इस ‘झाड़ू’ को देखा तो ऐसा लगा, जैसे मथुरा का ख्‍वाब…जैसे यमुना की आस…

कल संसद परिसर में अपनी सांसद परम आदरणीय, प्रात: स्‍मरणीय हे-मा-जी को ‘झाड़ू’ लगाते देखा। यकीन मानो…कलेजा मुंह को आ गया। मन में एक हूक से उठी, लेकिन यह सोचकर बैठ गई कि क्‍या-क्‍या न किया इश्‍क में क्‍या-क्‍या न करेंगे। बुढ़ापे का इश्‍क वाकई बहुत शिद्दत से निभाया जाता है। यदि आप ये इश्‍क-मुश्‍क या प्‍यार-मोहब्‍बत वाला ”साक्षी मिश्रा टाइप” कुछ समझ रहे हैं तो गलत समझ रहे हैं। ये साक्षी भाव वाला इश्‍क है। यहां उस राजनीति…

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ओह, ट्विंकल ! ऐसे हत्यारे या बलात्कारी दरिंदे हर धर्म और जाति में मौज़ूद हैं…

अलीगढ़ में ढाई साल की ट्विंकल का अंगभंग, हत्या और शायद बलात्कार मानवता के ख़िलाफ़ सबसे नृशंस अपराधों में एक है जिसे सुनकर पूरा देश भयाक्रांत है। इस पाशविकता के ख़िलाफ़ देश भर में आक्रोश तो है, लेकिन यह आक्रोश जिस रूप में व्यक्त हो रहा है, वह भी कुछ कम पाशविक नहीं है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग ट्विंकल का वीभत्स पोस्टमार्टम रिपोर्ट शेयर कर सभी संवेदनशील लोगों, विशेषकर हर बच्ची के मां-बाप को अवसाद से भर रहे…

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..धर्मों की आड़ में अबतक दुनिया में कितने विनाश हुए हैं !

धर्मों ने मनुष्यता को जितना दिया है उससे ज्यादा हमसे छीना ही है। दुनिया के सबसे ज्यादा नरसंहार धर्म के नाम पर ही हुए हैं। भूख, बीमारी और युद्ध से ज्यादा इंसानी जानें धर्मों ने ली हैं। आज के वैज्ञानिक युग में भी धार्मिक कट्टरता ने दुनिया को नर्क बनाया हुआ है। और यह तब है जब दुनिया का कोई भी धर्म हिंसा का समर्थन नहीं करता। सभी धर्म प्रेम, अमन, करुणा और भाईचारे की ही बात करते हैं।…

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भाजपा ने जनमत को जातिवाद, क्षेत्रवाद, भाषावाद से हटकर एक सूत्र में पिरोहने का कार्य किया

देश की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी का पुनः वापिसी होना और जोरदार बहुमत हाँसिल करना कोई आश्चर्यजनक नही है क्योंकि लबे समय से विपक्षी पार्टियों का प्रदर्शन सकारात्मक न होकर नकारात्मक ही रहा है। खास बात यह है किसी भी विपक्षी पार्टी का उद्देश्य जीत हाँसिल करना कम अपितु सत्तारूढ़ पार्टी को हराना रहा है। अब तक ज्यादातर पार्टिंयाँ कुछ जाति विशेष तक सीमित रही है और उन्होंने इस आधार पर सत्ता पा काबिज होने की कोशिश की…

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लोकसभा चुनाव : किसकी मुट्ठी लाख की, किसकी मुट्ठी खाक की, देशभर की निगाहें, फैसला होगा कल-

शुभम अग्रवाल/ नई दिल्ली । लोकसभा चुनाव 2019 में कौन जीता और कौन हारा इससे परदा उठेगा और फिर से एक बार इतिहास के पन्नो पर नाम अंकित हो जाएगा । लेकिन नतीजों की सुबह तक पहुंचने के लिए अभी रात से गुज़रना है। रात गहरी हो रही है और नेताओं की नींद उड़ी है ।सुबह क्या फ़ैसला आएगा ये जानने की बेचैनी से आंखों से नींद गायब है। क्योंकि जनता की माने तो “आज की रात इन्हें नींद…

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पढ़िए नेताओं को आईना दिखाता ध्रुव गुप्त का आर्टिकल- राजनीति और भाषा की मर्यादा !

देश की राजनीति में भाषा, भंगिमा और गंभीरता का गिरता स्तर गंभीर चिंता का विषय है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह सहित भाजपा के ज्यादातर छोटे-बड़े नेता भाषायी दरिद्रता, फूहड़पन और मूर्खता में सबसे आगे हैं। अपने को भावी प्रधानमंत्री के तौर पर देखने वाली ममता बनर्जी और मायावती भी उनसे कुछ कम फूहड़ और अहंकारी नहीं हैं। केजरीवाल, ओवैसी, नीतीश कुमार जैसे लोगों की बातों का अहंकार खींझ पैदा करता है। राहुल गांधी, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी जैसे…

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पढ़िए UP के वरिष्ठ पत्रकार नवेद शिकोह की रचना- ‘मौलाना के फतवे बिके, हिन्दूवाद के झंडे बिके’

मौलाना भी बिक गये ! मौलाना के फतवे बिकेहिन्दूवाद के झंडे बिके पत्रकारों के कलम बिके नेताओं की शरम बिके मजहबी जज़्बात बिके जातिवाद का श्राप बिके नौटबंदी के घाव बिके लाइन मे मरते इन्सान बिके दादरी के अखलाक बिके बाबरी के अहसास बिके विकास के झासे बिके राम मंदिर के वादे बिके शरियत के तलाक बिके घर वापसी-लव जेहाद बिके एनआरएचएम जरायम बिके जेल में लटके सचान बिके मुजफ्फरनगर नरसंहार बिके जवाहरबाग का काण्ड बिके सत्तर साल बेहाल…

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..बेहतर होगा राष्ट्रवादी चौकीदार नरेंद्र मोदी सैनिक तेजबहादुर के समर्थन में वाराणसी की सीट छोड़ दें !

डर लग रहा है, दूध का दूध और पानी का पानी ना हो जाये। देशभक्त देशभक्ति के इम्तिहान में फेल ना हो जायें। वाराणसी के ही नहीं देशभर के राष्ट्रवादियों की परीक्षा है। जिनका वोट वाराणसी में नहीं हैं उन्हें फौजी का समर्थन करने के लिए मां गंगा मइया बुला रही हैं। रोड शो में फूल बरसाने वालों को भी मां आवाज़ दे रही हैं। किस्म-किस्म के इंटरव्यू करने वाले राष्ट्रवादी चैनलों के लिए गंगा मइया का बुलावा आया…

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अली-बजरंगबली को साथ देखना चाहता है नवाबों का शहर ‘लखनऊ’

नवाबों के शहर का मिज़ाज़ बदल रहा है। इस बार ना तीतर लड़ रहा है ना बटेर। नफरत की प्रतीक लड़ाई मोहब्बत के शहर को पंसद नहीं। बिना लड़े मोहब्बत जीतती दिख रही है।आध्यात्मिक ताकत और सूफिज्म की रंगत नवाबी शहर के चेहरे पर झलक रही है। ज़ेहन मे अली और जिगर में बजरंगबली वाला ये शहर अलहदा हो भी क्यों ना ! शहर को तहज़ीब- तमद्दुल, नज़ाकत-नफासत, मोहब्बत, भाईचार और मज़हबी सौहार्द की नेमतें देने वाले हज़रत अली…

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एक्सक्यूज मी.. राजनीति में जावेद हबीब का क्या काम है !

वीवीआईपी टाइप के लोगों के बाल काटने वाले जावेद हबीब भाजपा में शामिल हो गये। एक पत्रकार ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से पूछा – इनका राजनीति में क्या काम ! अमित शाह बोले- कुछ निजी कामों के लिए भी कुछ खास लोगों को पार्टी में शामिल करना पड़ता है। पत्रकार- अच्छा-अच्छा.. वीवीआईपी नाई बाल काटने के साथ गंजे सर पर बाल उगाते भी हैं। आपको इनकी ख़ास जरूरत होगी।अमित शाह : अरे नहीं बेवकूफ, हम लोग संस्कार वाले…

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