SC/ST पर अदालत की परवाह नहीं करने वाली सरकार राममंदिर पर खामोश क्यों ?

दिल्ली| सर्वोच्च न्यायालय के विरुद्ध जाकर सरकार ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जन जाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम में जब से संशोधन किया है तब से पूरे देश में यह बहस छिड़ी हुई है कि सरकार और सुप्रीम कोर्ट में आखिर बड़ा कौन है। इसके साथ ही कोर्ट में विचाराधीन राम मन्दिर जैसे अनेक संवेदनशील मुद्दों की भी चर्चा आम हो गयी है। इन मुद्दों के दम पर सत्ता हासिल करने वाले दल अब तक कोर्ट की दुहाई देकर ही…

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पूरा रुपया अब भी आम आदमी तक नहीं पहुँचता, मोदी के दावे खोखले !

दिल्ली| प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में एक आम सभा में दावा किया कि अब दिल्ली से सरकारी योजनाओं के जरिए भेजा गया एक रूपया पूरा का पूरा आम लोगों तक पहुंचता है। मोदी ने यह दावा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की उस स्वीकारोक्ति के संदर्भ में दिया, जिसमें गांधी ने कहा था कि दिल्ली से एक रूपया निकलता है तो 15 पैसे ही लोगों तक पहुंचते हैं। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद क्या यह माना जाए कि…

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पत्रकारों के चहीते आखिरी चिराग ह्दय नारायण दीक्षित !

नवेद शिकोह – तमाम दिग्गज राजनेता लखनऊ के पुराने पत्रकारों के अज़ीज़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश भाजपा का केंद रहा है और इस प्रदेश के भाजपा नेता पार्टी की ताक़त बने हैं। पुराने जमाने में वाकई भाजपा की पहचान चाल-चरित्र, चेहरे से थी। कई ज़मीनी नेता अपनी सादगी की वजह से भी जाने जाते थे। इनका ज़मीन से सीधा रिश्ता था। ये नेता संस्कारी, व्यवहार कुशल और पत्रकारों से खूब घुलते-मिलते थे। पत्रकारों को ख़ूब इज्जत देते थे। यूपी…

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लोकतंत्र खतरे में है ! गैर-सांप्रदायिक ताकतें 2019 के चुनावों के लिये गठबंधन करें : अमर्त्य सेन

दिल्ली| नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने कहा है कि सभी गैर-सांप्रदायिक ताकतों को वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों के लिये एक साथ आना चाहिए और वाम दलों को उनके साथ शामिल होने में ‘‘हिचकना’’ नहीं चाहिए क्योंकि ‘‘लोकतंत्र खतरे में है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमें निश्चित रूप से निरंकुशता के विरुद्ध विरोध जताना चाहिए। हमें निश्चित रूप से उनकी निरंकुश प्रवृत्तियों के खिलाफ लड़ना चाहिए। हमें निश्चित रूप से उन मुद्दों की आलोचना करनी चाहिए जहां हमें…

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व्यंग : फिल्मों में पुलिस : क़ानून के हाथ बंधे हैं ! और यह तस्वीर भी कुछ कहती है !!

कार्यालय|….आजकल यह तस्वीर फेसबुक व सोशल-मिडिया पर तैर रही है,अनायास ही कुछ देर ध्यान आकर्षित कराती है और सोचने पर मजबूर करती है कि फिल्मों के डायलाग क्या ,जमीनी हक़ीकत बन सकते हैं ? रोज यातायात-पुलिस हेलमेट के चालान काट रही होती है, थाना-चौकी में भी मेहमान आ रहे है,कुटाई चल रही है,परन्तु किसकी ? लोगों को कहते हुए सुना जाता है कि पुलिस का चक्कर पड़ गया है,अब रुपयों का इंतजाम करना पड़ेगा, आरोपी और अभियुक्त दोनों को…

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तेल कंपनियों ने पेट्रोल डीलरों से मांगी जाति, धर्म, से जुड़ी जानकारियां : रविश कुमार

दिल्ली|एक ऐसे दौर में जब हमारी निजता, हमारे निजी आंकड़ों की प्राइवेसी को लेकर ख़तरा बढ़ रहा है एक नया विवाद खड़ा हो गया है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने अपने डीलरों से कहा है कि वे अपना यहां काम करने वाले करीब दस लाख कर्मचारियों का डेटा दें. कुल 24 प्रकार की जानकारी मांगी गई है. इसमें जाति पूछी गई है. धर्म और चुनाव क्षेत्र की भी जानकारी मांगी गई है. जाति और धर्म और चुनाव क्षेत्र की जानकारी हासिल…

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स्वामी अग्निवेश को नही देने दी PM वाजपेयी को श्रद्धांजलि, गुंडों ने की मारपीट, हिंदूवादियों के वहशीपन पर मीडिया खामोश !

पूरे विश्व मे शांति और बंधुत्व की बात करने वाले भारत रत्न पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने कभी सोचा नही होगा कि उनके ही अनुयायी एक निहत्थे और बेबस सन्यासी सन्त को पीटेंगे और जान लेने पर उतारू हो जाएंगे । लेकिन ऐसा ही हुआ देश के महान नेता अटल बिहारी वाजपेयी की मृत्यु पर । निश्चित ही अटल जी की आत्मा बेचैन होगी और शुक्रवार को भाजपा मुख्यालय के बाहर जो हुआ उसे देखकर शर्मशार भी होगी…

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भारत में गरीब होना पाप है ! हमें जश्न-ए-आजादी मनाने का कोई हक नहीं !!

ये पंक्तियां लिखते वक्त मेरे दिलो-दिमाग पर मुजफ्फरपुर और देवरिया की अबोध बालिकाओं की आहें-कराहें दस्तक दे रही हैं। जो लोग तीन दिन बाद आजादी का जश्न मनाने के लिए बेताब बैठे हैं, वे एक पल रुककर सोचते क्यों नहीं कि गुजरे सात दशकों में हमने हिन्दुस्तान के बचपन और तरुणाई को क्या दिया है? हमें यह विचार भी करना चाहिए कि ‘आज के बच्चे कल के नागरिक’ जैसे भावुक नारों का ऐसा दर्दनाक हश्र क्यों हुआ? एक हिन्दुस्तानी…

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#आजादी के लिए #मर-मिटने की सोच भी #गायब होती जा रही है

आज़ादी मिले कई दशक हो गए। अनगिनत कुर्बानियों की कोख से निकली आज़ादी ने हमें लोकतंत्र सा बेटा दिया जो भ्रष्टाचार, घोटालों, स्वार्थ, अधर्म, कुकर्म व इनके दोस्तों के साथ खेला तो बिगड़ गया। यह बात तल्ख़ लगती है मगर सच तो है कि हमने इकहत्तर साल की आज़ादी को ज़िंदगी के जुए की चौसर बना दिया और देश और मातृभूमि को बिसरा दिया। क्या 15 अगस्त का दिन हमारे लिए एक और पेड हॉलीडे का दिन है। खाने…

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#स्वतंत्रता दिवस विशेष : अंग्रेजों को पहली बार #लखनऊ में मिली थी शिकस्त

30 जून 1857 को चिनहट की कठौता झील के आसपास मौजूद आजादी के दीवाने देशभक्त रणबांकुरों ने फिरंगी हुकूमत की सेना को ऐसा सबक सिखाया कि उसके पैर उखड़ गए और उन्होंने भागने में ही अपनी भलाई समझी। इस अविस्मरणीय युद्ध का प्रतीक बने कांशीराम पर्यटन प्रबंध संस्थान में स्थित शहीद स्मारक आज भी भारतीय क्रांति के योद्धाओं की गाथा बयां कर रहा हे। 1857 राष्ट्रवादी मंच के संयोजक अमरेश मिश्र बताते हैं कि अवध में खुले मैदान में…

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