्रकारों की सुरक्षा और उनके अधिकार की आवाज सुनी जाएगी ?

दुनिया भर में जो पत्रकार, लोगों की खबर लेते और देते रहते हैं वो कब खुद खबर बन जाते हैं इसका पता नहीं चलता है। पत्रकारिता के परम्परगत रेडियो, प्रिंट और टीवी मीडिया से बाहर, खबरों के नए आयाम और माध्यम बने हैं। जैसे जैसे खबरों के माध्यम का विकास हो रहा है, खबरों का स्वरूप और पत्रकारिता के आयाम भी बदल रहे हैं। फटाफट खबरों और 24 घंटे के चैनल्स में कुछ एक्सक्लूसिव दे देने की होड़, इतनी…

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भगवा जैसा पवित्र लिबास बदनाम कर रहे भगवाधारियों के तार कश्मीरी आतंकियों से जुड़े हो सकते हैं !

अपवित्र आतंक का ड्रेस कोड पवित्र होता है। जिहाद पवित्र है। इसका शाब्दिक अर्थ है- आत्मरक्षा के लिए किया गया युद्ध। यानी डिफेंसिव वार।देश का हर सैनिक जिहादी होता है। अपवित्र आतंकवादियों ने अपने गंदे मकसद वाले खून-खराबा को पवित्र जिहाद का नाम दिया है। अशांति और नफरत फैलाने वाले दहशतगर्दों ने अपने संगठनों का नाम पैगम्बर मोहम्मद साहब के नाम पर रखा है। वही पैगम्बर जिनका मुख्य पैगाम मानवता, शांति, अमन, मोहब्बत और भाईचारा है। मानवता के दुश्मन…

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